कौशाम्बी मे दलितों को न्याय से वंचित करने का आरोप, कटघरे में थाना करारी पुलिस ,डेढ़ माह से FIR नहीं, कानून की खुलेआम अवहेलना,डेढ़ माह से लटका न्याय, दरोगा–सिपाही बने कानून से ऊपर
👉 कौशाम्बी में दलित न्याय का गला घोंटती पुलिस, डेढ़ माह से FIR गायब, थाना करारी बना आरोपियों का ढाल
👉 दरोगा–सिपाही पर मिलीभगत का आरोप, कानून को रौंद रहे जिम्मेदार ,मारपीट पीड़ित दलितों को धमकी, पुलिस संरक्षण में दबंग बेखौफ
👉 महिला पीड़िता को उल्टा चालान,अत्याचारियों को खुली छूट,SC/ST कानून की उड़ रही धज्जियां, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल
👉थाना करारी पुलिस पर गंभीर आरोप, दलितों की FIR दबाने का खेल, अत्याचार पीड़ित काट रहे थाने के चक्कर,पुलिस संरक्षण में आरोपी ,SC/ST कानून की अनदेखी, कटघरे में कौशाम्बी पुलिस
कौशाम्बी । जनपद के थाना करारी क्षेत्र में पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्राम भैला मकदुमपुर निवासी अनिल कुमार पुत्र बैजनाथ के साथ 23 नवंबर 2025 को मारपीट, जातिसूचक गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी की घटना हुई, जिसकी सूचना तत्काल 112 नंबर पुलिस को दी गई। पुलिस मौके पर पहुंची भी और उसी दिन थाना करारी में लिखित प्रार्थना पत्र दिया गया, इसके बावजूद आज तक FIR दर्ज नहीं हुई। थाने से न्याय न मिलने पर पीड़ित ने 4 दिसंबर 2025 को एसपी कौशाम्बी के कार्यालय में शिकायत की, लेकिन वहां से भी सीओ मंझनपुर के यहां से केवल “जांच” का झुनझुना थमा दिया गया। अब डेढ़ माह बीतने वाला है और मामला ठंडे बस्ते में दबा दिया गया है। यह स्थिति SC/ST अत्याचार निवारण अधिनियम की सीधी अवहेलना मानी जा रही है, जिसमें FIR दर्ज करना अनिवार्य है। 
थाने में तैनात दरोगा नंदूयादव–राजन सिपाही पर मिलीभगत और भ्रष्टाचार के आरोप ।
पीड़ित का आरोप है कि थाना करारी में तैनात दरोगा नंदू यादव और क्षेत्रीय हल्का सिपाही विपक्षियों से मिलीभगत कर मामले को “जांच में झूठा” बताने में लगे हैं। आरोप है कि अधिकारियों को भी गुमराह किया गया और प्रभावशाली आरोपियों से साठगांठ कर मामला दबाया जा रहा है। पीड़ित और उसके परिवार को लगातार धमकियां दी जा रही हैं, जबकि आरोपी पुलिस संरक्षण में खुलेआम घूम रहे हैं। मामला गांव में 20 वर्षों से स्थापित बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के पास अवैध अतिक्रमण से जुड़ा है, जिसका विरोध करने पर यह हिंसा हुई। इसके बावजूद पुलिस का मौन रहना कई सवाल खड़े करता है।
दूसरा मामला भी दबाया गया, दलित महिलाओं पर कार्रवाई!
थाना करारी का एक और मामला पुलिस की भूमिका को और संदिग्ध बनाता है।30 अक्टूबर 2025 को ग्राम सैदनपुर निवासी क्रांति देवी के साथ खेत में बकरी जाने को लेकर पचम्भा निवासी दबंग अफसर अहमद उसके परिजनों ने मारपीट की और पीड़िता की बेटी के बाल उखाड़ लिए गए। आरोप है कि इस मामले में भी दरोगा नंदू यादव ने घटना को झूठा बताकर FIR दर्ज नहीं होने दी। उल्टा पीड़िता को दूसरे दिन 1 नवंबर को थाने बुलाकर पीड़िता के खिलाफ ही कार्रवाई कर SDM कोर्ट में चालान कर दिया गया । इस प्रकरण में हल्का राजन पर महिला के साथ थाने में बदसलूकी और गाली-गलौज करने का आरोप है।
दोनों मामले मीडिया में प्रकाशित हो चुके हैं और सोशल मीडिया के जरिए उच्च अधिकारियों तक शिकायत भी पहुंची है, फिर भी कार्रवाई शून्य है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिले में दलितों की रिपोर्ट सीधे थाने में दर्ज नहीं होती, बल्कि उच्च अधिकारियों एवं सीओ या न्यायालय के आदेश के बाद ही होती है। अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई करेगा, या कानून की धज्जियां यूं ही उड़ती रहेगी यह बड़ा सवाल है ।
