कौशाम्बी से बड़ी खबर : टेवा चौकी पुलिस के ठेंगे पर उच्चाधिकारियों का आदेश, महिला के साथ हुई मारपीट और छिनैती को मामूली धाराओं में किया मामला दर्ज,नहीं हो रही कार्यवाही 

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Kaushambi voice

👉 क्राइम नंबर 407/25 की कार्रवाई ठप —  न्याय के लिए भटक रही चौकी – थाना पीड़िता

👉 मंझनपुर में महिला पर हमला—चौकी पुलिस की लापरवाही उजागर, कार्रवाई ठप

👉 आरोपी को पकड़कर छोड़ा—पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल, पीड़िता ने भेजा शपथ पत्र

👉 एसपी और आईजी प्रयागराज को भी कराया गया अवगत,फिर भी नतीजा रहा शून्य,7 महिलाएं और 2 लड़कों ने की थी पिटाई

कौशाम्बी जिले के थाना मंझनपुर क्षेत्र के टेवा गांव में 26 नवंबर को जमीन विवाद के दौरान एक गंभीर हमला सामने आया, जिसमें अकेली महिला कौशल्या पर सात महिलाओं और दो पुरुषों ने मिलकर हमला कर दिया। पीड़िता अपनी ही जमीन पर मकान निर्माण करा रही थी, तभी मौके पर पहुँचे दबंगों ने न केवल महिला से मारपीट की, बल्कि उसका मोबाइल फोन और पर्स भी छीन लिया तथा निर्माणाधीन दीवार और लिंटर तोड़ डाला। हमलावरों ने वहां काम कर रहे तीन मिस्त्री और मजदूरों को भी जान से मारने की धमकी देकर भगा दिया गया है । इस घटना की सूचना 112 नम्बर पुलिस को दी गई जो मौके पर पहुंची है और चौकी तथा थाने में भी सूचना दी गई है।

पीड़िता ने तुरंत एसपी कौशाम्बी से मिली और थाना मंझनपुर में लिखित तहरीर देकर पूरी घटना की जानकारी दी, लेकिन आरोप है कि पुलिस ने नौ हमलावरों में से सिर्फ चार के नाम ही एफआईआर में दर्ज किए। इससे भी गंभीर बात यह कि पुलिस ने जानलेवा हमले की घटना को मामूली धाराओं में दर्ज कर रिपोर्ट को कमजोर बना दिया। छीना गया मोबाइल और पर्स अभी तक बरामद नहीं हुआ। पीड़ित पक्ष का कहना है कि पुलिस इसे “कहीं गिर गया होगा” बताकर मामले को हल्का साबित करने का काम किया है  और मामले को कमजोर करने में जुटी है।

27 नवंबर से लगातार एक सप्ताह तक लगातार पीड़िता थाना और चौकी के चक्कर लगाने के बावजूद अब तक न किसी आरोपी की गिरफ्तारी हुई और न ही बरामदगी हुई है । पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया है कि चौकी पुलिस की मिलीभगत से आरोपी खुलेआम पीड़िता को धमका रहे हैं। महिला का रास्ता रोकना, पीछा करना और दबाव बनाना लगातार जारी है, जिससे पीड़िता भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मजबूर है।

सबसे गंभीर लापरवाही यह है कि घटना के एक सप्ताह बाद भी पीड़िता कौशल्या देवी का 183 का बयान कोर्ट में नहीं कराया गया है। मामले की विवेचना में ढिलाई और कार्रवाई में लगातार देरी से पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

दबाव बढ़ने पर 4 दिसंबर को थाना प्रभारी ने एक आरोपी विवेक की मोबाइल लोकेशन निकलवाई और उसे चौकी इंचार्ज की मदद से पकड़वाया, लेकिन कुछ देर बाद ही आरोपी को चौकी से छोड़ दिया गया। इससे पुलिस की निष्पक्षता और पारदर्शिता पर और भी बड़े प्रश्नचिह्न लग गए हैं।

पीड़िता ने अब पुलिस अधीक्षक, आईजी प्रयागराज जोन सहित वरिष्ठ अधिकारियों को रजिस्टर्ड शपथ पत्र भेजकर निष्पक्ष विवेचना, छूटे हुए आरोपियों के नाम जोड़ने, गंभीर धाराएँ बढ़ाए जाने और सभी आरोपियों की शीघ्र गिरफ्तारी की मांग की है। स्थानीय लोगों ने भी पुलिस प्रशासन से न्यायपूर्ण और जल्द कार्रवाई की गुहार लगाई है।

अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396

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