प्रयागराज नगर निगम में 1.44 करोड़ का घोटाला,6 माह बाद भी आरोपी आज़ाद, अफसरों की चुप्पी शर्मनाक, फाइलें दबी, भ्रष्टाचार हावी,6 माह से चौकी इंचार्ज की चल रही विवेचना

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Kaushambi voice

👉 प्रयागराज नगर निगम में 1.44 करोड़ का घोटाला उजागर ,कंप्यूटर ऑपरेटरों ने फर्जी रसीदों से उड़ाए करोड़ों

👉 एफआईआर के बाद भी आरोपी खुलेआम घूम रहे, कार्रवाई ठप, CTO पी.के. द्विवेदी का हो गया ट्रांसफर, दबा दी गईं फाइलें …

👉 नए CTO मिश्रा के आने के बाद भी जांच बेअसर ,चौकी इंचार्ज कटरा के पास विवेचना, मगर रफ्तार कछुआ चाल

👉 नगर निगम गलियारों में दबी–दबी चर्चाएँ, ऊपर से दबाव ,जनता पूछ रही – भ्रष्टाचारियों को खुली छूट क्यों?

प्रयागराज। नगर निगम प्रयागराज में करोड़ों के घोटाले की परतें खुल चुकी हैं, लेकिन कार्रवाई के नाम पर सुनियोजित चुप्पी और लीपा-पोती का खेल चल रहा है। जोन-3 और जोन-7 में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर आकाश श्रीवास्तव और सत्यम शुक्ला ने मिलकर 1.44 करोड़ रुपये का गबन कर लिया, मगर न एफआईआर का असर दिखा, न जांच की रफ्तार नज़र आई। आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, सिस्टम बेबस है या मिला हुआ – ये सवाल अब जनता पूछ रही है।

आकाश ने 88 फर्जी रसीदों के ज़रिए 18.06 लाख और सत्यम ने 387 रसीदों से 1.26 करोड़ रुपये की वसूली की, जो नगर निगम के कोष में जमा ही नहीं किए गए। सूत्रों की मानें तो इस खेल में कुछ सभासदो की भी मिली भगत शामिल हैं। CTO पी.के. द्विवेदी ने 30 अप्रैल 2025 को कर्नलगंज थाने में मामला दर्ज कराया (अपराध संख्या 152/2025, धारा 314, 316(4), 318(4), 319(2))। लेकिन इसके बाद क्या हुआ?

जो होना नहीं चाहिए था, वही हुआ।
घोटाले का पर्दाफाश करने वाले अधिकारी पी.के. द्विवेदी का अचानक रायबरेली ट्रांसफर कर दिया गया। उनकी जगह पी.के. मिश्रा, रायबरेली से लाकर प्रयागराज में CTO बना दिए गए। मगर मिश्रा के आने के बाद भी न कोई जांच तेज़ हुई, न दोषियों पर शिकंजा कस पाया। उल्टा फाइलें दबा दी गईं और घोटालेबाजों को “सिस्टम की शरण” मिल गई।

नगर निगम के गलियारों में चर्चा है कि इस पूरे मामले को ऊपर से दबाया जा रहा है। चौकी इंचार्ज कटरा को विवेचना की ज़िम्मेदारी दी गई है, लेकिन महीनों बीतने के बाद भी जांच कछुआ चाल से भी धीमी है।

सवाल ये है कि क्या प्रयागराज में अब भ्रष्टाचारियों को खुली छूट मिल चुकी है?
क्या सच्चाई उजागर करने वाले अधिकारियों का ट्रांसफर ही “इनाम” बन गया है?
और जनता के पैसों से खेल करने वालों को राजनीतिक या प्रशासनिक संरक्षण हासिल है?

अगर ये सब नहीं हो रहा, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

प्रयागराज की जनता जवाब चाहती है… लेकिन नगर निगम के अफसर सिर्फ चुप्पी ओढ़े बैठे हैं।

क्या कहते है पुलिस विभाग के अधिकारी….

फिलहाल इस मामले में विवेचना कर रहे जब थाना कर्नलगंज के चौकी कटरा इंचार्ज हरीनंद से बात हुई तो उन्होंने कहा कि जांच चल रही है। इस मामले में कुछ और भी नाम बढ़े है ,आरोपी अब तक फरार बताए जा रहे है ।

जब इस मामले में थाना प्रभारी कर्नलगंज से बात की गई तो बताया गया कि वह कोर्ट में है । वहीं जब एसीपी कर्नलगंज से बात की गई तो उन्होने कहा कि इस मामले में चौकी इंचार्ज से बात कर लीजिए। जब बताया गया कि उनसे बात दो बार हो चुकी है वह सिर्फ कहते हैं विवेचना चल रही है। तब उन्होंने कहा कि वादी को भेज दीजिएगा रिपोर्ट दे दी जाएगी ।

इस मामले में हो रही लेट लतीफी कही न कही जानबूझकर की जा रही है । फाइलों को दबाया जा रहा है,विवेचना में विलम्ब के जिम्मेदार के विरुद्ध विभागीय जांच होनी चाहिए और जन सामान्य को जांच की स्थिति से अवगत भी कराना चाहिए। यह अत्यंत खेद का विषय है कि 6 माह बाद भी इस गंभीर आर्थिक अपराध में न कोई गिरफ्तारी हुई और न कोई चार्जशीट अभी तक दाखिल हुई है और न ही जन सामान्य को जानकारी दी जा रही है ।

अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396

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