अतरसुइया पुलिस पर अवैध छापेमारी, मारपीट और वसूली के गंभीर आरोप, उच्च स्तरीय जांच की मांग
👉 थाना अतरसुइया पुलिस पर रात 2 बजे बिना वारंट अवैध छापेमारी का आरोप।।,जावेद के घर में घुसकर मारपीट, गाली-गलौज, तोड़फोड़ और जबरन वसूली के गंभीर आरोप।
👉 पीड़ित परिवार का दावा – ₹2 लाख की डिमांड, ₹19,000 लेने के बाद छोड़ा गया बेटा, बीएनएसएस की धारा 47 और 185 के उल्लंघन पर पुलिस की कार्रवाई सवालों में।
👉 पीड़ितों ने डीजीपी और पुलिस कमिश्नर से उच्च स्तरीय जांच की मांग की, मामला तूल पकड़ता जा रहा, पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े…
प्रयागराज। थाना करेली क्षेत्र के जफीर की पुलिया, गली नंबर 18 में रहने वाले जावेद के घर पर 21 अगस्त की रात लगभग 2 बजे थाना अतरसुइया की पुलिस टीम द्वारा की गई अवैध छापेमारी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवार ने पुलिसकर्मियों पर रात में बिना वारंट घर में प्रवेश, मारपीट, गाली-गलौज, जबरन वसूली और तोड़फोड़ के गंभीर आरोप लगाए हैं।
परिवार का कहना है कि तमजीत को पुलिस ने लगातार तीन दिन तक अतरसुइया थाने में बंधक बनाकर रखा। इस दौरान पुलिसकर्मियों ने पहले ₹2 लाख की डिमांड की और बाद में ₹19,000 नकद लेकर ही उसे छोड़ा।इस घटना का सीसी टीवी फुटेज थाना में देखा जा सकता है। हालांकि, जब्त किए गए दो मोबाइल थाने से लौटा दिए गए, लेकिन समा बनो के दो मोबाइल, कान के टॉप्स और फिरदौस के ₹5000 अब तक वापस नहीं किए गए।
कानून विशेषज्ञों के मुताबिक, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक किसी भी घर में बिना कोर्ट की अनुमति या आपात स्थिति के पुलिस का प्रवेश दंड प्रक्रिया संहिता (बीएनएसएस) की धारा 47 और 185 का स्पष्ट उल्लंघन है।
इसके अलावा, धारा 74 – महिलाओं से दुर्व्यवहार व छेड़छाड़ ,धारा 309(4) – लूटपाट , धारा 115 – मारपीट ,धारा 308(2)– जबरन वसूली ,धारा 199 – कानून का दुरुपयोग है। इन धाराओं के तहत पुलिसकर्मियों पर कड़ी आपराधिक कार्रवाई हो सकती है।
प्रशासन की चुप्पी पर सवाल – इस मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़ित परिवारों का कहना है कि रक्षक बनकर बैठी पुलिस ही भक्षक बन गई है। अब देखना है कि उच्च अधिकारी इस पूरे मामले में क्या रुख अपनाते हैं और क्या पीड़ितों को न्याय मिल पाता है या नहीं।
