👉 पुरामुफ्ती में फर्जी मुठभेड़ का आरोप, कौशाम्बी से बिना नोटिस मुकेश को उठाकर पुलिस ने दूसरे दिन रात में दिखाया मुडभेड
👉 बीएनएस धारा 35(सी) का उल्लंघन,मौके पर नहीं भरा गया गिरफ्तारी मेमो ,होता है कानून का उल्लंघन
👉 पीड़ित परिवार ने उच्चस्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की किए मांग की।
👉 जब 7 अगस्त को फैजीपुर से मुकेश को पुलिस ने उठाया तो कहा से आई उसके पास चोरी की बाइक और पिस्टल, कारतूस,8 अगस्त को दिखाया गया रात 12 बजे मुडभेड ..
प्रयागराज। थाना पूरामुफ्ती पुलिस ने कौशाम्बी के थाना करारी के वैशकांटी गांव से 7 अगस्त को मुकेश पासी को फैजीपुर के भरी बाजार से उठा लिया जिससे बार के लोग पुलिस को घेर लिए । पुलिस ने जब अपना परिचय दिया तो उसके बाद उसे चारपहिया गाड़ी में लादकर उठा ले गई। चित्रकूट और कौशांबी जिलों में कई बार जेल जा चुके वैशकांटी गांव (थाना करारी, जनपद कौशांबी) निवासी मुकेश पासी और उसका भाई पिरथी और एक अन्य ग्रीस एक बार फिर पुलिस कार्रवाई के निशाने पर हैं। परिजनों का आरोप है कि गांव के विरोधियों की मुखबिरी और पुलिस की मिलीभगत से दोनों भाइयों को बार-बार झूठे चोरी के मुकदमों में फंसाकर जेल भेजा जा रहा है।
परिजनों के मुताबिक, 7 अगस्त की शाम करीब 6 बजे पुरामुफ्ती थाना पुलिस ने फैजीपुर बाजार से मुकेश को बिना किसी नोटिस या औपचारिक गिरफ्तारी प्रक्रिया के उठा लिया। इसके अगले दिन रात 12 बजे, कुसुआ रेल फाटक के पास “मुठभेड़” दिखाते हुए पुलिस ने दावा किया कि मुकेश पैर में गोली लगने से घायल हो गया। उसे एसआरएन अस्पताल में भर्ती कराया गया। पुलिस का कहना है कि मौके से चोरी की बाइक, 315 बोर का तमंचा और कारतूस बरामद हुए, जबकि परिजनों का दावा है कि गिरफ्तारी पहले हो चुकी थी, इसलिए बरामदगी की कहानी मनगढ़ंत है।
परिवार का आरोप है कि पुलिस जब चाहती है, बिना किसी पूर्व सूचना या कानूनी औपचारिकता के, अपने मुखबिरों के इशारे पर मुकेश और उसके भाई को कहीं से भी उठा लेती है। गांव में करीब 5- 6 लोग ऐसे हैं, जिनसे मुकेश और उसके परिजनों की पुरानी रंजिश है, और वही लोग चोरी की घटनाओं में फंसाने का काम करते हैं। परिजनों ने यह भी आरोप लगाया कि पुलिस बीएनएस की धारा 35(सी) का उल्लंघन करती है—गिरफ्तारी के समय अरेस्ट मेमो मौके पर नहीं भरती और बाद में किसी अन्य घटना में मुठभेड़ दिखाकर फर्जी खुलासा करती है।
परिवार का आरोप है कि हिरासत में लेने के बाद पुलिस मुकेश और उसके भाई को बुरी तरह पीटती है, मानसिक और शारीरिक दबाव डालकर उन्हें कबूलनामे के लिए मजबूर करती है। इसके बाद इन्हीं से जुड़ी घटनाओं में “सफल खुलासा” दिखाकर अपनी पीठ थपथपाती है, जबकि असल अपराधी पुलिस की पकड़ से बाहर रहते हैं।
मुकेश का भाई पिरथी साथ में ग्रीस भी 9 अगस्त को रात 10 बजे बबुरा में तेजमती अस्पताल के पास से पुलिस के हत्थे चढ़ा। परिवार को आशंका है कि अब उसे भी चोरी के नए केस में फंसाकर जेल भेजा जाएगा।

पिछले कई वर्षों में इन दोनों भाइयों पर कई मुकदमे दर्ज हुए हैं—चित्रकूट में कई, पश्चिम सरीरा में एक और अब पुरामुफ्ती में नया मामला। करीब 2- 3 साल जेल में बिताने के बाद मुकेश कुछ महीने पहले ही बाहर आया था और परचून की दुकान खोलकर परिवार का गुजारा कर रहा था। लेकिन परिजनों का कहना है कि पुलिस की नजर में वह अब भी अपराधी है।


मुकेश की पत्नी का कहना है कि 28 जुलाई को उसने एसपी कौशांबी को लिखित शिकायत पत्र एवं आईजीआरएस देकर निष्पक्ष जांच की मांग की थी। इसके बावजूद, कुछ ही दिन बाद यह मुठभेड़ की कहानी बना दी गई।

परिजनों ने अब उच्च अधिकारियों को पत्र भेजकर कथित फर्जी मुठभेड़, झूठे चोरी के मुकदमों और हिरासत में मारपीट की घटनाओं की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है, ताकि उन्हें न्याय मिल सके और बार-बार जेल भेजने का यह सिलसिला खत्म हो।