कौशांबी में हरे पेड़ों की अवैध कटाई तेज, डीएफओ की भूमिका पर उठे सवाल , मंझनपुर रेंजर ने की करोड़ो की अवैध कमाई

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Kaushambi voice

👉 जनपद में वन विभाग के संरक्षण में पेड़ों का कटान, पर्यावरण को खतरा ,कब होगी रेंजर और वन विभाग के अधिकारियों कि जांच

👉 मंझनपुर के बरौला गांव में रेंजर ने लगवाया धान,कटवाकर बेचा धान, खबर मीडिया में आने के बाद भी नहीं हुई कार्यवाही

👉 पेड़ लगाने की योजनाओं में किया घोटाला ,लगने थे 40 हजार पेड़ 2 हजार लगाकर हजम किया रकम,दिखाई झूठे अकड़े 

कौशांबी: जिले में तेजी से हरे-भरे पेड़ों की कटाई जारी है, जिससे ऐसा प्रतीत हो रहा है कि वन विभाग के अधिकारी योजनाबद्ध तरीके से कौशांबी को रेगिस्तान बनाने की साजिश रच रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि डीएफओ (डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर) अपने अधीनस्थ रेंजरों और वन दरोगाओं के माध्यम से अवैध कटान करवा रहे हैं, जिससे जिले का पर्यावरण खतरे में पड़ गया है।

वन विभाग के अधिकारी दे रहे गुमराह करने वाले बयान

जब इस संबंध में वन विभाग के अधिकारियों से सवाल किया गया, तो उन्होंने जवाब देने से बचते हुए कहा कि “यह छूट प्रजाति के पेड़ हैं”। लेकिन सच्चाई यह है कि यदि कोई प्रतिबंधित पेड़ काटा जाता है, तो नियम के अनुसार केवल एक पेड़ की अनुमति दी जाती है, लेकिन हकीकत में एक परमिशन पर दर्जनों पेड़ काट दिए जाते हैं।

डीएफओ के खिलाफ उठी जांच की मांग

स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों ने डीएफओ को हटाने और उनकी संपत्ति की जांच कराने की मांग उठाई है। सूत्रों के अनुसार, मंझनपुर रेंजर और अन्य क्षेत्र में तैनात वन अधिकारियों ने अवैध रूप से करोड़ों की संपत्ति अर्जित कर रखी है। ग्रामीणों का आरोप है कि जिले में शीशम और अन्य प्रतिबंधित पेड़ों की कटाई कर वन अधिकारी मोटी कमाई कर रहे हैं

चायल रेंजर पर भी गंभीर आरोप, सागौन कटान का मामला गरमाया

चायल रेंजर भी सवालों के घेरे में हैं, जहां सागौन के पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सुर्खियों में बना हुआ है। यह स्पष्ट नहीं है कि इतनी बड़ी संख्या में प्रतिबंधित पेड़ कैसे काटे गए और इसका लाभ किन अधिकारियों को मिला।

बड़ा सवाल—क्या होगी निष्पक्ष जांच?

जिले में वन विभाग और अधिकारियों की मिलीभगत से हो रही इस अवैध कटाई को लेकर प्रशासन क्या कार्रवाई करेगा, यह देखने वाली बात होगी। पर्यावरण को हो रहे भारी नुकसान को देखते हुए लोगों ने जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों से डीएफओ व अन्य संलिप्त अधिकारियों के खिलाफ कड़ी जांच और कार्रवाई की मांग की है

अगर जल्द ही इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो जनपद कौशांबी में हरियाली खत्म हो जाएगी और भविष्य में यह इलाका बंजर भूमि में बदल सकता है

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