प्रयागराज मंडल के चार जिलों में हुई पिछले धान खरीद पर उठे सवाल, गड़बड़ियों पर लगाम लगाने में रहे अधिकारी नाकाम, फिर बिचौलिए हुए सक्रिय, चर्चाओं में सुरेश परिक का है नाम

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👉 कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में यूपीसीयू के 71 क्रय केंद्रों पर हुई खरीद, आंकड़ों में सामने आई खरीद और भुगतान की तस्वीर — केंद्र प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल…

👉 सिर्फ एक एजेंसी यूपीसीयू (वी-पैक्स ) का वर्ष 2025-26 में प्रयागराज मण्डल में कुल भुगतान हुआ ₹2,11,01,91,848.69 और कुल खरीद हुई 88,331.49 मीट्रिक टन …

👉 पिछले वर्षो पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया के नाम पर बेंच दिया गया था धान, जबकि प्रतिदिन जेल में रहे,मामला सुर्खियों है आने के बाद शुरू हुई जांच, मामला दबा दिया है…

प्रयागराज मंडल।      रिपोर्ट -अमरनाथ झा (पत्रकार)

प्रयागराज मंडल के चार जनपदों कौशांबी, प्रयागराज, प्रतापगढ़ और फतेहपुर में धान खरीद व्यवस्था में कथित अनियमितताओं को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। सरकारी धान खरीद केंद्रों पर एजेंसियों के केंद्र प्रभारियों की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कहीं किसानों के नाम पर खरीद में गड़बड़ी के आरोप हैं तो कहीं फर्जी खतौनी और वास्तविक उत्पादन से अधिक धान खरीद के मामले सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब मंडल के चारों जिलों में धान खरीद की जिम्मेदारी सरकारी एजेंसियों को सौंपी गई है, तब क्रय केंद्रों पर कथित गड़बड़ियों को रोकने में अधिकारी आखिर क्यों नाकाम साबित हो रहे हैं? सरकार की निगरानी व्यवस्था और सत्यापन प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

वर्ष 2025-26 में यूपीसीयू के माध्यम से प्रयागराज मंडल के चार जनपदों में कुल 71 धान क्रय केंद्र संचालित किए गए। इनमें कौशांबी में 9, प्रयागराज में 38, प्रतापगढ़ में 19 और फतेहपुर में 5 क्रय केंद्र बनाए गए थे।

चारों जिलों में किसानों से खरीद का आंकड़ा

प्राप्त आंकड़ों के मुताबिक कौशांबी के 9 क्रय केंद्रों पर 1,150 किसानों से धान खरीद की गई। वहीं प्रयागराज के 38 केंद्रों पर 8,744 किसानों से खरीद हुई। प्रतापगढ़ के 19 केंद्रों पर 2,007 किसानों से धान खरीदा गया, जबकि फतेहपुर के 5 केंद्रों पर 707 किसानों से खरीद दर्ज की गई।

इस प्रकार चारों जिलों में कुल 12,608 किसानों से धान खरीद दर्ज की गई।

कितने धान की खरीद और कितना हुआ भुगतान?

धान खरीद के आंकड़ों पर नजर डालें तो कौशांबी में 7,740.89 मीट्रिक टन धान की खरीद हुई, जिसके सापेक्ष 18 करोड़ 49 लाख 16 हजार 126.10 रुपये का भुगतान किया गया।

प्रयागराज में 60,659.56 मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जिसके बदले किसानों को 1 अरब 44 करोड़ 91 लाख 29 हजार 261.99 रुपये का भुगतान हुआ।

प्रतापगढ़ में 15,914.20 मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज की गई और इसके सापेक्ष 38 करोड़ 1 लाख 84 हजार 153 रुपये का भुगतान किया गया।

वहीं फतेहपुर में 4,016.84 मीट्रिक टन धान खरीदा गया, जिसके बदले 9 करोड़ 59 लाख 62 हजार 307.60 रुपये का भुगतान किया गया।

मंडल का कुल आंकड़ा….

चारों जनपदों के उपलब्ध आंकड़ों को जोड़कर देखा जाए तो यूपीसीयू के 71 क्रय केंद्रों पर कुल 88,331.49 मीट्रिक टन धान की खरीद दर्ज की गई। इसके सापेक्ष कुल 2 अरब 11 करोड़ 1 लाख 91 हजार 848.69 रुपये का भुगतान हुआ। इन केंद्रों पर कुल 12,608 किसानों से खरीद दर्ज की गई।

अब सवाल यह है कि इतने बड़े स्तर पर धान खरीद और करोड़ों रुपये के भुगतान के बावजूद यदि क्रय केंद्रों पर अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच कौन करेगा? किसानों की खतौनी, भूमि का रकबा, वास्तविक धान उत्पादन, खरीद की मात्रा, भुगतान और परिवहन से जुड़े अभिलेखों का मिलान कराया जाना जरूरी है।

सरकार और मंडल के जिम्मेदार अधिकारियों को चारों जिलों के क्रय केंद्रों का पारदर्शी सत्यापन कराना चाहिए, ताकि वास्तविक किसानों को उनका हक मिल सके और यदि कहीं फर्जी खरीद या सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला सामने आए तो संबंधित केंद्र प्रभारी, एजेंसी के जिम्मेदार अधिकारियों और अन्य संलिप्त लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।

पिछले धान खरीद घोटाले से भी प्रशासन ने नहीं लिया सबक, फिर सक्रिय हो सकता है बिचौलियों का नेटवर्क!
कौशांबी में धान खरीद के नाम पर पिछली बार भी यूपीसीयू और पैक्स के कई क्रय केंद्रों पर गंभीर अनियमितताओं के मामले सामने आए थे। पूर्व में सांसद कपिल मुनि करवरिया के नाम पर बिचौलिए ने धान बेच लिया था, जबकि वो जेल में थे, मीडिया में मामला सुर्खियों में रहा है,उसकी जांच चलती रही मामला दबा दिया गया है। वर्ष 2023-24 में धान खरीद से जुड़े एक मामले में थाना पश्चिम शरीरा में एक राइस मिलर के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था। बताया जा रहा है कि उक्त मामले की वर्तमान में जांच सीआईडी प्रयागराज कर रही है। इसके बावजूद धान खरीद व्यवस्था में पारदर्शिता और निगरानी को लेकर सवाल बरकरार हैं।
अब सवाल यह उठता है कि पिछले मामलों से प्रशासन ने क्या सबक लिया? क्या इस बार भी बाहर से आने वाले बिचौलिये क्रय केंद्रों पर अपनी पकड़ बनाकर किसानों के नाम पर खरीद का खेल करेंगे? धान खरीद, हैंडलिंग और परिवहन के ठेकों से जुड़े लोगों के बीच कथित गठजोड़ और नेटवर्क की भूमिका भी जांच के दायरे में आनी चाहिए। यदि अलग-अलग एजेंसियों के केंद्र प्रभारी, राइस मिलर, हैंडलिंग ठेकेदार और परिवहन ठेकेदार आपसी मिलीभगत से काम कर रहे हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मंडल के चारों जिलों में इस नेटवर्क की पहचान कर उस पर प्रभावी रोक लगाई जाएगी? क्या प्रशासन प्रत्येक क्रय केंद्र की खरीद, किसान पंजीकरण, खतौनी सत्यापन, तौल पर्ची, धान उठान, परिवहन बिल और राइस मिल तक पहुंचने वाले धान का मिलान कराएगा? आखिर सरकारी धन के भुगतान से पहले इन सभी कड़ियों का भौतिक सत्यापन क्यों नहीं कराया जाता?
कहीं ऐसा न हो कि इस वर्ष भी किसानों के नाम पर खरीद के आंकड़े तैयार हों, ठेकों और परिवहन के नाम पर भुगतान हो और वास्तविक किसानों के बजाय बिचौलियों का नेटवर्क सरकारी व्यवस्था का फायदा उठाता रहे। यदि आरोपों में सच्चाई है तो यह केवल खरीद व्यवस्था की गड़बड़ी नहीं, बल्कि सरकारी धन और किसानों के अधिकारों से जुड़ा गंभीर मामला है।
अब निगाहें मंडलायुक्त, जिलाधिकारियों, संभागीय खाद्य नियंत्रक और शासन के जिम्मेदार अधिकारियों पर हैं। देखना यह है कि इस बार धान खरीद व्यवस्था की जमीनी जांच होगी या फिर पिछले मामलों की तरह जांच और कार्रवाई कागजों तक ही सीमित रह जाएगी।

अब बड़ा सवाल यही है कि धान खरीद में गड़बड़ियों के लिए बिचौलिए सक्रिय हो चुके हैं, पिछले कई वर्षों से राजस्थान के सुरेश पारिक का नाम चर्चाओं से है। इस साफ़ सुथरे धान खरीद व्यवस्था पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारी कब कार्रवाई करेंगे या फिर किसानों के नाम पर सरकारी खरीद में पिछले वर्षो कि तरा खेल जारी रहेगा यह एक बड़ा सवाल है…

अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415

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