कौशाम्बी में धान खरीद के नाम पर बड़ा खेल, UPPCU (वी पैक्स) के रिकॉर्ड में ट्रकों की क्षमता से अधिक लोडिंग का आरोप, CID जांच तेज,कई लोगों के नाम है शामिल
👉 टेवा-सरसवां क्रय केंद्र के अभिलेखों में 250 से 300 कुंतल तक धान लोडिंग का विवरण, राइस मिल में धान की मात्रा प्राप्त होने को लेकर उठे सवाल; CID ने 16 अक्टूबर को ADM कौशाम्बी को पत्र भेजकर मांगा जवाब…
👉 इस मामले चर्चित राजस्थान निवासी सिंडीकेट सुरेस पारिक का भी सीआईडी की जांच में आया है नाम, कई वर्षों से है सक्रिय सुरेश पारिक,इस वर्ष 2026 नैफेड ने बनाया है सुरेश पारिक को जिला प्रबंधक ..
👉 धान खरीद घोटाले की जांच में राजधानी बिल्डर ट्रांसपोर्टर और ठेकेदारों के नाम भी आए सामने, नाम हटवाने के फिराक में लगे है लोग, जांच को प्रभावित करने में है सक्रिय…
👉 अनूप सिंह यादव, सुरेश पारीक, एवं सचिव बृजेश मिश्रा, भूषण सिंह, सर्वेश मिश्रा व श्रद्धानंद पांडे समेत अन्य अधिकारी-कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में होने का दावा…
कौशाम्बी। जनपद में वर्ष 2023-24 की धान खरीद में कथित अनियमितताओं का मामला अब जांच के महत्वपूर्ण पड़ाव पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। उत्तर प्रदेश प्रादेशिक कोऑपरेटिव यूनियन (UPPCU) (वी-पैक्स) के क्रय केंद्र टेवा, सरसवां से जुड़े धान खरीद और परिवहन के अभिलेखों में दर्ज आंकड़ों ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। ट्रकों की वास्तविक भार क्षमता से अधिक धान लोडिंग दर्शाने और राइस मिल में कम मात्रा में धान प्राप्त होने के आरोपों की जांच CID प्रयागराज कर रही है। इसी क्रम में CID ने 16 अक्टूबर 2026 को ADM कौशाम्बी को पत्र भेजकर धान खरीद से संबंधित अभिलेखों और सत्यापन की जानकारी तलब की है।
उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार, दिसंबर 2023 से फरवरी 2024 के बीच टेवा, सरसवां क्रय केंद्र से विभिन्न वाहनों के जरिए एक बार में 25 से 30 टन यानी 250 से 300 कुंतल धान भेजे जाने का विवरण दर्ज है। अभिलेखों में चालान संख्या 4002, 4003, 4038, 4078, 4077, 3002, 3056 और 3055 का उल्लेख है। इनमें UP72 P 9785, UP71 AT 0161, UP70 JT 6151 और UP70 BT 2668 सहित कई वाहनों के नंबर दर्ज हैं।
इन अभिलेखों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल धान की प्रेषित और प्राप्त मात्रा को लेकर है। कुछ चालानों में 300 कुंतल तक धान भेजने का विवरण दर्ज है, जबकि संबंधित राइस मिल में प्राप्ति 90 और 130 कुंतल दिखाई गई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि खरीद केंद्र से 250 से 300 कुंतल धान भेजा गया तो मिल में कम मात्रा की प्राप्ति क्यों दर्ज हुई? क्या परिवहन के दौरान धान की मात्रा में अंतर आया या अभिलेखों में ही गलत आंकड़े दर्ज किए गए? इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
खतौनी सत्यापन को लेकर CID ने मांगा जवाब
मामले की जांच कर रही CID प्रयागराज ने 16 अक्टूबर 2026 को ADM कौशाम्बी को पत्र भेजकर किसानों की खतौनी की प्रमाणित प्रतियां, धान खरीद के लिए किसानों की पात्रता, भूमि संबंधी विवरण तथा खतौनी सत्यापन की प्रक्रिया से जुड़े अभिलेख मांगे हैं। जांच एजेंसी यह जानना चाहती है कि किसानों की भूमि का सत्यापन किस अधिकारी या कर्मचारी ने किया था, किस आधार पर धान खरीद की गई और खरीद के समय किसानों की पात्रता का परीक्षण कैसे हुआ।
इसके अलावा धान खरीद की निर्धारित क्षमता और सत्यापन से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। CID के इस पत्र के बाद अब कौशाम्बी के संबंधित विभागीय अधिकारियों की ओर से दिए जाने वाले जवाब पर निगाहें टिकी हैं। महत्वपूर्ण यह होगा कि मांगे गए अभिलेखों में किसानों की वास्तविक भूमि, उनके नाम पर हुई धान खरीद और सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज खरीद की मात्रा का कितना मिलान हो पाता है।
थाना पश्चिम शरीरा में दर्ज है मुकदमा…
इस प्रकरण में थाना पश्चिम शरीरा में अपराध संख्या 170/2024 के तहत मुकदमा दर्ज है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मामले में धारा 316(5) भारतीय न्याय संहिता (BNS) में परिवर्तित किए जाने के साथ धारा 409 का भी उल्लेख है। इस प्रकरण में एक राइस मिलर के खिलाफ मुकदमा दर्ज है। फिलहाल मामले की जांच निरीक्षक CID प्रयागराज द्वारा की जा रही है।
यदि शिकायतकर्ता की मने तो धान खरीद के नाम पर वास्तविक खरीद और आपूर्ति के बजाय कागजी अभिलेखों में अधिक मात्रा दर्शाई गई। ट्रकों की वास्तविक क्षमता से अधिक लोडिंग दिखाए जाने के साथ किसानों की खतौनी और खरीद सत्यापन में भी अनियमितता की आशंका जताई गई है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और संबंधित अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी।
वाहनों की क्षमता से लेकर किसानों के भुगतान तक जांच जरूरी…
इस पूरे प्रकरण में कई महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच आवश्यक है। जिन वाहनों से 250 से 300 कुंतल धान परिवहन दर्शाया गया, उनकी आरसी में दर्ज अधिकतम भार क्षमता क्या थी? क्या संबंधित वाहनों के पास इतनी मात्रा में धान ले जाने की अनुमति और क्षमता थी? धर्मकांटा पर्चियों, ई-वे बिल, GPS लोकेशन, परिवहन चालान और राइस मिल के गेट रजिस्टर में दर्ज आंकड़े आपस में मेल खाते हैं या नहीं? इसके साथ ही मिल के स्टॉक रजिस्टर और किसानों के बैंक खातों में हुए भुगतान का भी मिलान जरूरी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि किसानों की खतौनियों का सत्यापन किसने किया, वास्तविक भूमि के आधार पर कितनी धान खरीद होनी चाहिए थी और अभिलेखों में दर्ज खरीद की मात्रा कितनी है? यदि ट्रकों की क्षमता से अधिक लोडिंग और धान की प्राप्ति में अंतर की पुष्टि होती है तो खरीद केंद्र से लेकर परिवहन और मिल तक जुड़े जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
फिलहाल CID प्रयागराज की जांच जारी है। 16 अक्टूबर को ADM कौशाम्बी को भेजे गए पत्र के बाद विभाग की ओर से क्या जवाब दिया जाता है और कौन-कौन से दस्तावेज जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए जाते हैं, इसका इंतजार है। कौशाम्बी के संबंधित अधिकारियों का जवाब और अभिलेखों का सत्यापन इस पूरे कथित धान खरीद घोटाले की वास्तविक तस्वीर सामने लाने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
