कागजों पर विकास, जमीन पर गायब नाली-इंटरलॉकिंग! भैला मकदूमपुर में लाखों के भुगतान पर सवाल, एक ही लोकेशन की फोटो से काम दिखाने का आरोप
👉 कागजों पर विकास, जमीन पर गायब नाली-इंटरलॉकिंग!,फर्जी लगाया फोटो लैंगिट्यूड लैटिट्यूड
👉 भैला मकदूमपुर में लाखों के भुगतान पर सवाल,एक ही लोकेशन की तस्वीरों से कई काम दिखाने पर उठे सवाल
कौशाम्बी। मंझनपुर ब्लॉक की ग्राम पंचायत भैला मकदूमपुर में विकास कार्यों के नाम पर खर्च की गई लाखों रुपये की धनराशि को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि कई आरसीसी नाली, इंटरलॉकिंग और नाली मरम्मत के कार्य अभिलेखों में पूर्ण दिखाकर भुगतान करा लिया गया, जबकि मौके पर या तो कार्य दिखाई नहीं दे रहा है अथवा कार्य की स्थिति भुगतान के अनुरूप नहीं है।
ग्रामीणों के मुताबिक, विकास कार्यों से संबंधित ऑनलाइन अभिलेखों में Latitude 25.5348 और Longitude 81.3889 जैसी लोकेशन के साथ फोटो लगाए गए हैं। आरोप है कि इनमें कई फोटो भैला मकदूमपुर के बजाय समदा, मंझनपुर क्षेत्र के दिखाई देते हैं। इससे जियो-लोकेशन और अपलोड की गई तस्वीरों की वास्तविकता की जांच की मांग उठ रही है।


अभिलेखों के अनुसार वर्ष 2025 में ग्राम पंचायत को 1 करोड़ 7 लाख 23 हजार 248 रुपये की धनराशि प्राप्त हुई। ग्रामीणों का कहना है कि इस धनराशि के सापेक्ष दर्ज विकास कार्यों का यदि मौके पर भौतिक सत्यापन कराया जाए तो कागज और जमीन पर हुए काम में अंतर सामने आ सकता है।
इन कार्यों पर उठ रहे सवाल…
फूलचंद रैदास के घर से पुजारी रैदास के घर तक कार्य पर 68,961 रुपये खर्च दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने इसकी मौके पर जांच कराने की मांग की है।
इसी प्रकार सुरेश रैदास के घर से अमित वर्मा के घर तक इंटरलॉकिंग निर्माण एवं नाली मरम्मत के नाम पर 81,358 रुपये खर्च दर्शाया गया है। आरोप है कि इस कार्य के साथ दर्ज Latitude-Longitude भी मौके की वास्तविक लोकेशन से मेल नहीं खाता।


गूंगवा के घर से सुंदर लोध के घर तक नाली एवं इंटरलॉकिंग निर्माण के नाम पर 2,25,306 रुपये खर्च दिखाया गया है। ग्रामीणों के अनुसार यह कार्य करीब दस माह पुराना बताया जा रहा है, लेकिन मौके की स्थिति और अभिलेख में दर्ज कार्य की जांच आवश्यक है।
इसी तरह शारदा गुप्ता के घर से मनु पंडित के घर तक इंटरलाकिंग नाली में 217835 खर्च दिखाया गया है। तस्सन मियां के घर से अनिल तिवारी के घर तक इंटरलाकिंग नाली निर्माण में 305789 रुपए खर्च दिखाया गया है। इसमें तस्सन के घर अनिल तिवारी के घर तक तथा गूंगवा के घर से सुन्दर लोध के घर था एक ही जगह के काम को दो अलग अलग नाम से दिखाकर भुगतान किया गया है। इसमें लैंगिट्यूड लैटिट्यूड लगभग मिलता जुलता हुआ है जो जांच का विषय है।


वहीं शिवचरण लोध के घर से हीरा लोध के घर तक इंटरलॉकिंग एवं नाली निर्माण पर 2,74,918 रुपये खर्च दर्शाया गया है। ग्रामीणों ने इस कार्य का भी स्थलीय सत्यापन कराने की मांग की है।
जियो-टैग फोटो और भुगतान की हो जांच…
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि किसी कार्य की फोटो किसी दूसरी जगह की है तो उसे संबंधित ग्राम पंचायत के विकास कार्य के प्रमाण के रूप में किस आधार पर अपलोड किया गया। जांच में जियो-टैग फोटो की मूल जानकारी, अपलोड की तारीख, Latitude-Longitude, एमबी (Measurement Book), मस्टर रोल, बिल-वाउचर, भुगतान आदेश और संबंधित कार्य की तकनीकी स्वीकृति का मिलान किया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों की मांग है कि जनवरी 2024 से सितंबर 2026 तक ग्राम पंचायत में कराए गए सभी विकास कार्यों का स्वतंत्र टीम से स्थलीय एवं अभिलेखीय सत्यापन कराया जाए। उनका कहना है कि जांच में यदि कागजों पर दर्ज कार्य और मौके की वास्तविक स्थिति में अंतर मिलता है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। मंझनपुर का G9PQ+2FX कोड है जो भैला मकदुमपुर गांव में लोकेशन कोड लगाया गया है। जबकि भैला मकदुमपुर गांव का लोकेशन कोड Fcwa+xfr है जो अमरनाथ झा पत्रकार के घर के पास का है ।


अब सवाल यह है कि जिस विकास कार्य के नाम पर सरकारी धन का भुगतान हुआ, उसकी वास्तविक तस्वीर क्या है—अभिलेखों में दर्ज लोकेशन या गांव की जमीन पर?
यदि भैला मकदूमपुर की लॉन्गिट्यूड 81.438586 लैटीट्यूड 25.497486 डिग्री की बात करे तो लगभग इसी के 1 किलोमीटर के आसपास होना चाहिए। 
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
