2014 के फेरफार को 2016 में किया गया रद्द, अब नए फेरफार पर सिविल विवाद की छाया
नागपुर। पारशिवनी तहसील के मौजा पारशिवनी (बरेजा) की भूमि से जुड़े पुराने फेरफार मामले में वर्ष 2016 में अपीलीय अधिकारी ने अहम आदेश पारित करते हुए फेरफार क्रमांक 4 को रद्द कर अभिलेख पूर्ववत करने के निर्देश दिए थे। उपलब्ध आदेश के अनुसार 11 अप्रैल 2014 को दस्त क्रमांक 571/2014 के माध्यम से 0.88 हेक्टेयर भूमि में से 0.65 हेक्टेयर भूमि के बिक्रीखत का उल्लेख है।

मामले में नायब तहसीलदार पारशिवनी के 15 सितंबर 2014 के आदेश के आधार पर फेरफार प्रमाणित किया गया था। इसके खिलाफ महाराष्ट्र जमीन महसूल संहिता की धारा 247 के तहत अपील दायर की गई थी। अपीलीय अधिकारी ने 22 मार्च 2016 को अपील मंजूर करते हुए नायब तहसीलदार का आदेश रद्द कर दिया और उसी आधार पर प्रमाणित फेरफार क्रमांक 4 भी रद्द कर दिया। मंडल अधिकारी को अभिलेख पूर्ववत करने का निर्देश दिया गया।
आदेश में 0.88 हेक्टेयर में से 0.65 हेक्टेयर भूमि की बिक्री को लेकर मुंबई तुकड़ेबंदी एवं एकत्रीकरण कानून की धाराओं 7, 8 और 9 के संभावित उल्लंघन का मुद्दा भी उठाया गया और इसकी जांच किए जाने की बात कही गई है।
हालांकि, 2016 के इस आदेश में बिक्रीखत को सीधे रद्द करने का आदेश नहीं दिया गया है। फेरफार रद्द किया गया है और राजस्व अभिलेख पूर्ववत करने को कहा गया है। ऐसे में रजिस्टर्ड बिक्रीखत की वैधता का प्रश्न अलग बना रहता है।
वर्तमान में इसी बिक्रीखत को रद्द कराने के लिए सिविल कोर्ट में मामला लंबित होने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में अब नए फेरफार आवेदन पर राजस्व विभाग की कार्रवाई सिविल कोर्ट के किसी स्थगन आदेश तथा बिक्रीखत की वैधता से जुड़े विवाद की स्थिति पर भी निर्भर करेगी।
फेरफार रद्द, बिक्रीखत पर फैसला बाकी—अब सिविल कोर्ट और राजस्व विभाग की अगली कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।
रिपोर्ट अमरनाथ झा पत्रकार- 9415254415
