RTI के जवाब नहीं मिलने पर उठे सवाल, आखिर कब तय होगी जिम्मेदारी?
नगर पालिका से लेकर तहसील, जिला पंचायत, ITI, स्वास्थ्य और पुलिस विभाग से जुड़ी सूचनाओं के लिए दाखिल आवेदन लंबित
कौशाम्बी। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लागू सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत दाखिल कई आवेदनों का निर्धारित समयसीमा में जवाब नहीं मिलने का मामला सामने आया है। आरटीआई आवेदक अमरनाथ झा का दावा है कि पिछले करीब छह महीनों में जिले के विभिन्न विभागों से जुड़ी सैकड़ों सूचनाएं ऑनलाइन आरटीआई के माध्यम से मांगी गईं, लेकिन बड़ी संख्या में आवेदनों पर अब तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है।
आवेदक के मुताबिक मंझनपुर और भरवारी नगर पालिका, जिला पंचायत तथा तहसील स्तर पर भूदान समिति की जमीनों से जुड़े मामलों में जानकारी मांगी गई है। इसके अलावा जिले के आईटीआई संस्थानों, ठेकेदारी व्यवस्था और विभिन्न विभागीय कार्यों से संबंधित सूचनाओं के लिए भी आवेदन किए गए हैं। आरोप है कि इनमें से कई मामलों में निर्धारित अवधि बीतने के बावजूद सूचना नहीं दी गई।
सरकारी जमीन से जुड़े मामले में भी मांगी गई जानकारी
आरटीआई के माध्यम से भैला मकदूमपुर में लेखपाल ज्वाला सिंह की तैनाती के दौरान सरकारी भूमि पर कथित अवैध कब्जे से संबंधित जानकारी भी मांगी गई है। आवेदन में सरकारी जमीन पर कथित कब्जे, राजस्व विभाग द्वारा की गई कार्रवाई तथा संबंधित दस्तावेज और अभिलेख उपलब्ध कराने की मांग की गई है। आवेदक का कहना है कि इस मामले में भी अभी तक जवाब नहीं मिला है।
दोनों नगर पालिकाओं में मैनपावर नियुक्ति पर सूचना का इंतजार
मंझनपुर और भरवारी नगर पालिका में मैनपावर की नियुक्ति से संबंधित प्रक्रिया को लेकर भी आरटीआई दाखिल की गई है। इसमें नियुक्ति के नियम, चयन प्रक्रिया, भुगतान और अन्य संबंधित बिंदुओं की जानकारी मांगी गई है। आवेदक के अनुसार इन सूचनाओं का भी अभी तक जवाब नहीं मिला है।
मेडिकल कॉलेज में खरीदे गए सामान की जानकारी भी लंबित
स्वास्थ्य विभाग और मेडिकल कॉलेज में खरीदे गए सामान से संबंधित जानकारी के लिए भी आरटीआई आवेदन किया गया है। इसमें खरीद प्रक्रिया, भुगतान, आपूर्ति और संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी गई है। आवेदक का दावा है कि इस आवेदन पर भी अभी तक सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई है।
इसके अलावा पुलिस विभाग से जुड़े विभिन्न मामलों में भी आरटीआई के माध्यम से सूचनाएं मांगी गई हैं। आवेदक के मुताबिक कुछ आवेदनों पर जवाब प्राप्त हुआ है, लेकिन अधिकांश आवेदन अभी भी लंबित हैं। कुछ मामलों में मिले जवाब को भी आवेदक ने मांगी गई सूचना की तुलना में अधूरा या अस्पष्ट बताया है।
RTI कानून के उद्देश्य पर उठे सवाल
सूचना का अधिकार अधिनियम का उद्देश्य सरकारी कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना, अधिकारियों की जवाबदेही सुनिश्चित करना और नागरिकों को सरकारी सूचनाओं तक पहुंच उपलब्ध कराना है। ऐसे में यदि आरटीआई आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण नहीं होता है तो संबंधित जनसूचना अधिकारियों की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
आरटीआई अधिनियम के तहत सामान्य परिस्थितियों में निर्धारित अवधि के भीतर सूचना उपलब्ध कराए जाने का प्रावधान है। यदि आवेदक को सूचना नहीं मिलती या उपलब्ध कराई गई सूचना संतोषजनक नहीं होती है, तो वह प्रथम अपील और आवश्यकतानुसार आगे सूचना आयोग के समक्ष अपील अथवा शिकायत कर सकता है।
जिला प्रशासन कब लेगा संज्ञान?
आरटीआई आवेदक अमरनाथ झा का सवाल है कि यदि जिले के विभिन्न विभागों में ऑनलाइन आरटीआई आवेदन लंबित हैं तो उनकी विभागवार समीक्षा कौन करेगा और जिम्मेदार जनसूचना अधिकारियों की जवाबदेही कब तय होगी।
अब सवाल यह भी है कि नगर पालिका, जिला पंचायत, तहसील, आईटीआई, स्वास्थ्य विभाग, मेडिकल कॉलेज और पुलिस विभाग से जुड़ी लंबित आरटीआई का जिला प्रशासन संज्ञान कब लेगा? क्या संबंधित विभागों से लंबित आवेदनों की स्थिति की रिपोर्ट मंगाकर समयबद्ध निस्तारण के निर्देश दिए जाएंगे?
फिलहाल लंबित आरटीआई आवेदनों को लेकर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा और संबंधित जनसूचना अधिकारियों की जवाबदेही तय किए जाने की मांग उठ रही है। हालांकि, संबंधित विभागों का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे मामले की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
