संसद में भगवा ड्रामा पर सपा ने यू-टर्न क्यों लिया:रामगोपाल बोले- गलत हुआ; क्या संतों के गुस्से से बैकफुट पर आए अखिलेश?

0
संसद में भगवा ड्रामा पर सपा ने यू-टर्न क्यों लिया:रामगोपाल बोले- गलत हुआ; क्या संतों के गुस्से से बैकफुट पर आए अखिलेश?

विपक्षी सांसद 31 जुलाई को संसद परिसर में राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। बिहार की पूर्णिया सीट से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव भी वहां पहुंचे। भगवा कपड़े पहनकर साधु बने और चंदा चोरी का ड्रामा किया। इससे देशभर के साधु-संत भड़क गए। इसे भगवा और सनातन का अपमान बताया। पप्पू के अलावा सबसे ज्यादा विरोध सपा और अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद का हो रहा है। इससे सपा नेताओं के बयानों में घबराहट दिख रही है। सवाल ये है कि नाटक पप्पू यादव ने किया तो साधु-संत सपा से क्यों नाराज हैं? जानेंगे आज यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: पप्पू यादव के संसद में प्रदर्शन पर क्या विवाद है?
जवाब: सवाल-2: पप्पू यादव के ड्रामे के खिलाफ यूपी के संतों में क्या माहौल है? जवाब: सवाल-3: प्रदर्शन पप्पू यादव ने किया, तो साधु-संत सपा से क्यों नाराज?
जवाब: 1. नाटक में सपा सांसदों की सीधी भागीदारी दरअसल, नाटक के दौरान सपा की सीनियर लीडरशिप मौजूद थी। सभी पप्पू यादव का साथ दे रहे थे। पप्पू यादव ने पुजारी की भूमिका में दानपात्र पकड़ा और डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद, धर्मेंद्र यादव, रुचि वीरा, राजीव राय ने उसमें पैसे डाले। कई अन्य सपा सांसद भी वहां खड़े थे। 2. अवधेश प्रसाद के पैर छूने की घटना पूरे विवाद की जड़ पप्पू यादव के अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद के पैर छूने वाली घटना है। पप्पू यादव ने अपना सिर अवधेश प्रसाद के पैरों में रखा। इस दौरान पप्पू ने हाथ में पकड़ी रामलला की तस्वीर भी पैरों में रख दी। इससे संतों की नजर में सपा सीधे तौर पर अपमान से जुड़ गई। 3. अखिलेश यादव पर पहले से आरोप इस पूरे प्रकरण से पहले ही 5 जुलाई को अयोध्या की तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर जगद्गुरु परमहंस आचार्य ने आरोप लगाया था कि चढ़ावा चोरी अखिलेश यादव के इशारे पर हुई। यानी संत समाज के एक वर्ग में सपा को लेकर शक पहले से मौजूद था। संसद वाली घटना ने उसे और पुख्ता कर दिया। 4. राजनीति और धार्मिक भावना का टकराव संतों का आरोप है कि सपा ने इस मुद्दे को भाजपा-संघ-विहिप को घेरने के लिए इस्तेमाल किया, वहां तक ठीक है। लेकिन, इस तरह का प्रदर्शन नहीं करना था। सनातन धर्म में भगवा पवित्रता का प्रतीक है। इस नाटक में पूरे संत समाज को चढ़ावा चोरी के दोषी के रूप में दिखाया गया है। सवाल-4: पूरे मामले को लेकर अब सपा का क्या रुख है? जवाब: अब तक की सारी जानकारी जोड़ें, तो सपा का रुख बंटा हुआ। पार्टी की कोई आधिकारिक लाइन सामने नहीं आई है। 1. रामगोपाल यादव (राष्ट्रीय महासचिव, सपा) 3 अगस्त जो हुआ वो गलत था। राम मंदिर में हुई चोरी का साधु-संतों से कोई वास्ता नहीं था। वो बेसिकली गलत चीज थी। ऐसा नहीं होना चाहिए था। 2. राजीव राय (सपा सांसद, घोसी) 3 अगस्त वो हमारा कार्यक्रम नहीं था। हम तो दानपात्र लेकर सिंबॉलिक प्रदर्शन कर रहे थे। वो अचानक भगवा कपड़े पहनकर आए और बैठकर नाटक करने लगे। हम लोग हटा भी रहे थे। 3. पवन पांडेय (पूर्व सपा विधायक, अयोध्या) 2 अगस्त लखनऊ में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के रोड शो में बजरंग बली के एक हाथ में गदा और एक हाथ में भाजपा का झंडा लेकर नचाया गया। बजरंगबली को नचनिया बनाया गया। तब भाजपा और संघ का हिंदुत्व और सनातन सो गया था। पप्पू यादव से चूक हुई, लेकिन आप लोगों ने जो किया (अवधेश प्रसाद के पुतले को चप्पल से पीटना), उससे संपूर्ण पीडीए समाज, दलित समाज और 18 लाख अयोध्यावासियों का अपमान हुआ है। 4. अखिलेश यादव (राष्ट्रीय अध्यक्ष, सपा) 2 अगस्त को X पर लिखा- भाजपा हताश है, इसीलिए देश के बच्चों के बाद अब सांसद तक पर प्राणघातक हमले करवा रही है। सांसद पप्पू यादव की लोकप्रियता भाजपा पचा नहीं पा रही है। पप्पू यादव सदैव यूं ही सक्रिय रहें। ओवरऑल स्थिति सपा बंटी नजर आ रही है। पार्टी के कुछ नेता प्रदर्शन के तरीके से किनारा कर रहे हैं। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव इस विवाद को भाजपा विरोधी हथियार में बदलकर पप्पू यादव के बचाव में नजर आ रहे हैं। यह विरोधाभास भाजपा और उसके सहयोगियों को सपा पर स्पष्ट रुख न होने का आरोप लगाने का मौका दे रहा है। इसे 2027 के यूपी चुनाव से पहले सपा के लिए राजनीतिक जोखिम के तौर पर देखा जा रहा है। ——————————– यह एक्सप्लेनर भी पढ़ें… यूपी में पेपर लीक कानून केंद्र से ज्यादा सख्त, यहां उम्रकैद, केंद्र में सिर्फ 10 साल जेल; क्या अब प्रदेश का कानून बेकार हो जाएगा पेपर लीक रोकने के लिए केंद्र सरकार का नया बिल 31 जुलाई को राष्ट्रपति से मंजूरी के बाद कानून बन गया। इसमें अधिकतम 10 साल की सजा का प्रावधान है। वहीं, यूपी में 2024 से लागू पेपर लीक कानून में उम्रकैद तक का प्रावधान है। अगर पहले से मौजूद कानून इतना सख्त है, तो पेपर लीक की घटनाएं रुकती क्यों नहीं? जानिए यूपी एक्सप्लेनर में…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुख्य ख़बरें