अखिलेश के लिए अचानक अहम क्यों बना लोहिया ट्रस्ट:चुनाव से पहले कमान अपने हाथ में ली; 2016 से हाशिए पर था
पिछले दिनों अखिलेश यादव ‘लोहिया ट्रस्ट’ के अध्यक्ष चुने गए। पार्टी मुख्यालय से लेकर जिला ऑफिस और कई अन्य संपत्तियों का मालिकाना हक ट्रस्ट के पास है। साथ ही करीब 800 से एक हजार करोड़ रुपए का फंड भी है। समाजवादी पार्टी के गठन में भी इसकी अहम भूमिका थी। 2016-17 की अदावत में तब के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल ‘टीम अखिलेश’ को बाहर का रास्ता दिखा रहे थे। इसके जवाब में अखिलेश ने ‘जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट’ बना लिया। झगड़ा बढ़ा तो मुलायम सिंह ने अखिलेश का साथ दे रहे चचेरे भाई रामगोपाल यादव को ‘लोहिया ट्रस्ट’ से हटाकर सगे भाई शिवपाल को सचिव बना दिया। मुलायम अपनी आखिरी सांस तक इसके अध्यक्ष रहे। निधन के बाद शिवपाल मुखिया बने और अब कमान अखिलेश के हाथ में है। चर्चा है कि उनकी बड़ी बेटी अदिति यादव भी ट्रस्ट का हिस्सा बन सकती हैं। आज यूपी एक्सप्लेनर में पढ़िए, 2016 के पारिवारिक घमासान से लेकर आज तक ट्रस्ट की तिजोरी, संपत्ति और सियासत में क्या बदला? अब अखिलेश को इसकी कमान सौंपने के पीछे क्या संदेश है? सवाल-1: लोहिया ट्रस्ट का इतिहास क्या है? अखिलेश के लिए यह अहम क्यों है? जवाब: लोहिया ट्रस्ट के बनने से अब-तक की पूरी कहानी 3 पार्ट में समझते हैं… (A) गठन से पहले के हालात (B) सपा के गठन का जरिया बना ‘लोहिया ट्रस्ट’ (C) मुलायम का ‘लोहिया ट्रस्ट’ V/S अखिलेश का ‘जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट’ सवाल-2: लोहिया ट्रस्ट के पास कितनी संपत्ति है? जवाब: ट्रस्ट के बैंक खातों का कोई आधिकारिक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। एक गैर-सरकारी चैरिटेबल ट्रस्ट होने के नाते इसकी बैलेंस शीट सार्वजनिक नहीं की जाती। अखिलेश के सपा प्रमुख बनने के बाद ‘जनेश्वर मिश्र ट्रस्ट’ की अहमियत बढ़ गई है। फंडिंग भी उसी तरफ शिफ्ट हो चुकी है। सवाल-3: चुनाव से पहले लोहिया ट्रस्ट का अध्यक्ष बदलने के पीछे की रणनीति क्या है? जवाब: इसे पारिवारिक तालमेल और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुलायम सिंह की विरासत को फिर से एक छत के नीचे लाने की कोशिश माना जा रहा है। पूरी रणनीति ऐसे समझ सकते हैं… ————————————- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… क्या चुनाव से पहले यूपी में लागू होगा UCC, भाजपा को फायदा या नुकसान; इससे क्या बदलेगा गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने की अटकलें तेज हैं। इससे पहले उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है। अभी यूपी में अभी लिव-इन (बिना शादी किए साथ रहना) को लेकर कोई कानून नहीं है। UCC में इससे जुड़े प्रावधान हो सकते हैं। यहां UCC कब तक लागू हो सकता है? सरकार में इसे लेकर क्या चल रहा है? क्या यूपी में लिव-इन को कानूनी मान्यता मिलेगी? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
