प्रेमानंद महाराज का नया आश्रम, जहां पहुंचे विराट-अनुष्का:मथुरा में पौने 9 बीघा जमीन पर बना, डायलिसिस यूनिट भी लगी
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा 22 जुलाई (बुधवार) को संत प्रेमानंद महाराज के वृंदावन स्थित नए आश्रम यमुना विहार कुंज पहुंचे। दोनों करीब 1 घंटे तक आश्रम में रहे। बाहर आए, तो विराट के माथे पर चंदन का टीका और हाथ में प्रसाद था। यह वही आश्रम है, जिसके बारे में पिछले 2 महीने से भक्त जानना चाहते हैं। संत प्रेमानंद महाराज अपने पुराने केली कुंज आश्रम को छोड़कर यहीं भजन-साधना कर रहे हैं। यहीं भक्तों को दर्शन देते हैं। महाराज ने केली कुंज आश्रम छोड़कर यमुना किनारे नया ठिकाना क्यों बनाया? यहां तक पहुंचने का रास्ता क्या है? इन सवालों के जवाब जानने के लिए दैनिक भास्कर की टीम आश्रम पहुंची। आश्रम तक पहुंचने वाले रास्तों, वहां की व्यवस्थाओं और लोगों से बातचीत कर जानकारी जुटाई। पूरी रिपोर्ट पढ़िए…
केली कुंज से यमुना किनारे शिफ्ट हुए प्रेमानंद महाराज संत प्रेमानंद महाराज पिछले 2 महीने से अपने पुराने केली कुंज आश्रम में बहुत कम समय गुजार रहे हैं। उन्होंने 18 मई से पदयात्रा भी स्थगित कर रखी है। इसके पीछे खराब स्वास्थ्य का हवाला दिया गया है। कुछ दिनों पहले यमुना किनारे शिष्यों को उपदेश देते हुए संत प्रेमानंद का वीडियो भी सामने आया था। इस वीडियो में उन्होंने सभी को राधा नाम जप करने और उनका पीछा न करने की बात कही थी। इसी बीच प्रेमानंद महाराज के अपने नए आश्रम में यमुना विहार कुंज आश्रम में शिफ्ट होने की बात सामने आई है। यहीं से वह भक्तों को दर्शन भी दे रहे हैं। अब आश्रम के बारे में जानिए…. केली कुंज आश्रम से 15 किलोमीटर दूर है नया आश्रम प्रेमानंद महाराज के ट्रस्ट श्री हित राधा केली कुंज ने यमुना विहार कुंज नाम से नया आश्रम बनवाया है। यह मांट तहसील में जहांगीरपुर गांव के पास यमुना किनारे बना है। बेलवन स्थित लक्ष्मीजी के मंदिर से करीब एक किलोमीटर दूर है। यह केली कुंज आश्रम से सड़क मार्ग से करीब 15 किलोमीटर दूर है। आश्रम को देखने के लिए हमारी टीम ने केशीघाट से स्टीमर से यमुना पार की। इसके बाद कीचड़ और ऊबड़-खाबड़ रास्तों से होते हुए बेलवन मंदिर तक पहुंचे। सेवादार बोले- सिर्फ प्रशासन और आश्रम के लोगों को अंदर जाने की इजाजत बेलवन में लक्ष्मी मंदिर के पास आश्रम के लिए एक कच्चा रास्ता जाता है। इस रास्ते पर रोड़ी डाली जा रही थी। वहीं, पास में सेवादार कैंप लगाकर मौजूद थे। हम आश्रम की तरफ बढ़ रहे थे, तभी सेवादारों ने हाथ जोड़कर रोक दिया। कहने लगे, आश्रम में बिना इजात किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। केवल उन्हीं लोगों को आगे जाने दिया जाता है, जिन्हें मुख्य सेवादार से इजाजत मिली होती है। सेवादारों के रोकने बाद हम वहीं खड़े हो गए। तभी मांट के एसडीएम, सीओ समेत अन्य अफसरों गाड़ियां वहां पहुंचीं। इन गाड़ियों को सेवादार ने नहीं रोका। ये गाड़ियां बिना रोक-टोक के आगे बढ़ गईं। मैंने सेवादारों से पूछा तो उन्होंने कहा कि प्रशासन और आश्रम की गाड़ियों को अंदर जाने की इजाजत है। इसके बाद हमने स्थानीय लोगों से आश्रम के बारे में बात की। लोगों ने बिना कैमरे पर आए बताया कि यहां सेवादार आश्रम से मिले निर्देश पर लोगों को आने-जाने देते हैं। हालांकि, गांव के किसान अपने खेतों तक आने-जाने के लिए इस रास्ते से निकल सकते हैं। आश्रम तक पहुंचने के दो रास्ते हैं पहला रास्ता- यह रास्ता केली कुंज आश्रम से वाराह घाट होते हुए सौभारी वन के आगे खादर क्षेत्र तक जाता है। यहां से नाव या स्टीमर से यमुना पार कर करीब 2 किलोमीटर चलने पर आश्रम तक पहुंच जाएंगे। दूसरा रास्ता- यह सड़क का रास्ता है। इसमें केली कुंज आश्रम से मथुरा रोड पहुंचेंगे। यहां से यमुना एक्सप्रेस-वे लिंक रोड और फिर जहांगीरपुर गांव के रास्ते बेलवन मंदिर तक पहुंचा जाता है। यहां से आश्रम करीब एक किलोमीटर अंदर है। इस रास्ते से पहुंचने में 30 से 45 मिनट का समय लगता है। पौने 9 बीघा जमीन पर बना यमुना विहार कुंज इस बातचीत में हमें पता चला कि जिस जमीन पर आश्रम बन रहा है, वह जहांगीरपुर गांव के रहने वाले मंगल सिंह के खेत थे। इसके बाद हम तलाशते हुए मंगल सिंह के घर पहुंचे। यहां हमारी मुलाकात मंगल के बेटे मूलचंद से हुई। मूलचंद बताते हैं- आश्रम के लिए हमारे परिवार से करीब 5 एकड़ (करीब पौने 9 बीघा) जमीन ली गई है। इसमें से 2 बीघा जमीन 3 महीने पहले ली थी। बाकी जमीन एक महीने पहले ली है। इसमें से करीब एक बीघा जमीन पर पक्का निर्माण है। बाकी में झोंपड़ी और पेड़-पौधे लगाए गए हैं। आश्रम बहुत सुंदर बनाया गया है। 2 हॉल, डायलिसिस यूनिट और बाढ़ से बचाव की व्यवस्था मूलचंद ने बताया- कि आश्रम में 2 बड़े हॉल हैं, जहां महाराज जी सत्संग और राधारानी की सेवा करते हैं। यहां एक कंटेनर में डायलिसिस की मशीन लगाई गई है। डॉक्टर समय-समय पर प्रेमानंद महाराज की डायलिसिस करते हैं। आश्रम तक बाढ़ का पानी न पहुंचे, इसके लिए यमुना किनारे से करीब 7-8 फीट ऊंचा चबूतरा बनाया गया है। इसके बाद ऊंची-ऊंची बाउंड्री बनाई गई है। मूलचंद से जब यह जानने की कोशिश की कि आश्रम के लिए जमीन कितने में दी, तो उन्होंने इस पर कुछ नहीं बताया। बाद में हमें पता चला कि जहां आश्रम बना है, वहां का रेट करीब 55 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर है। शांति और एकांत के लिए चुना नया ठिकाना स्थानीय लोगों ने बताया कि संत प्रेमानंद महाराज ने यमुना विहार कुंज को इसलिए चुना, क्योंकि यमुना किनारे का शांत और प्राकृतिक वातावरण एकांत में भजन-साधना के लिए अनुकूल है। केली कुंज आश्रम की तुलना में यहां भीड़भाड़ कम है। इससे उन्हें साधना और आध्यात्मिक चिंतन का समय मिल पाता है। यही वजह है कि इन दिनों वह यहीं रहकर भजन-साधना कर रहे हैं। यमुना बिहार कुंज आश्रम तक जाने की हर किसी को इजाजत नहीं है। रास्ते में जगह-जगह सेवादार बैठे हैं, जो आश्रम से एक किलोमीटर पहले ही रोक देते हैं। गुरु पूर्णिमा पर दोनों आश्रमों में दर्शन देंगे संत प्रेमानंद महाराज संत प्रेमानंद महाराज गुरु पूर्णिमा महोत्सव अपने दोनों आश्रम में मनाएंगे। केली कुंज और यमुना विहार कुंज दोनों आश्रमों में तैयारियां की जा रही हैं। 23 से 28 जुलाई तक संत प्रेमानंद महाराज यमुना विहार कुंज में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे। इसके बाद 29 जुलाई को वह केली कुंज आश्रम में भक्तों से मिलेंगे। केली कुंज आश्रम को गुरु पूर्णिमा के लिए विशेष रूप से सजाया गया है। मुख्य गेट से लेकर आश्रम परिसर तक धार्मिक संदेशों वाली तख्तियां लगाई गई हैं। केली कुंज आश्रम में गुरु पूर्णिमा महोत्सव के दौरान हर दिन चरण पूजन होगा। —————————– यह खबर भी पढ़ें- विराट-अनुष्का हाथ थामकर प्रेमानंदजी से मिलने पहुंचे, कीचड़ भरे रास्ते पर नंगे पैर चले विराट कोहली ने पत्नी अनुष्का शर्मा के साथ वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के दर्शन किए। दोनों बुधवार तड़के 4 बजे महाराजजी के नए आश्रम यमुना विहार कुंज पहुंचे। चेहरे पर मास्क लगाकर नंगे पांव आश्रम के अंदर गए। बारिश की वजह से रास्ते में कीचड़ था। विराट, अनुष्का का हाथ थामकर कीचड़ में चलते नजर आए। पढ़ें पूरी खबर…
