महेवाघाट थाना प्रभारी के अजब कारनामे, अवैध काली कमाई बनी चर्चा का विषय,आईजी-एडीजी प्रयागराज से उच्चस्तरीय जांच की मांग

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👉 थाना क्षेत्र में प्रभारी ने तैनात किये है तीन – तीन कारखास ,एक बालू घाटों से वसूली ,दूसरा बालू ओवरलोड वाहनों से वसूली ,तीसरा क्षेत्र में जेसीबी पेड़ कटान आदि से करता है वसूली..

👉 लोगो ने लगाया थाना प्रभारी पर क्षेत्र में जातिवादिता करने का आरोप,दलितों पिछड़ों के  नहीं होती सुनाई,उत्पीड़न की है चर्चा

👉 सूत्रों की माने तो महीने में लगभग 45 लाख रुपए की होती है काली कमाई,चर्चा का विषय बना थाना महेवाघाट थाना ,वसूली में लगे तीन कारखास..

👉 जिले में खाली बैठे तमाम सीनियर इंस्पेक्टर फिर भी सौंपी गई हैं दरोगा को थाने की कमान ,क्या है मामला.. बड़ा सवाल 

👉 एक कहावत है कि ..अंधा बांटे रेवड़ी – चीन्ह चीन्ह के देय , यह कहावत इस समय सही साबित हो रही है 

कौशाम्बी। जनपद के महेवाघाट थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर क्षेत्र में एक बार फिर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। स्थानीय नागरिकों, वाहन चालकों तथा व्यापारिक वर्ग के कुछ लोगों ने थाना क्षेत्र में कथित अवैध वसूली, अवैध खनन गतिविधियों को संरक्षण तथा आय से अधिक संपत्ति जैसे गंभीर आरोप लगाते हुए प्रयागराज परिक्षेत्र के आईजी एवं एडीजी से उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि थाना क्षेत्र के भवनसुरी, महेवाघाट और दलेलागंज स्थित बालू घाटों से निकलने वाले वाहनों से कथित रूप से प्रति गाड़ी 300 रुपये की अवैध वसूली की जाती है। कुछ वाहन चालकों ने नाम सार्वजनिक न करने की शर्त पर दावा किया कि बालू की पर्ची कटवाने के दौरान पुलिस के नाम पर अतिरिक्त धनराशि वसूले जाने की व्यवस्था लंबे समय से संचालित है। थाना इलाके में तीन बालू घाट संचालित है,यदि एक दिन में कम से कम 200 गाड़ियों का ही हिसाब किया जाए तो 60 हजार रुपए प्रति दिन बालू घाटों से होती है । बताया जाता है कि महीने का हिसाब किताब लगभग 18 लाख वसूली होती है । इसी तरह वाहन इंट्री के नाम पर ट्रेक्टर से 3000 , ट्रक एवं डम्फर से 5000 प्रति वाहन वसूली महीने की थाने में इंट्री की जाती है ,सब गाड़ियों का नंबर कारखास के पास लिस्ट होती जो पैसा नहीं देता है उसी का ओवरलोड में चालान किया जाता है। चित्रकूट से भी गिट्टी बालू ओवरलोड वाहन इसी थाना क्षेत्र से निकलते है । यदि प्रति दिन 300 वाहनों की इंट्री का हिसाब किया जाए तो लगभग 12 लाख महीना सिर्फ इंट्री से काली कमाई थाना प्रभारी की बताई जा रही है। साहब के नाम प्रति घाट से 2 गाड़ी बालू फ्री प्रतिदिन बंधा है, इसका हिसाब किताब यदि महीने का 100 गाड़ियों का 5000 प्रति गाड़ी जोड़ा जाए तो लगभग 5 लाख यह भी काली कमाई का हिस्सा है। सूत्र बताते हैं कि यदि मोटा मोटी एक अकड़ा लगाया जाए तो इस समय थाना प्रभारी की महीने की कमाई लगभग 45 लाख रुपए एगजई काली कमाई होती है ,जिसका हिस्सा ऊपर तक बंदरबांट होता है। यही कारण है कि मोटी कमाई करने वाले सब इंस्पेक्टर को थाना महेवाघाट प्रभारी की कमान सौंप दी जाती है ,जिससे कि वह जो भी करे उसे खुली छूट दे दी जाती है। यही वजह है कि थाने में फरियादियों की सुनाई नहीं होती और अपराध का ग्राफ कम करने के लिए रिपोर्ट पीड़ितों की दर्ज नहीं की जाती है।

स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि थाना क्षेत्र में खनन, ओवरलोड वाहनों का संचालन, जेसीबी मशीनों के उपयोग, पेड़ कटान तथा अन्य गतिविधियों से जुड़े कुछ लोगों को विशेष संरक्षण प्राप्त है। आरोप यह भी है कि विभिन्न कार्यों के लिए अलग-अलग लोगों के माध्यम से कथित रूप से वसूली की जाती है। हालांकि इन दावों की यदि उच्च अधिकारियों ने जांच कराई तो चौंकाने वाले खुलासे होना तय है।

नागरिकों ने मांग की है कि पिछले कई महीनों के दौरान थाना क्षेत्र में हुए खनन कार्य, ओवरलोड वाहनों की आवाजाही, पुलिस कार्रवाई, राजस्व अभिलेख तथा वित्तीय लेन-देन की निष्पक्ष जांच कराई जाए। कुछ लोगों ने थाना प्रभारी की कथित आय से अधिक संपत्ति और संभावित बेनामी संपत्तियों की भी जांच कराने की मांग उठाई है।

इसके साथ ही जिले में थाना प्रभारियों की तैनाती व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। लोगों का कहना है कि निरीक्षक स्तर के अधिकारियों की उपलब्धता के बावजूद कई स्थानों पर उपनिरीक्षकों को थाना प्रभारी बनाए जाने की नीति पर भी समीक्षा की जानी चाहिए।

स्थानीय नागरिकों ने आईजी एवं एडीजी प्रयागराज से पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराकर तथ्य सार्वजनिक करने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता का विश्वास दोनों मजबूत होंगे।

अमरनाथ झा, पत्रकार

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