मानव तस्करी व महिला अधिकारों पर विधिक जागरूकता शिविर आयोजित, प्रतिभागियों को बताए गए कानूनी अधिकार
कौशाम्बी/प्रयागराज
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, कौशाम्बी के तत्वावधान में शुक्रवार को प्रयागराज के खुल्दाबाद स्थित राजकीय बाल (बालिका) गृह/चिल्ड्रेन होम में “मानव तस्करी के पीड़ितों, यौन शोषण से प्रभावित व्यक्तियों के अधिकार एवं महिलाओं से संबंधित कानून” विषय पर विधिक साक्षरता एवं संवेदनशीलता जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं, बच्चों एवं मानव तस्करी से प्रभावित व्यक्तियों को उनके संवैधानिक एवं कानूनी अधिकारों, उपलब्ध सहायता सेवाओं तथा न्याय प्राप्ति के विभिन्न माध्यमों के प्रति जागरूक करना था।
कार्यक्रम में वक्ताओं ने मानव तस्करी को एक गंभीर एवं संगठित अपराध बताते हुए कहा कि इसमें बल, दबाव, धोखाधड़ी अथवा छल-कपट के माध्यम से व्यक्तियों का शोषण किया जाता है। जबरन श्रम, यौन शोषण, जबरन विवाह, भीख मंगवाना और अंगों की तस्करी इसके प्रमुख रूप हैं। प्रतिभागियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद-23 के तहत शोषण के विरुद्ध प्राप्त अधिकारों की भी जानकारी दी गई।
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव श्रीमती प्रिया सिंह ने महिलाओं एवं बच्चों की सुरक्षा से जुड़े विभिन्न कानूनों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय न्याय संहिता, पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) सहित विभिन्न विशेष कानूनों की जानकारी देते हुए बताया कि किसी भी प्रकार का गैर-सहमति आधारित या दबावपूर्वक किया गया शारीरिक अतिक्रमण यौन शोषण की श्रेणी में आता है। साथ ही निःशुल्क विधिक सहायता, परामर्श एवं अन्य कानूनी सेवाओं के बारे में भी जानकारी प्रदान की गई।
कार्यक्रम में एलएलबी के विधि प्रशिक्षुओं ने भी सक्रिय भागीदारी निभाई। शिविर के उपरांत प्रशिक्षुओं ने राजकीय बाल (शिशु) गृह एवं राजकीय बाल (बालक) प्रेक्षण गृह का भ्रमण कर बाल संरक्षण व्यवस्था, दत्तक ग्रहण प्रक्रिया तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को समझा।
इस दौरान सचिव श्रीमती प्रिया सिंह ने बालिका गृह का निरीक्षण कर संवासिनियों से संवाद स्थापित किया तथा उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं की जानकारी ली।
इस अवसर पर अधीक्षिका सुश्री मधु यादव, सहायक अध्यापिका सुश्री सविता सिंह, पीएलवी ममता दिवाकर, विधि प्रशिक्षु एवं गृह में संवासित बालिकाएं उपस्थित रहीं।
