चित्रकूट की गौशालाओं पर बड़ा सवाल: खाली शेड, लेकिन कागजों में भरे गौवंश!
चित्रकूट। जिले की गौशालाओं को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय ग्रामीणों और सामाजिक कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जनपद के विभिन्न विकास खंडों में संचालित कई गौशालाओं में वास्तविक संख्या से काफी कम गौवंश मौजूद हैं, जबकि सरकारी अभिलेखों में प्रतिदिन अधिक संख्या दर्ज कर चारा, भूसा और रखरखाव के नाम पर सरकारी धन का भुगतान कराया जा रहा है।
🐄 ग्रामीणों का दावा है कि कई गौशालाओं के शेड लगभग खाली दिखाई देते हैं, लेकिन रिकॉर्ड में सैकड़ों गौवंशों की मौजूदगी दर्ज है। यदि प्रशासन द्वारा प्रत्येक गौशाला का भौतिक सत्यापन कराया जाए तो फर्जी उपस्थिति, गलत भुगतान और सरकारी धन के दुरुपयोग का बड़ा मामला सामने आ सकता है।
💰 चारा-भूसा मद में अनियमितताओं के आरोप
ग्रामीणों का कहना है कि गौवंशों के भरण-पोषण के लिए सरकार द्वारा हर महीने लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर कई स्थानों पर न तो पर्याप्त चारा दिखाई देता है और न ही गौवंशों के लिए बेहतर व्यवस्थाएं। आरोप है कि चारा, भूसा और अन्य सुविधाओं के नाम पर जारी होने वाली धनराशि का सही उपयोग नहीं हो रहा है।
⚠️ गौसंरक्षण के दावों पर उठे सवाल
प्रदेश सरकार लगातार गौसंरक्षण और गौशालाओं के बेहतर संचालन को लेकर अभियान चला रही है। इसके बावजूद यदि अभिलेखों और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया जाता है तो यह न केवल सरकारी धन के दुरुपयोग का मामला होगा, बल्कि बेजुबान गौवंशों की देखभाल में भी गंभीर लापरवाही मानी जाएगी।
🔍 निष्पक्ष जांच की मांग
स्थानीय लोगों ने मांग की है कि जिले की सभी गौशालाओं का स्वतंत्र और निष्पक्ष सत्यापन कराया जाए। प्रत्येक गौशाला में मौजूद वास्तविक गौवंशों की संख्या, चारा-भूसा की उपलब्धता और खर्च किए गए सरकारी धन का ऑडिट कराया जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
👨⚖️ अब निगाहें प्रशासन पर
लोगों की निगाहें जिलाधिकारी पुलकित गर्ग की कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि प्रशासन पूरे जिले की गौशालाओं की जांच कराता है तो वास्तविक स्थिति सामने आने के साथ-साथ दोषियों के खिलाफ कार्रवाई भी संभव हो सकती है।
📝 महत्वपूर्ण सूचना: यह खबर स्थानीय लोगों द्वारा लगाए गए आरोपों और प्राप्त शिकायतों पर आधारित है। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति प्रशासनिक जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
