प्रयागराज में अवैध न्यायिक हिरासत पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त, पीड़ित को ₹2 लाख मुआवजा देने का आदेश
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार की पुलिस को अस्पष्ट आदेश दिया है कि किसी व्यक्ति को बिना वजहछोटे मोटे मामलों में परेशान न किया जाए। प्रयागराज निवासी मंसूर अहमद को आठ दिन तक अवैध रूप से न्यायिक हिरासत में रखे जाने के मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए पीड़ित को ₹2 लाख मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी कहा कि विभागीय जांच पूरी होने के बाद यह राशि संबंधित एसीपी वेदव्यास मिश्रा के वेतन से वसूल की जाएगी।
खंडपीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि केवल शांतिभंग (Preventive Proceedings) के मामलों में व्यक्ति को पहले पर्सनल बॉन्ड भरने का अवसर दिया जाना चाहिए और बिना पर्याप्त कानूनी आधार के उसे न्यायिक हिरासत में भेजने से बचना चाहिए।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी की कि किसी नागरिक की व्यक्तिगत स्वतंत्रता संविधान द्वारा संरक्षित मौलिक अधिकार है और अनावश्यक न्यायिक हिरासत इस अधिकार का उल्लंघन है। अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति को 24 घंटे से अधिक समय तक गैर-जरूरी न्यायिक हिरासत में रखा जाता है, तो प्रतिदिन ₹25,000 तक मुआवजा दिए जाने का सिद्धांत लागू किया जाना चाहिए।
अदालत ने उत्तर प्रदेश सरकार को छह सप्ताह के भीतर मुआवजा अदा करने तथा प्रयागराज पुलिस आयुक्त को आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश भी दिया है। इस फैसले को पुलिस द्वारा शांतिभंग की कार्यवाही में मनमानी पर महत्वपूर्ण न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है।
रिपार्ट …अमरनाथ झा – 9415254415
