कौशाम्बी: RTI पर ‘आधा सच’—खाद्य विभाग ने आंकड़े दिए, लेकिन मिलावट की असली तस्वीर छुपाई
कौशाम्बी। सूचना का अधिकार (RTI) कानून के तहत पारदर्शिता का दावा करने वाला खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग खुद ही सवालों के घेरे में आ गया है। विभाग ने आवेदक को भेजे जवाब में जहां औपचारिक आंकड़े साझा किए, वहीं मिलावटी और असुरक्षित खाद्य पदार्थों से जुड़ी सबसे अहम जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया।
10 मार्च 2026 को जारी पत्र में विभाग ने बताया कि जनवरी 2023 से जनवरी 2026 के बीच 2283 खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया और 568 नमूने लिए गए। लेकिन जब इन्हीं नमूनों में से कितने असुरक्षित या मिलावटी पाए गए—इस संवेदनशील सवाल पर विभाग ने चुप्पी साध ली। इसे “सूचना सृजन/व्याख्या” बताकर जानकारी देने से मना कर दिया गया।
विशेषज्ञों की मानें तो RTI कानून के तहत उपलब्ध रिकॉर्ड से जानकारी देना अनिवार्य है, ऐसे में “व्याख्या” का तर्क देकर आंकड़ों को छुपाना पारदर्शिता की मंशा पर सवाल खड़े करता है।
जवाब में यह भी सामने आया कि जिले में 4394 लाइसेंसधारी खाद्य प्रतिष्ठान संचालित हैं। वहीं दवा दुकानों से 148 नमूने लिए गए, जिनमें 13 मामलों में गड़बड़ी मिली और 10 मामलों को न्यायालय तक पहुंचाया गया। इसके बावजूद खाद्य नमूनों की वास्तविक स्थिति पर पर्दा डालना विभाग की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।
इतना ही नहीं, विभाग में कर्मचारियों की कमी भी उजागर हुई है—कनिष्ठ सहायक के 2 पद खाली हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या स्टाफ की कमी का असर जांच और पारदर्शिता दोनों पर पड़ रहा है?
सबसे अहम बात यह है कि विभाग ने अपने जवाब में यह भी कहा कि मांगी गई जानकारी “अत्यधिक विस्तृत” है और इससे संसाधनों पर दबाव पड़ता है। लेकिन जनस्वास्थ्य से जुड़े मामलों में जानकारी छुपाने का यह तर्क कितना उचित है, यह बहस का विषय बन गया है।
अब बड़ा सवाल: क्या कौशाम्बी में मिलावटी खाद्य पदार्थों की सच्चाई दबाई जा रही है?
क्या RTI के जरिए भी आम जनता को पूरी जानकारी नहीं मिल पा रही?
यह मामला न सिर्फ विभागीय पारदर्शिता, बल्कि आम लोगों की सेहत से भी सीधा जुड़ा हुआ है—जिस पर जवाबदेही तय होना जरूरी है।
Amarnath jha Kaushambi – 9415254415
