मुफ्त एम्बुलेंस में वसूली का खेल, कौशाम्बी में 108 ,102 सेवा पर सवाल
“जिस सेवा से जिंदगी बचनी थी, वहीं अगर वसूली होने लगे—तो सिस्टम पर सवाल उठना तय है।”
कौशाम्बी। गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए जीवन रेखा मानी जाने वाली 108 एम्बुलेंस सेवा अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। जिले में लगातार मिल रही शिकायतों और हाल ही में दाखिल सूचना का अधिकार (RTI) आवेदन ने इस व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।
सूत्रों के अनुसार, कई जगहों पर एम्बुलेंस कर्मियों द्वारा “मुफ्त सेवा” के बावजूद मरीजों और उनके परिजनों से पैसे वसूले जाने के आरोप सामने आए हैं। इतना ही नहीं, कुछ मामलों में मरीजों को सरकारी अस्पताल की बजाय प्राइवेट अस्पतालों में ले जाने की भी चर्चा है, जिससे कमीशनखोरी की आशंका जताई जा रही है।
वरिष्ठ पत्रकार अमरनाथ झा ने RTI के माध्यम से एम्बुलेंस की संख्या, कॉल और ट्रिप का पूरा रिकॉर्ड, डीजल खर्च, स्टाफ की उपस्थिति और शिकायतों का विवरण मांगा गया है। जानकारों का कहना है कि यदि इन बिंदुओं की निष्पक्ष जांच हो जाए, तो बड़े स्तर पर अनियमितताएं उजागर हो सकती हैं।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एम्बुलेंस वास्तव में जरूरतमंद मरीजों तक समय पर पहुंच रही हैं, या फिर कागजों में फर्जी ट्रिप दिखाकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है। डीजल खर्च और GPS ट्रैकिंग के आंकड़े इस मामले में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
वहीं, एम्बुलेंस स्टाफ की ड्यूटी और उपस्थिति को लेकर भी संदेह जताया जा रहा है। कई बार शिकायतें आई हैं कि समय पर एम्बुलेंस नहीं पहुंचती, जिससे मरीजों को निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है।
अब सभी की निगाहें स्वास्थ्य विभाग और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय पर टिकी हैं। RTI का जवाब आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि कौशाम्बी में एम्बुलेंस सेवा वाकई सेवा दे रही है या फिर “वसूली का जरिया” बन चुकी है।
अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह मामला जिले के सबसे बड़े स्वास्थ्य घोटालों में शामिल हो सकता है। प्रशासन की जिम्मेदारी है कि वह पारदर्शिता सुनिश्चित करे और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करे, ताकि गरीबों की यह जरूरी सेवा भरोसेमंद बनी रहे।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
