कौशाम्बी: मुकदमा 498/2025 की जांच पर घमासान, पूर्व जनप्रतिनिधियों पर भी लगे गंभीर आरोप, पूर्व विधायक में प्रेस कांफ्रेंस कर दी सफाई
👉 कौशाम्बी में मुकदमा 498/2025 की जांच पर गहराया विवाद,सीबीआई जांच की मांग, निष्पक्ष विवेचना पर उठे सवाल
👉 पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता व पूर्व चेयरमैन कैलाश केसरवानी पर लगे आरोप
👉 मकान नामांतरण और बिक्री में प्रभाव का आरोप, परिवार पर मिलीभगत के दावे
👉 पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता की प्रेस कॉन्फ्रेंस, कहा– विरोधियों की साजिश और चुनावी
कौशाम्बी। जनपद के कौशाम्बी के कोखराज थाना में दर्ज मुकदमा अपराध संख्या 498/2025 की विवेचना को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। प्रार्थिनी राजदुलारी केसरवानी ने फिर से मुख्यमंत्री को पत्र देकर मामले की सीबीआई जांच की मांग की है। उनका आरोप है कि प्रभावशाली लोगों के दबाव में निष्पक्ष विवेचना नहीं हो रही है।
पीड़ित पक्ष का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद अब तक किसी भी नामजद आरोपी की गिरफ्तारी नहीं की गई। गवाहों पर दबाव बनाने और साक्ष्य न जुटाने के भी आरोप लगाए गए हैं। पीड़ित परिवार ने मुख्यमंत्री से जनता दर्शन में मिलकर मामले को केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की मांग दोहराई है।
पूर्व चेयरमैन और विधायक पर आरोप…..
इस प्रकरण में अब नया मोड़ तब आया जब आरोपों के दायरे में पूर्व चेयरमैन एवं पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता, तथा पूर्व चेयरमैन कैलाश केसरवानी तथा उनकी पत्नी का नाम भी सामने आया। आरोप है कि उनके प्रभाव के चलते संबंधित मकान का नामांतरण (नाम चढ़ाना) नहीं किया गया।
पीड़ित पक्ष का दावा है कि परिवार के कुछ लोगों ने आपसी मिलीभगत से मकान बेच दिया और इस पूरे प्रकरण में पूर्व चेयरमैनों के सहयोग की भी बात कही जा रही है। आरोप यह भी है कि प्रभावशाली राजनीतिक संरक्षण के कारण राजस्व एवं प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई लंबित रही।
पूर्व विधायक की सफाई.…
वहीं पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता ने प्रेस कांफ्रेंस कर इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने कहा कि उनका नाम एफआईआर में जबरन जोड़कर राजनीतिक साजिश के तहत बदनाम किया जा रहा है। उनके अनुसार मामला वर्ष 2005 का बताया जा रहा है, जबकि उनका कार्यकाल 2012 से 2017 तक रहा है, इसलिए उनका इस प्रकरण से कोई लेना-देना नहीं है।
उन्होंने 2027 के संभावित चुनाव को देखते हुए इसे छवि खराब करने की साजिश बताया और कहा कि मामले को तूल देने वाले कुछ विरोधियों के खिलाफ उन्होंने पुलिस अधीक्षक से शिकायत कर जांच की मांग की है।
बढ़ती राजनीतिक सरगर्मी….
मुकदमे की धीमी प्रगति, गिरफ्तारी न होने और अब पूर्व जनप्रतिनिधियों पर लगे आरोपों के बाद मामला पूरी तरह राजनीतिक रंग ले चुका है। जिले में चर्चा है कि यदि शासन स्तर पर कोई बड़ा निर्णय हुआ और जांच केंद्रीय एजेंसी को सौंपी गई, तो कई प्रभावशाली नामों की भूमिका की गहन पड़ताल हो सकती है।
फिलहाल प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से विस्तृत बयान सामने नहीं आया है ।
अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी -9415254415
