बारिश में डूब जाता है संपर्क मार्ग, स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ती मुसीबत,दामूपुर, रावतपुर, लखनपुरा के ग्रामीणों को हर साल होती है भारी परेशानी,ग्रामीणों ने उठाई पक्के पुल निर्माण की मांग
👉 नदी नहीं, लेकिन बाढ़ जैसे हालात – चकिया से लगा है कसारी मसारी और दामूपुर के बीच 500 मीटर की दूरी, मजबूरी में घूमना पड़ता है 12 किलोमीटर
👉 बरसात में रावतपुर, लखनपुर , दामूपुर जैसे गांवों में हालात बदतर, स्कूली बच्चों, मरीजों और ग्रामीणों की जिंदगी हो रही प्रभावित ।
👉 चकिया से लगा है कसारी मसारी और इसे से दामूपुर के बीच सिर्फ 500 मीटर की है दूरी, बरसात में बन जाती है 12 किलोमीटर
👉 इलाहाबाद स्टेशन सिर्फ 4 किलोमीटर, लेकिन पहुंचने में लगते हैं घंटे, आपात स्थिति में एंबुलेंस और प्रशासनिक मदद भी पहुंचने में असमर्थ
प्रयागराज। नगर निगम प्रयागराज के चकिया से लगा है कसारी मसारी लेकिन दामुपुर के बीच की वास्तविक दूरी महज 500 मीटर है, लेकिन बरसात के दिनों में यह दूरी ग्रामीणों के लिए 10 से 12 किलोमीटर की जद्दोजहद बन जाती है। खासकर दामूपुर, रावतपुर, लखनपुरा जैसे दर्जनों गांवों के लोगों को हर साल इस मुश्किल से गुजरना पड़ता है।

गंगा या यमुना नदी जैसी कोई बड़ी धारा यहां नहीं है, लेकिन बारिश के पानी से हालात बाढ़ जैसे बन जाते हैं। गांवों को जोड़ने वाली सड़कें और संपर्क मार्ग पूरी तरह जलमग्न हो जाते हैं। सबसे ज्यादा दिक्कत चकिया की कसारी मसारी सड़क से होकर दामू पुर जाने वाले रास्ते पर होती है, जो अक्सर डूब जाता है।
स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इलाहाबाद रेलवे स्टेशन जैसे स्थान तक भी इमरजेंसी की स्थिति में पहुंचने में घंटों लग जाते हैं। मरीजों को अस्पताल ले जाना मुश्किल होता है, बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और व्यापारिक गतिविधियां पूरी तरह बाधित हो जाती हैं।
ग्रामीणों ने कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए चकिया से दामुपुर को जोड़ने वाले एक पक्के पुल की मांग की है। यदि यह पुल बन जाए, तो लाखों लोगों को राहत मिलेगी और वर्षों पुरानी परेशानी का समाधान संभव हो सकेगा।
सरकार और नगर निगम से ग्रामीणों की मांग है कि इलाके की भूगर्भीय स्थिति को समझते हुए स्थायी समाधान जल्द से जल्द किया जाए, ताकि अगली बरसात में लोगों को दोबारा इस मुसीबत से न गुजरना पड़े।
अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396
