स्थानांतरण प्रक्रिया में देरी से नाराज़ प्राध्यापक, प्रयागराज निदेशालय में सौंपा पत्र, उच्च शिक्षा मंत्री के माध्यम से शीघ्र निस्तारण की उठाई मांग

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👉  प्रयागराज शिक्षा निदेशालय में प्राध्यापकों की पहल, लंबित स्थानांतरण फाइलों के शीघ्र निस्तारण की उठाई मांग, पारदर्शिता पर उठे सवाल   

👉 अशासकीय महाविद्यालयों के प्राध्यापक पहुंचे शिक्षा निदेशालय प्रयागराज। उच्च शिक्षा मंत्री के माध्यम से उच्च शिक्षा निदेशक को सौंपा गया ज्ञापन।

👉 2023 से लंबित स्थानांतरण आवेदनों के शीघ्र निस्तारण की उठाई मांग। कुछ चुनिंदा शिक्षकों का ही हुआ ट्रांसफर, बाकी आवेदन अब भी लंबित।

👉 पारदर्शिता की कमी और देरी से शिक्षकों में गहरा असंतोष।नीति में संशोधन के बाद भी स्थानांतरण प्रक्रिया अधर में, आंदोलन की चेतावनी।

प्रयागराज। उत्तर प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों के प्राध्यापक अपनी लंबित एकल स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर लगातार परेशान हैं। इसी क्रम में प्रदेश के विभिन्न जनपदों से आए प्राध्यापकों ने प्रयागराज स्थित शिक्षा निदेशालय में उपस्थित होकर उच्च शिक्षा मंत्री उत्तर प्रदेश के माध्यम से उच्च शिक्षा निदेशक को ज्ञापन सौंपा। इस ज्ञापन के माध्यम से प्राध्यापकों ने 2023 से लंबित स्थानांतरण आवेदनों के शीघ्र व सकारात्मक निस्तारण की मांग की है।

प्राध्यापकों का कहना है कि उन्होंने एकल स्थानांतरण (Spouse Transfer, Medical Grounds, पारिवारिक बाध्यताओं आदि) हेतु आवेदन दिए थे, किंतु अब तक उनकी फाइलों पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।
उन्होंने बताया कि जून 2024 तक स्थानांतरण प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए थी, लेकिन अब तक उसे लागू नहीं किया गया, जिससे उन्हें कार्यस्थल और पारिवारिक जीवन में अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

शिक्षकों ने यह भी आरोप लगाया कि स्थानांतरण नीति में बदलाव के प्रस्ताव की आड़ में प्रक्रिया को जानबूझकर लंबित किया जा रहा है। कुछ चुनिंदा लोगों के ट्रांसफर कर दिए गए हैं जबकि अधिकांश आवेदनों की अनदेखी हो रही है, जिससे शिक्षकों में भारी निराशा और असंतोष है।

उल्लेखनीय है कि संशोधित नियमावली के अनुसार, सेवा अवधि 3 वर्ष निर्धारित की गई है। इसके बावजूद कई ऐसे प्राध्यापक जिनकी सेवा अवधि पूरी हो चुकी है, उन्हें भी स्थानांतरण का लाभ नहीं मिला। फरवरी 2025 तक केवल 4 में से 2 शिक्षकों का ही ट्रांसफर किया गया, जो नीति की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न लगाता है।

प्राध्यापकों ने स्पष्ट किया कि अधिकांश शिक्षक पारिवारिक, स्वास्थ्य संबंधी एवं सामाजिक कारणों से स्थानांतरण के लिए आवेदन करते हैं, लेकिन लंबी प्रक्रिया, अस्पष्टता और पक्षपातपूर्ण रवैये के कारण वे लगातार मानसिक तनाव में हैं।

प्रमुख मांगें:

  • सभी लंबित स्थानांतरण आवेदनों का शीघ्र एवं पारदर्शी निस्तारण।
  • स्थानांतरण नीति को स्पष्ट एवं निष्पक्ष तरीके से लागू किया जाए।
  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु प्रक्रिया में समयबद्धता तय की जाए।
  • विभागीय अधिकारियों की भूमिका की समीक्षा की जाए।

शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि शीघ्र कोई कदम नहीं उठाया गया तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।

अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396

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