जिसे मृत समझ कर किया अंतिम संस्कार, वह किशोरी तीन माह बाद मिली जिंदा, इंस्टाग्राम से हुआ खुलासा, क्या यही है अंधा कानून
👉 तीन महीने पहले मृत समझी गई किशोरी मिली जिंदा ,इंस्टाग्राम चैट से पुलिस को मिली बड़ी सफलता।
👉 मृत मानकर किया गया था किशोरी का अंतिम संस्कार ,कोखराज थाना क्षेत्र के शहजादपुर से पुलिस ने बरामद किया।
👉 संदीप कुमार पर फर्जी अपहरण और हत्या का मुकदमा दर्ज कर जेल भेजा गया था ,किशोरी अपने भाई से इंस्टाग्राम आईडी से कर रही थी बातचीत।
👉 पुलिस ने साइबर सेल की मदद से इंस्टाग्राम आईडी को ट्रैक किया ,अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल, अंतिम संस्कार किसका हुआ था?
कौशांबी। जिले के कोखराज थाना क्षेत्र से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां तीन माह पहले गायब हुई किशोरी, जिसे मृत समझ कर अंतिम संस्कार कर दिया गया था, वह जीवित मिल गई। इस पूरे रहस्य से पर्दा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम ने उठाया। सवाल यह उठता है कि जिस लड़की के अपहरण और हत्या के केस में यूवक जेल गया है उसे पुलिस न्याय कैसे दिलाएगी। क्या यह अंधा कानून नहीं है , किसी फिल्मी कहानी की तरह इस मामले में पीड़ित युवक को कैसे न्याय मिलेगा यह एक बड़ा सवाल है।
साई का पुरवा खारा गांव निवासी लालता प्रसाद की 16 वर्षीय बेटी 17 मार्च 2025 को रहस्यमय हालात में लापता हो गई थी। परिजनों ने गांव के ही संदीप कुमार और विष्णु कुमार पर बेटी को भगाने का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज कराया। अगले दिन भरवारी रेलवे स्टेशन के पास एक अज्ञात किशोरी का शव मिला, जिसे पुलिस ने तीन दिन बाद पोस्टमार्टम कराकर दफना दिया। बाद में परिजनों ने शव की शिनाख्त अपनी बेटी के रूप में की।
पुलिस ने युवक संदीप को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन पुलिस मामले की जांच में जुटी रही। इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली कि किशोरी अपने भाई से इंस्टाग्राम आईडी के जरिए संपर्क में है। पुलिस ने किशोरी के भाई से पूछताछ की, जिसमें उसने कबूल किया कि उसकी बहन जिंदा है और उससे इंस्टाग्राम पर बातचीत होती है। पुलिस ने साइबर सेल की मदद से आईडी ट्रैक कर किशोरी को कोखराज थाना क्षेत्र के शहजादपुर के पास से सकुशल बरामद कर लिया।
पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार ने बताया कि पूरे मामले की गहराई से जांच की जा रही है। अब सवाल यह है कि जिसकी अंत्येष्टि की गई थी, वह मृत किशोरी आखिर कौन थी? पुलिस इसका भी पता लगाने में जुटी हुई है।
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आखिर जेल में बंद निर्दोष व्यक्ति को कैसे मिलेगा न्याय ?
कौशाम्बी। जब यह साबित हो जाता है कि मामला झूठा था और जिस व्यक्ति को फंसाया गया था, वह निर्दोष है, तो पुलिस को कोर्ट में फाइनल रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट या कैंसिलेशन रिपोर्ट) लगानी होती है। आरोपी व्यक्ति को कोर्ट द्वारा बाइज्जत बरी कर दिया जाता है। यदि व्यक्ति को जेल में कई महीनों तक गलत तरीके से रखा गया हो, तो वह कंपनसेशन (मुआवजा) के लिए हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकता है। सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में गलत गिरफ्तारी और उत्पीड़न के मामलों में मुआवजा दिलाया गया है।
फर्जी केस कराने वालों पर होगी कार्रवाई
भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 182 या BNS 217 (झूठी सूचना देना), 211 अब BNS 248 (झूठा आरोप लगाना) और 120B अब BNS 61 (2) (षड्यंत्र रचना) के तहत कार्रवाई हो सकती है। झूठा आरोप लगाने वाले व्यक्तियों पर एफआईआर दर्ज कर गिरफ्तारी भी की जा सकती है। उन्हें झूठी शिकायत करने, न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग करने और निर्दोष को फंसाने के आरोप में सजा हो सकती है, जिसमें जेल और जुर्माना दोनों का प्रावधान है।
पुलिस की भूमिका और जांच की जिम्मेदारी
पुलिस को अपने स्तर से फर्जी मुकदमा करने वालों के खिलाफ स्वतः संज्ञान लेकर मामला दर्ज करना चाहिए। दोषी पुलिसकर्मियों पर भी विभागीय कार्रवाई हो सकती है यदि उन्होंने लापरवाही या पक्षपात किया हो।
आरोपी युवक के अधिकार:
युवक को मानहानि का केस (Defamation) और हिरासत में नुकसान के लिए क्षतिपूर्ति (Compensation) की मांग करने का पूरा अधिकार है।
अमरनाथ झा पत्रकार (8318977396 )
