कौशाम्बी मुठभेड़ पर उठे सवाल ,थाने से घटनास्थल पर ले जाए गए आरोपी की मुडभेड़ में गोली लगने से मौत, फर्जी एनकाउंटर की आशंका, सीने में कैसे लगी गोली
👉 कौशाम्बी में कॉपर वायर लूटकांड के आरोपी की मुठभेड़ में मौत, पुलिस ने बताया आत्मरक्षा में कार्रवाई ,आरोपी संतोष को पहले कोखराज थाने में लाया गया था, CCTV फुटेज से पुष्टि।
👉 गोली सीने में लगने पर उठे सवाल, जबकि निर्देश था जांघ के नीचे फायरिंग का ,फर्जी एनकाउंटर की आशंका, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे गंभीर सवाल।
👉 जिले में अब तक हो चुकी है दर्जनों मुडभेड़, कई बार पुलिस की इस मुड़भेड की कार्यवाही पर उठ चुके हैं सवाल …
कौशाम्बी। कोखराज थाना क्षेत्र में ट्रक चालक की हत्या और करोड़ों की कॉपर वायर लूट मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक शातिर बदमाश को मुठभेड़ में मार गिराने का दावा किया है। एसपी राजेश कुमार के निर्देश पर की गई इस कार्रवाई में चार अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो फरार बदमाशों की तलाश जारी है। लेकिन मुठभेड़ की परिस्थितियों को लेकर अब सवालों का दौर शुरू हो गया है।
पुलिस का दावा है कि मुख्य आरोपी संतोष उर्फ राजू राजभर को पिस्टल की बरामदगी के लिए घटनास्थल ले जाया गया, जहां उसने झाड़ियों से छिपी पिस्टल निकालकर अचानक पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में गोली चलाई, जो आरोपी के पैर और सीने में लगी। पुलिस के मुताबिक उसे तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हालांकि मुठभेड़ के इस पूरे घटनाक्रम को लेकर स्थानीय स्तर पर संदेह गहराता जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, मुठभेड़ से पूर्व संतोष राजभर को बाकायदा कोखराज थाने लाया गया था और उससे लंबी पूछताछ की गई थी। इसकी पुष्टि थाने में लगे सीसीटीवी फुटेज से भी हो सकती है। ऐसे में सवाल यह है कि थाने में मौजूद आरोपी को घटना स्थल पर ल गए और उसने दो पुलिसकर्मियों पर अचानक गोली मार दी , यह हमला कैसे कर दिया? ,यह चर्चा बन गया है। फिलहाल बताया तो यह जा रहा है कि रविवार को न्यायालय में भी इस मामले पर काफी बहस का यह मुद्दा रहा है ।

इसके अलावा, पुलिस को अभियुक्त पर फायरिंग करते समय स्पष्ट निर्देश होता है कि गोली जांघ के नीचे मारी जाए लेकिन संतोष को गोली पैर के अलावा सीने में कैसे लगी? यह सवाल भी मुठभेड़ की विश्वसनीयता पर गंभीर संदेह पैदा कर रहा है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के बीच यह चर्चा तेज हो गई है कि कहीं यह एनकाउंटर फर्जी तो नहीं था? क्या किसी दबाव में पुलिस ने साक्ष्य मिटाने या अपराधी को रास्ते से हटाने के लिए यह रास्ता चुना?
फिलहाल पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ उसके इरादों पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। मुठभेड़ के नाम पर कानून की प्रक्रिया से हटकर कोई कार्रवाई हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच की मांग भी अब तेज होती दिख रही है। चर्चाओ पर जाएं तो सन्तोष के परिजन भी इस मामले की जानकारी में लगे हुए है, वह जौनपुर जिले के थाना खेता सराय के पोरई कला का निवासी था।
अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396
