पूर्व विधायक संजय गुप्ता से जुड़े मुकदमे में हाईकोर्ट की रोक, सरकार से जवाब तलब

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👉 विकास गुप्ता की याचिका पर अंतरिम राहत; कैंट थाने के मुकदमे और समन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक

👉 पांच साल से अधिक की देरी और चार्जशीट की प्रक्रिया पर याचिकाकर्ता ने उठाए सवाल, 9 दिसंबर को अगली सुनवाई
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चायल के पूर्व भाजपा विधायक संजय कुमार गुप्ता की ओर से दर्ज कराए गए मुकदमे में विकास गुप्ता उर्फ विकास कुमार गुप्ता को अंतरिम राहत दी है। न्यायमूर्ति विक्रम डी. चौहान की एकल पीठ ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 528 के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए प्रयागराज के कैंट थाने में दर्ज मुकदमे की आपराधिक कार्यवाही और मजिस्ट्रेट कोर्ट के समन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी। अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर 2026 को निर्धारित की गई है।
वर्ष 2021 में दर्ज हुई थी एफआईआर
याचिका में दिए गए विवरण के मुताबिक, मामला वर्ष 2021 में प्रयागराज के कैंट थाने में दर्ज एफआईआर संख्या 0033/2021 से संबंधित है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत आपराधिक धमकी देने का आरोप लगाया गया था। शिकायत में आरोप था कि विकास गुप्ता संपत्ति विवाद के सिलसिले में तत्कालीन विधायक संजय कुमार गुप्ता के आवास पर पहुंचे थे और वहां हुई बातचीत की मोबाइल से रिकॉर्डिंग की थी। शिकायतकर्ता की ओर से इस कृत्य को राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचाने की मंशा से जोड़कर देखा गया था।
याचिकाकर्ता ने एफआईआर की वैधता पर उठाए सवाल
विकास गुप्ता की ओर से अधिवक्ता शचिन्द्र कुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में दलील दी कि विवाद की पृष्ठभूमि निजी पारिवारिक संपत्ति विवाद से जुड़ी है। याचिका में आरोप लगाया गया कि पूर्व विधायक ने अपने राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए दबाव बनाने के उद्देश्य से मुकदमा दर्ज कराया। याचिकाकर्ता ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है। हालांकि, इन दावों पर अदालत का अंतिम निष्कर्ष आना बाकी है।
याचिकाकर्ता की ओर से सुप्रीम कोर्ट के मानिक तनेजा बनाम कर्नाटक राज्य मामले का हवाला देते हुए तर्क दिया गया कि आपराधिक धमकी का अपराध स्थापित करने के लिए केवल विवाद या बातचीत की रिकॉर्डिंग पर्याप्त नहीं है। इसके लिए आरोपों में अपराध के आवश्यक कानूनी तत्वों का होना जरूरी है। याचिका में कहा गया कि एफआईआर में वर्णित तथ्यों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 506 के तहत अपराध नहीं बनता।
चार्जशीट और समन आदेश को भी दी चुनौती
याचिका में पुलिस की जांच और चार्जशीट दाखिल करने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता के अनुसार, पुलिस ने मार्च 2021 में ही आरोपपत्र संख्या 59/2021 तैयार किए जाने का दावा किया था, लेकिन इसे लंबे समय तक अदालत में प्रस्तुत नहीं किया गया। याचिका में कहा गया कि हाईकोर्ट में रिट याचिका दाखिल होने के बाद पुलिस ने 28 जुलाई 2026 को आरोपपत्र अदालत में पेश करने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई और 20 अगस्त 2026 को निचली अदालत ने संज्ञान लेते हुए समन जारी कर दिया।
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि निचली अदालत ने मामले के तथ्यों और कानूनी पहलुओं पर समुचित विचार किए बिना संज्ञान लिया। इस आधार पर समन आदेश की वैधता को भी चुनौती दी गई है। ये सभी दलीलें याचिकाकर्ता की ओर से प्रस्तुत की गई हैं; इन पर अंतिम न्यायिक निर्णय होना शेष है।
अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय का मुद्दा
याचिका में पांच साल से अधिक समय तक आरोपपत्र और न्यायिक प्रक्रिया लंबित रहने को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत त्वरित न्याय के अधिकार से जोड़ते हुए राहत मांगी गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि लंबी देरी के कारण उन्हें अनावश्यक आपराधिक कार्यवाही का सामना करना पड़ रहा है।
अंतरिम रोक का क्या होगा असर?
हाईकोर्ट की ओर से दी गई राहत फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है। आदेश के दायरे में आने वाली आपराधिक कार्यवाही और समन आदेश पर अगली सुनवाई तक रोक रहेगी। इसे एफआईआर निरस्त होने, आरोप समाप्त होने या याचिकाकर्ता के दोषमुक्त होने के रूप में नहीं देखा जा सकता। अदालत ने राज्य सरकार और शिकायतकर्ता को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। आगे की सुनवाई में याचिका के गुण-दोष पर विचार किया जाएगा।
मामले में अगली सुनवाई नौ दिसंबर 2026 को होगी। अब अदालत के समक्ष राज्य सरकार और शिकायतकर्ता की ओर से प्रस्तुत किए जाने वाले जवाब तथा याचिकाकर्ता की दलीलों पर आगे विचार होना है।

फिलहाल इस मामले पर जब पूर्व विधायक संजय कुमार गुप्ता से बात हुई तो उन्होंने बताया कि यह मामला 2021 का है विकाश गुप्ता घर पर आया था हमारी बातचीत का रिकार्डिंग कर रहा था जिसमें रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी और पुलिस ने अपनी कानूनी कार्यवाही की है , फिलहाल इसमें अभी क्या चल रहा है जानकारी नहीं है।

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