प्रयागराज नगर निगम के गृहकर सर्वे पर फिर सवाल, पुराने खसरे से नए बिलों का आकलन क्यों
👉 न्यू जियो कंपनी के जीआईएस सर्वे, असेसमेंट रजिस्टर और प्रकाशन की जांच की मांग..
👉 सर्वे निरस्त होने की खबर के बाद भी गृहकर निर्धारण पर सवाल, नगर आयुक्त से जवाब मांग रहे करदाता..
प्रयागराज। रिपोर्ट अमरनाथ झा।
प्रयागराज नगर निगम में भवनों के जीआईएस सर्वे और गृहकर निर्धारण की प्रक्रिया एक बार फिर सवालों के घेरे में है। वर्ष 2022-23 के दौरान कराए गए सर्वे में कथित अनियमितताओं, पुराने भवन अभिलेखों के इस्तेमाल, असेसमेंट रजिस्टर की उपलब्धता और सर्वे रिपोर्ट के सार्वजनिक प्रकाशन को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। शिकायतों के अनुसार, कई भवन स्वामियों को ऐसे गृहकर बिल मिल रहे हैं, जिनमें आकलन के आधार और पुराने बकाये को लेकर स्पष्टता नहीं है। ऐसे में नगर निगम प्रशासन की जवाबदेही और कर निर्धारण की पारदर्शिता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, नगर निगम ने भवनों का भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) के माध्यम से सर्वे कराया था। 24 जुलाई 2023 को प्रकाशित एक रिपोर्ट में सर्वे निरस्त किए जाने की जानकारी सामने आई थी। 11 अगस्त 2023 की रिपोर्ट में भी सर्वे रिपोर्ट निरस्त किए जाने और भवन स्वामियों को स्वयं गृहकर आकलन का विवरण देने के लिए प्रपत्र उपलब्ध कराने का उल्लेख था। इसके बाद भी यदि किसी भवन पर पुराने सर्वे या त्रुटिपूर्ण अभिलेखों के आधार पर कर निर्धारित किया जा रहा है, तो नगर निगम को संबंधित भवनवार रिकॉर्ड और कर निर्धारण का आधार सार्वजनिक करना चाहिए।
1. न्यू जियो कंपनी ने सर्वे कैसे किया, मौके पर जांच हुई या केवल तकनीक का इस्तेमाल?
नगर निगम से जुड़ी शिकायतों में सर्वे करने वाली न्यू जियो कंपनी की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि कंपनी ने भवनों का सर्वे किस पद्धति से किया? क्या कर्मचारियों ने प्रत्येक भवन का मौके पर निरीक्षण कर उसका क्षेत्रफल, मंजिल, निर्माण की प्रकृति और उपयोग दर्ज किया था? क्या उपग्रह चित्रों, भौगोलिक सूचना प्रणाली और अन्य तकनीकी साधनों के आधार पर भवनों का विवरण तैयार किया गया था? यदि दोनों पद्धतियों का इस्तेमाल हुआ तो उनका सत्यापन कैसे किया गया?
जीआईएस सर्वे में तकनीक का उपयोग अपने आप में अनियमितता का प्रमाण नहीं है। लेकिन तकनीकी आंकड़ों को वास्तविक भवन की स्थिति से मिलाना, गलत प्रविष्टियों को सुधारना और कर निर्धारण के लिए प्रमाणित अभिलेख तैयार करना महत्वपूर्ण है। इसलिए कंपनी की सर्वे रिपोर्ट, कार्यादेश, भुगतान विवरण, गुणवत्ता जांच और नगर निगम के अधिकारियों द्वारा किए गए सत्यापन की जानकारी सामने आनी चाहिए।
2. सर्वे निरस्त हुआ तो उसके आधार पर बने गृहकर बिलों की स्थिति क्या है?
वर्ष 2023 में प्रकाशित खबरों में जीआईएस सर्वे रिपोर्ट निरस्त किए जाने का उल्लेख सामने आया था। ऐसे में नगर आयुक्त को स्पष्ट करना चाहिए कि सर्वे निरस्त करने का निर्णय किस सक्षम प्राधिकारी ने लिया था? संबंधित आदेश की तारीख और संख्या क्या है? क्या पूरा सर्वे निरस्त हुआ था या केवल उसकी रिपोर्ट अथवा कुछ प्रविष्टियों को अमान्य माना गया था?
सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि यदि किसी सर्वे रिपोर्ट को निरस्त किया गया था, तो उसके आधार पर तैयार किए गए भवनवार कर निर्धारण का आगे क्या हुआ? क्या उन आकलनों की समीक्षा की गई? क्या गलत प्रविष्टियों को सुधारा गया? क्या प्रभावित भवन स्वामियों को सूचना दी गई?
इन सवालों का जवाब संबंधित आदेश और नगर निगम के अभिलेखों से ही स्पष्ट हो सकता है। बिना मूल आदेश देखे पूरे सर्वे को अवैध घोषित करना उचित नहीं होगा, लेकिन आदेश के क्रियान्वयन की जांच जरूरी है।
3. असेसमेंट रजिस्टर कहां है? जनता को अपने भवन का खसरा क्यों नहीं मिल रहा?
गृहकर निर्धारण की पारदर्शिता के लिए भवनवार आकलन अभिलेखों की उपलब्धता महत्वपूर्ण है। शिकायत है कि भवन स्वामियों को पुराने खसरे की प्रतियां दी जा रही हैं, जबकि वे अपने भवन की वर्तमान स्थिति के अनुरूप अद्यतन विवरण चाहते हैं।
उत्तर प्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959 की धारा 207 में आकलन सूची तैयार करने, धारा 208 में उसके प्रकाशन तथा धारा 209 में आपत्तियों के निस्तारण का प्रावधान है। धारा 210 के अनुसार, प्रमाणित आकलन सूची निगम कार्यालय में रखी जाती है और पूरी नगर सीमा की सूची उपलब्ध होने पर उसके निरीक्षण के लिए सार्वजनिक सूचना देने का प्रावधान है।
ऐसे में नगर आयुक्त को बताना चाहिए कि संबंधित अवधि का असेसमेंट रजिस्टर तैयार हुआ या नहीं? यदि तैयार हुआ तो उसे किस अधिकारी ने प्रमाणित किया? वह किस कार्यालय में उपलब्ध है? भवन स्वामी को अपने भवन से संबंधित प्रविष्टियों की नकल प्राप्त करने की प्रक्रिया क्या है?
यदि रजिस्टर तैयार नहीं हुआ, तो उसकी स्थिति, देरी का कारण और गृहकर निर्धारण के लिए इस्तेमाल किए गए वैकल्पिक अभिलेखों का विवरण स्पष्ट किया जाना चाहिए।
4. वर्ष 2003 या उससे पुराने खसरे से वर्तमान भवन का आकलन कैसे?
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि कुछ मामलों में वर्ष 2003 या उससे पुराने खसरे की प्रतियां दी जा रही हैं। यदि भवन में बाद में निर्माण हुआ, मंजिलें बढ़ीं, उपयोग बदला या क्षेत्रफल में परिवर्तन हुआ, तो पुराने अभिलेख से वर्तमान स्थिति का सही आकलन कैसे होगा?
यहां मूल सवाल केवल खसरे के पुराने होने का नहीं, बल्कि उसके अद्यतन और सत्यापन का है। नगर निगम को स्पष्ट करना चाहिए कि भवन की वर्तमान स्थिति दर्ज करने के लिए कौन-सा अभिलेख मान्य है और पुराने विवरण में संशोधन की प्रक्रिया क्या है।
भवन की पहचान, चौहद्दी, निर्माण वर्ष, मंजिलों की संख्या, आवासीय या व्यावसायिक उपयोग तथा कर निर्धारण के लिए प्रासंगिक क्षेत्रफल का विवरण उपलब्ध होना चाहिए, ताकि करदाता अपने बिल का मिलान वास्तविक स्थिति से कर सके।
5. गृहकर का निर्धारण वर्गमीटर या वर्गफुट में? नियम क्या कहते हैं?
उत्तर प्रदेश नगर निगम (संपत्ति कर) नियमावली, 2000 में समय-समय पर संशोधन किए गए हैं। नगर विकास विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में 27 दिसंबर 2013 की अधिसूचना संख्या 1463/नौ-9-2013/85ज-05 टीसी के तहत उत्तर प्रदेश नगर निगम (संपत्ति कर) (द्वितीय संशोधन) नियमावली, 2013 दर्ज है।
नियमावली के नियम 4-क, 4-ख और 4-ग में निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार न्यूनतम मासिक किराया दरों, भवनों की श्रेणी और क्षेत्रफल के आधार पर वार्षिक मूल्य निकालने का प्रावधान किया गया था। नियम 4-ग के प्रावधानों में आवासीय भवन के लिए कारपेट एरिया या निर्धारित शर्तों के अनुसार आच्छादित क्षेत्रफल, लागू मासिक दर और वार्षिक गणना का उल्लेख है। गैर-आवासीय भवनों के लिए अलग गणना का प्रावधान है।
इसलिए यह जांचना जरूरी है कि संबंधित भवन पर कौन-सी नियमावली और कौन-सा संशोधन लागू है। केवल पुराने खसरे में दर्ज क्षेत्रफल को आधार बनाकर वर्तमान कर निर्धारण किए जाने की शिकायत हो तो निगम को वास्तविक क्षेत्रफल, भवन की श्रेणी, लागू दर और गणना का पूरा विवरण देना चाहिए।
साथ ही, भवन स्वामी को यह जानकारी मिलनी चाहिए कि उसके क्षेत्र में लागू दरें किस अधिसूचना या सक्षम आदेश से निर्धारित हुईं और संबंधित भवन को किस श्रेणी में रखा गया।
6. सर्वे और आकलन सूची का प्रकाशन हुआ या नहीं?
उत्तर प्रदेश नगर निगम (संपत्ति कर) नियमावली, 2000 के नियम 5-क में आकलन सूची तैयार होने के बाद उसके निरीक्षण के स्थान और समय की सूचना दो दैनिक समाचार पत्रों में प्रकाशित करने तथा निर्धारित अवधि में आपत्तियां लेने की व्यवस्था का उल्लेख है। नियम के अनुसार, कारपेट एरिया, आच्छादित क्षेत्रफल, भूमि के क्षेत्रफल और अन्य प्रविष्टियों से संबंधित आपत्तियों पर सुनवाई की प्रक्रिया भी निर्धारित है।
इस कानूनी प्रावधान के संदर्भ में नगर निगम से पूछा जाना चाहिए कि संबंधित सर्वे के बाद आकलन सूची तैयार की गई थी या नहीं? यदि की गई तो प्रकाशन किस तारीख को और किन समाचार पत्रों में हुआ? भवन स्वामियों से आपत्तियां कब आमंत्रित की गईं और उनका निस्तारण किस अधिकारी ने किया?
यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि सर्वे रिपोर्ट, आकलन सूची और अंतिम कर निर्धारण सूची अलग-अलग अभिलेख हैं या उन्हें एक ही दस्तावेज के रूप में इस्तेमाल किया गया। इनकी स्थिति स्पष्ट होने से ही यह तय किया जा सकेगा कि प्रक्रिया नियमों के अनुरूप चली या नहीं।
7. पुराने बकाये और वर्ष 2013 या 2008 के नोटिसों का आधार क्या?
शिकायतों में पुराने वर्षों से संबंधित नोटिस और बकाये को लेकर भी भ्रम की बात सामने आ रही है। कुछ भवन स्वामी जानना चाहते हैं कि उनके वर्तमान बिल में पुराने वर्षों की देनदारी किस आदेश, किस आकलन और किस गणना के आधार पर जोड़ी गई है।
नगर निगम को प्रत्येक संबंधित मामले में कर निर्धारण की अवधि, मूल मांग, पूर्व में जमा राशि, संशोधित मांग, बकाये की गणना और नोटिस जारी करने के आधार का विवरण देना चाहिए। यदि किसी पुराने आकलन में त्रुटि थी तो उसके संशोधन का आदेश और संबंधित अभिलेख भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए।
केवल पुराने वर्ष का उल्लेख होने से कोई मांग स्वतः गलत या सही साबित नहीं होती। उसकी वैधता संबंधित आकलन, नोटिस, आदेश और लागू नियमों की जांच के बाद ही तय हो सकती है।
8. नगर आयुक्त से जवाबदेही के आठ सवाल
नगर आयुक्त प्रयागराज से निम्न बिंदुओं पर आधिकारिक जवाब मांगा जाना चाहिए—
वर्ष 2022-23 में न्यू जियो कंपनी को जीआईएस सर्वे का कार्य किस कार्यादेश और अनुबंध के तहत दिया गया था?
सर्वे पर कुल कितनी धनराशि खर्च हुई और कंपनी को कितना भुगतान किया गया?
सर्वे मैन्युअल, उपग्रह आधारित या मिश्रित पद्धति से कराया गया था? मौके पर सत्यापन कैसे हुआ?
सर्वे रिपोर्ट निरस्त किए जाने की खबरों के संदर्भ में संबंधित आदेश की प्रति और वर्तमान स्थिति क्या है?
सर्वे के बाद असेसमेंट रजिस्टर तथा भवनवार आकलन सूची तैयार और प्रमाणित हुई या नहीं?
आकलन सूची के प्रकाशन, निरीक्षण और आपत्तियों के निस्तारण का रिकॉर्ड कहां उपलब्ध है?
भवन स्वामियों को पुराने खसरे की नकल देने तथा अद्यतन अभिलेख उपलब्ध कराने की प्रक्रिया क्या है?
गलत क्षेत्रफल, भवन की श्रेणी, मंजिल या पुराने बकाये के आधार पर जारी बिलों की समीक्षा और सुधार के लिए क्या व्यवस्था है?
9. दस्तावेजी जांच से ही सामने आएगी पूरी तस्वीर
मामले की निष्पक्ष जांच के लिए नगर निगम के मूल अभिलेखों, कंपनी के कार्यादेश, भुगतान विवरण, सर्वे रिपोर्ट, निरीक्षण रिपोर्ट, आकलन सूची, प्रकाशन की प्रतियों और कर निर्धारण संबंधी आदेशों का मिलान आवश्यक है। साथ ही, कुछ प्रभावित भवनों के पुराने खसरे, वर्तमान निर्माण और जारी गृहकर बिलों की तुलनात्मक जांच कराई जानी चाहिए।
यदि जांच में गलत प्रविष्टियां, प्रक्रिया संबंधी कमियां या अनुचित कर निर्धारण सामने आता है, तो नियमानुसार सुधार और जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए। वहीं, नगर निगम प्रशासन को अपना पक्ष रखने और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने का अवसर भी दिया जाना चाहिए।
अब बड़ा सवाल यह है कि जब वर्ष 2023 में जीआईएस सर्वे रिपोर्ट निरस्त किए जाने की खबरें प्रकाशित हुई थीं, तो आज संबंधित भवनों का गृहकर किस प्रमाणित अभिलेख और किस वैधानिक प्रक्रिया के आधार पर निर्धारित किया जा रहा है? नगर आयुक्त की ओर से दस्तावेजों सहित स्पष्ट जवाब सामने आने पर ही जनता की शिकायतों और सर्वे की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन हो सकेगा।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
