नेवादा ब्लाक के इच्छना गांव में 8 दिन में 840 मजदूरों की हाजिरी, भुगतान से पहले उठे सवाल
👉 इच्छना में 8 दिन में 840 मजदूरों की हाजिरी, मनरेगा रिकॉर्ड पर सवाल..
👉 भुगतान अभी बाकी, निर्धारित दर से करीब ₹2.77 लाख की मजदूरी संभावित..
👉 भुगतान से पहले मस्टर रोल, जियो-टैग फोटो और मौके के काम के सत्यापन की मांग..
कौशाम्बी। नेवादा ब्लॉक की ग्राम पंचायत इच्छना में वीबी जी राम जी -विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) (मनरेगा) के रिकॉर्ड में 28 सितंबर से 5 अक्टूबर तक आठ दिनों में 840 मजदूर-दिवस की हाजिरी दर्ज होने का मामला सामने आया है। यानी प्रतिदिन औसतन 105 मजदूरों की उपस्थिति दर्ज की गई।
अभी इन मजदूरों को मजदूरी का भुगतान नहीं हुआ है। निर्धारित दर के आधार पर 840 मजदूर-दिवस की मजदूरी करीब ₹2.77 लाख से ज्यादा हो सकती है। भुगतान से पहले रिकॉर्ड और मौके की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किए जाने की जरूरत है।
सबसे अहम सवाल यह है कि आठ दिनों में कितने कार्यस्थलों पर काम चला और प्रत्येक स्थल पर वास्तव में कितने मजदूर मौजूद रहे। मस्टर रोल में दर्ज हाजिरी का मौके की जियो-टैग तस्वीरों और वास्तविक कार्य से मिलान कराने पर स्थिति साफ हो सकती है।
मस्टर रोल, जियो-टैग फोटो, एमबी, कार्य की प्रगति और मजदूरों की उपस्थिति का सत्यापन कराए बिना भुगतान किया गया तो सवाल और गंभीर हो सकते हैं।
अधिकारियों पर उठे रहे कई सवाल….
इच्छना गांव में 8 दिनों में 840 मजदूर-दिवस की हाजिरी किन कार्यों पर दर्ज हुई और आठ दिनों में प्रतिदिन कितने मजदूर उपस्थित रहे? तथा क्या जियो-टैग फोटो में इतनी संख्या में मजदूर दिखाई दे रहे हैं? यह एक बड़ा सवाल है।
इन कार्यों का एमबी में आठ दिनों के काम की कितनी माप दर्ज है और मजदूरों का भुगतान अभी लंबित क्यों है? तथा
भुगतान से पहले क्या मौके का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा यह भी जांच का मामला है।
क्या मस्टर रोल और कार्यस्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान होगा और सत्यापन में गड़बड़ी मिलने पर जिम्मेदारी किसकी तय होगी तथा “भुगतान से पहले 840 मजदूर-दिवस की हाजिरी का सत्यापन—मौके पर कितने मजदूर थे?” आदि सवाल उठ रहे हैं।
अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415
