पूर्व IAS दिव्या मित्तल कहां से चुनाव लड़ेंगी:मिर्जापुर से ताल ठोकेंगी या राजा भैया के साथ जाएंगी; क्या नई पार्टी बनाकर करेंगी राजनीति

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पूर्व IAS दिव्या मित्तल कहां से चुनाव लड़ेंगी:मिर्जापुर से ताल ठोकेंगी या राजा भैया के साथ जाएंगी; क्या नई पार्टी बनाकर करेंगी राजनीति

पूर्व IAS अधिकारी दिव्या मित्तल राजनीति में कदम रखेंगी। राजा भैया के साथ वायरल तस्वीर और मिर्जापुर में अनुप्रिया पटेल से पुराने विवाद ने सियासी गलियारों में अटकलें तेज कर दी हैं। सपा-कांग्रेस की ओर से उन्हें पार्टी में शामिल होने का ऑफर भी मिल चुका है। इसके बावजूद वो किसी राजनीतिक दल में शामिल नहीं होना चाहतीं। इसके बाद लोगों के जेहन में 3 बड़े सवाल हैं- इनके जवाब सिलसिलेवार जानिए… आगे बढ़ने से पहले दैनिक भास्कर पोल में हिस्सा लेकर राय दें- 1. दिव्या मित्तल कहां से चुनाव लड़ सकती हैं? दिव्या मित्तल के सियासी पारी के 3 विकल्पों की चर्चा हो रही है। पहला- वो मिर्जापुर सदर सीट से बतौर विधायक अपनी सियासी पारी की शुरुआत करें। 2023 में उनके तबादले के बाद मिर्जापुर के लोगों ने उन्हें फूलों से विदाई दी थी। दूसरा- वो चुनार से भी विधानसभा का चुनाव लड़ सकती हैं। भव्य चुनार महोत्सव की यादें आज भी इस क्षेत्र के लोग नहीं भूल पाए हैं। ये सीट कुर्मी और दलित बहुल है। इस सीट पर भाजपा मजबूत मानी जाती है। तीसरा- दिव्या मित्तल खुद विधानसभा चुनाव न लड़कर मिर्जापुर के अपने कुछ समर्थकों को लड़ाएं। 2029 लोकसभा में वह सीधे अनुप्रिया पटेल के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरें और उन्हें चुनौती दें। हालांकि, राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर किसी गैर राजनीतिक व्यक्ति को सियासत में कदम रखना हो, तो उसके लिए यही सही समय है। लोकसभा चुनाव में लंबा वक्त है। तब तक इंतजार करने से अच्छा है कि विधायक के तौर पर अपनी लकीर बड़ी की जाए। मिर्जापुर में दिव्या का अपना जनसंपर्क कितना मजबूत? दिव्या मित्तल के पक्ष में सबसे बड़ा राजनीतिक आधार उनका प्रशासनिक कार्यकाल और जनता से बना सीधा संपर्क माना जा रहा है। 2023 में उनके तबादले के बाद स्थानीय नेताओं और ग्रामीणों ने उनके काम की सार्वजनिक रूप से तारीफ भी की थी। खासतौर पर लहुरियादह में पानी पहुंचाने के काम ने उन्हें ग्रामीण इलाकों में पहचान दी। अब इस्तीफे के बाद उन्होंने लहुरियादह में अपने कार्यकाल के दौरान स्वीकृत किए गए माध्यमिक स्कूल का जिक्र किया। सवाल उठाया कि आखिर अब तक स्कूल क्यों नहीं बना? उनके इस बयान का असर ये हुआ कि आनन-फानन में अधिकारी स्कूल का काम शुरू कराने में जुट गए हैं। यही वजह है कि अब उनके समर्थक तर्क दे रहे हैं कि अगर वह चुनाव लड़ती हैं, तो मिर्जापुर उनका स्वाभाविक राजनीतिक आधार हो सकता है। मिर्जापुर के ग्राम प्रधान संघ में दिव्या मित्तल के काफी समर्थक हैं। कई प्रधान उनसे राखी तक बंधवाते हैं। बिना मिर्जापुर में रहे भी दिव्या मित्तल ने उनके गांव के कई विकास के कार्य अपने प्रशासनिक संपर्कों से कराती रही हैं। चुनाव में प्रधान संघ का समर्थन उनकी बड़ी राजनीतिक पूंजी साबित हो सकती है। 2. क्या अनुप्रिया पटेल के खिलाफ भी खड़ी हो सकती हैं? इन घटनाओं के बाद उनका तबादला हुआ और करीब 10 महीने वेटिंग में रखा गया। स्थानीय लोग अब भी उन्हें ‘डीएम बेटी’ कहते हैं। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि राजनीति में विधानसभा के रास्ते वो अनुप्रिया पटेल को लोकसभा चुनाव में टक्कर दे सकती हैं। 3. राजा भैया के साथ जाने की कितनी संभावना जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के नेता डॉ. बृजेश सिंह राजावत ने 29 सितंबर को सोशल मीडिया में एक तस्वीर शेयर की। कैप्शन में लिखा- IAS का अनुभव + राजा भैया की जमीनी पकड़ = क्या नई दिशा? यह पोस्ट वायरल हो गया। राजा भैया की पार्टी क्षेत्रीय ताकत रखती है। कयास लगने लगे कि इससे दिव्या को संगठनात्मक मजबूती मिल सकती है। लेकिन, दिव्या ने बार-बार साफ किया है कि किसी दल में शामिल नहीं होंगी। फिलहाल ये सिर्फ अटकलें हैं। दिव्या मित्तल के लिए भाजपा, सपा या कांग्रेस विकल्प क्यों नहीं दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद एक चर्चा ये चली कि उन्हें भाजपा से ही अंदरुनी तौर पर मदद मिल रही है। लेकिन, दिव्या मित्तल खुद ऐसी किसी संभावना को खारिज कर चुकी हैं। इस्तीफे के बाद उन्होंने प्रदेश की खस्ताहाल स्कूल और दूसरी समस्याओं को उठाकर सीधे प्रदेश सरकार को ही कटघरे में खड़ा किया है। भाजपा नेता प्रशांत उमराव ने सोशल मीडिया पर उनके इस्तीफे को राहुल गांधी से कथित मुलाकात से जोड़ते हुए सवाल उठाए थे। दिव्या ने बाद में इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ऐसे आरोपों का उद्देश्य एक महिला को राजनीति में आने से डराना है। अब बात सपा और कांग्रेस में शामिल होने की संभावनाओं पर करते हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने 30 सितंबर को मीडिया से बात करते हुए दिव्या मित्तल को खुला ऑफर दिया। बोले- पूर्व IAS को अब हरा और लाल रंग का गमछा डाल लेना चाहिए। दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सबसे पहले इसे सरकार की कार्यप्रणाली से जोड़ते हुए बयान दिया था। कहा था कि भाजपा सरकार में ईमानदार अधिकारी परेशान हैं। भ्रष्टाचार के कारण अधिकारी काम नहीं कर पा रहे हैं। इसी तरह कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय राय से भी पूछा गया था कि अगर दिव्या चुनाव लड़ती हैं, तो क्या कांग्रेस उन्हें टिकट दे सकती है। अजय राय ने कहा था कि जो व्यक्ति समाज के लिए काम करना चाहता है और चुनाव लड़ना चाहेगा, पार्टी उस पर विचार कर सकती है। हालांकि, दिव्या ने 29 सितंबर को अपना स्टैंड साफ कर दिया। कहा- जिन झंडों के नीचे 80 साल में हिसाब नहीं मिला, उनके नीचे खड़े होकर हिसाब नहीं मांग सकती। वे किसी एक दल में शामिल होने के बजाय सिस्टम बदलने की बात कर रही हैं। यह रुख भाजपा, सपा और कांग्रेस से अलग एक स्वतंत्र राजनीतिक प्रयोग की ओर इशारा करता है। इस्तीफे के बाद दिव्या के दिए बयान दिव्या मित्तल ने यूपी को ही राजनीति के लिए क्यों चुना आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु से पढ़ाई करने वाली दिव्या मित्तल संत कबीरनगर, मिर्जापुर और देवरिया जैसे जिलों की जिलाधिकारी रह चुकी हैं। वह मूलत: हरियाणा की रहने वाली हैं। मतलब, उनके पास यूपी के अलावा हरियाणा भी राजनीति के लिए एक विकल्प था। दिव्या मित्तल को करीब से जानने वाले कहते हैं कि बतौर प्रशासनिक अफसर उनका कार्यकाल यूपी में ही रहा। यहीं पर उन्होंने वो रिश्ते बनाए, जो इस्तीफा देने के बाद भी मजबूत बने हैं। दिव्या मित्तल के इस्तीफे के बाद अब तक के बयानों को 3 हिस्सों में देखा जा सकता है। ‘चुनावी माहौल में अकेले कितनी दूर तक जा पाएंगी, ये देखना होगा’ वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं- उनके बयान सिस्टम-विरोधी और जन-केंद्रित हैं। वे खुद को पारंपरिक नेता से अलग ‘आवाज’ के रूप में पेश कर रही हैं। इसमें भावनात्मक अपील तो है, लेकिन संगठनात्मक कमजोरी भी साफ दिखती है। निर्दलीय राह चुनकर उन्होंने बड़े दलों से दूरी बना ली है। यह उन्हें स्वतंत्र छवि तो देगी, लेकिन आज के चुनावी माहौल में अकेले कितनी दूर तक जा पाएंगी, यह देखना होगा। ————————— यह खबर भी पढ़ें- IAS की नौकरी छोड़कर दिव्या मित्तल क्या करेंगी, जॉब बिजनेस या कोचिंग पढ़ाएंगी? यूपी की पूर्व IAS अफसर दिव्या मित्तल अब अपने जीवन की नई पारी शुरू करने जा रही हैं। 30 अगस्त को दिया गया उनका इस्तीफा सरकार ने 14 सितंबर को स्वीकार कर लिया। अपने काम के जरिए पहचान बनाने वाली दिव्या मित्तल अब आगे क्या करेंगी? पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

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