भाजपा को ‘सरप्राइज’ देने की तैयारी में अखिलेश:10 विधायक तोड़कर राज्यसभा में तीसरी सीट जीतने की तैयारी…?; क्या है पूरा प्लान
यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव है। इसके प्रत्याशियों को लेकर सोमवार (28 सितंबर) को प्रेस कॉन्फ्रेंस में जब अखिलेश यादव से सवाल पूछा गया तो वे बोले, ‘सरप्राइज के लिए तैयार रहिए…।’ आज यूपी एक्सप्लेनर में अखिलेश के इसी ‘सरप्राइज प्लान’ को डिकोड करेंगे… सवाल-1: अखिलेश भाजपा या उसके सहयोगी दलों के विधायक कैसे तोड़ेंगे? जवाब: यह समझने के लिए विधानसभा में सपा, भाजपा और उसके सहयोगी दलों की स्थिति समझनी पड़ेगी… इस भास्कर पोल में हिस्सा लेकर अपनी राय दीजिए- सवाल-2: अखिलेश अपना तीसरा प्रत्याशी जिता ले गए तो क्या होगा? जवाब: इसके 3 बड़े राजनीतिक मायने होंगे… (A) भाजपा को बड़ा झटका लगेगा। चुनाव से पहले सपा कार्यकर्ताओं में नया जोश भरेगा। भाजपा के खिलाफ एक बहुत बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त मिलेगी। (B) राजनीति के मैदान में अखिलेश यादव एक बेहद मजबूत और चतुर रणनीतिकार के रूप में उभरेंगे, जो कम संसाधनों में भी बाजी पलटना जानते हैं। विपक्षी INDIA गठबंधन में अखिलेश की ताकत बढ़ेगी। सीट बंटवारे और बड़े फैसलों में उनका दबदबा बढ़ेगा। (C) अगर तीसरा प्रत्याशी किसी खास जाति या वर्ग (जैसे दलित या अति पिछड़ा) से हुआ, तो अखिलेश का ‘PDA’ फॉर्मूला जमीन पर और ज्यादा मजबूत साबित होगा। सवाल-3: क्या क्रॉस वोटिंग करने वाले विधायकों की सदस्यता नहीं जाएगी? जवाब: नहीं… राज्यसभा चुनाव में पार्टियां ‘व्हिप’ (आदेश) जारी तो करती हैं, लेकिन यह विधायकों को किसी खास उम्मीदवार को ही वोट देने के लिए मजबूर नहीं कर सकता। विधायक अपनी मर्जी यानी ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर किसी भी पार्टी के प्रत्याशी को वोट दे सकते हैं। 2024 में सपा के 7 विधायकों ने भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ को वोट दिया था। इससे सपा के आलोक रंजन हार गए थे। राज्यसभा चुनाव में दल-बदल विरोधी कानून लागू नहीं होता। सामान्यतः सदन में बजट या किसी बिल पर वोटिंग के दौरान अगर कोई विधायक पार्टी लाइन से हटकर वोट करते है, तो उसकी सदस्यता खत्म हो जाती है। लेकिन, राज्यसभा चुनाव सदन की विधायी कार्यवाही नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया हैं। इसलिए, क्रॉस-वोटिंग करने पर विधायकी नहीं जाती। इसे ऐसे समझ सकते हैं। वोटों की खरीद-फरोख्त रोकने के लिए राज्यसभा चुनाव में ओपन बैलेट सिस्टम लागू है। इसके तहत विधायक को अपने मतपत्र पर टिक लगाने के बाद अपनी पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंट को दिखाना होता है। इससे पार्टी को तुरंत पता चल जाता है कि किस विधायक ने क्रॉस-वोटिंग की। अगर कोई विधायक मतपत्र दिखाने से मना करता है या किसी अन्य दल के एजेंट को दिखाता है, तो उसका वोट अमान्य हो जाता है। भले ही विधानसभा से विधायक की सदस्यता रद्द न हो, लेकिन पार्टी विधायक पर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर सकती है। उसे कारण बताओ नोटिस जारी किया जा सकता है। साथ ही पार्टी से निकाला भी जा सकता है। हालांकि, पार्टी से निकाले जाने के बाद भी उनकी विधायकी नहीं जाती। ऐसे सदस्य असंबद्ध विधायक कहलाते हैं। इस समय कैबिनेट मंत्री मनोज पांडेय, अभय सिंह और राकेश सिंह असंबद्ध विधायक हैं। ————————————- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… सपा-कांग्रेस में पेंच कहां फंस रहा, गठबंधन फाइनल तो सीट बंटवारा क्यों नहीं; ‘सब ठीक है’ कहकर अखिलेश क्या छुपा रहे करीब एक हफ्ते तक सपा और कांग्रेस नेताओं में गठबंधन को लेकर तीखी बयानबाजी होती रही। कयास लगाए जाने लगे कि गठबंधन टूटने वाला है। फिर रविवार (27 सितंबर) को सपा प्रमुख अखिलेश यादव का बयान आया। बोले- हम ऊपर-ऊपर से लड़ रहे हैं, अंदर से एक हैं। ये हमारी रणनीति का हिस्सा है। अब सवाल उठ रहे हैं कि जब गठबंधन तय है, तो इस बयानबाजी से क्या हासिल होगा? सीटों की बात फाइनल क्यों नहीं हो पा रही? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…
