फाइल गायब होने के मामले में पेशकार से पूछताछ, SDM आवास पर मिली फाइल , आकाश सिंह के समय में फैले भ्रष्टाचार की अब जांच की उठी मांग
👉 रात में पेशकार कमलेश बाबू को थाने में बैठाने का आरोप, बाद में पश्चिम शरीरा की फाइल SDM के न्यायिक आवास पर मिलने से उठे सवाल..
👉 पूर्व SDM आकाश सिंह के कार्यकाल की फाइलों पर उठे गंभीर सवाल, धारा 76-67 की जांच की मांग..
👉 पेशकार से रात में पूछताछ, जिस फाइल को लेकर हंगामा वह SDM के न्यायिक आवास में मिली—उठे सवाल..
👉 पट्टा, सरकारी जमीन, धान खरीद से पटाखा प्रकरण तक सवालों के घेरे में पूर्व SDM का कार्यकाल
कौशांबी। मंझनपुर तहसील में जमीन से जुड़ी एक फाइल के गायब होने के मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि फाइल गायब होने के मामले में एसडीएम के आदेश पर तहसील के पेशकार कमलेश बाबू को रात में पुलिस द्वारा उठाकर मंझनपुर थाने में बैठाया गया और उनसे पूछताछ की गई। बुधवार को दिन में भी उनसे पूछताछ जारी रहने की बात सामने आई।
मामला पश्चिम शरीरा क्षेत्र की जमीन से संबंधित एक फाइल का बताया जा रहा है। सबसे अहम बात यह सामने आई कि जिस फाइल के गायब होने को लेकर पेशकार से पूछताछ की जा रही थी, वही फाइल बाद में एसडीएम के न्यायिक आवास पर मिलने की बात सामने आई।
फाइल के एसडीएम आवास पर मिलने के बाद अब कई सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि फाइल 3 माह से गायब थी और वास्तव में न्यायिक आवास में मौजूद थी तो वह वहां कैसे पहुंची? फाइल किसके कब्जे में थी? उसे कार्यालय के रिकॉर्ड से बाहर ले जाने की अनुमति किसने दी? और फाइल गायब होने की सूचना के आधार पर पेशकार को रात में थाने में बैठाकर पूछताछ क्यों की गई?
फाइल आवास पर मिली तो पेशकार पर कार्रवाई क्यों?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब संबंधित फाइल बाद में एसडीएम के न्यायिक आवास पर मिली, तो फाइल गायब होने के लिए पेशकार को जिम्मेदार मानकर रात में थाने में बैठाने की जरूरत क्यों पड़ी? क्या इस मामले में पहले कार्यालय के रिकॉर्ड, मूवमेंट रजिस्टर और फाइल की आवाजाही की जांच की गई थी?
यह मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि पश्चिम शरीरा की जमीन ग्राम सभा बनाम अंसार अली की फाइल मामले मे अंसार का नाम निरस्त करके ग्राम सभा में चढ़ाने से जुड़ी उक्त फाइल को लेकर पहले से ही तरह-तरह की चर्चाएं सामने आ रही हैं। ऐसे में फाइल के गायब होने और फिर एसडीएम आवास पर मिलने की पूरी घटना की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच जरूरी हो गई है।
जांच का दायरा बढ़ाने की मांग….विवादों में रहा हमेशा एसडीएम आकाश सिंह का कारनामा …
मंझनपुर तहसील में पूर्व एसडीएम आकाश सिंह के कार्यकाल की धारा 76 और धारा 67 की फाइलों, आवासीय पट्टों को भूमिधरी किए जाने तथा सरकारी एवं भूदान की जमीनों से जुड़े मामलों की जांच की मांग के बीच यह नया मामला सामने आया है। बता दे कि आकाश सिंह 7/07/2023 से 24/02/2025 तक रहे फिर चायल में ट्रांसफर हो गया । फिर 11/04/26 से 15/07/26 तक फिर मंझनपुर में रहे हैं। 25 फरवरी 2025 से 10 अप्रैल 2026 तक चायल में तैनात रहे है । चायल में ही जहां मनौरी में इसी बीच अवैध बारूद का भंडारण पटाखा गोदाम में हुआ है। आकाश सिंह पर कौशाम्बी में दोनों जगह की तैनाती के दौरान बड़े भ्रष्टाचार के मामले चर्चित रहे हैं। धारा 76 और धारा 67 के मामले में भी वसूली कर खेल करने का मामला सुर्खियों में रहा है। इनके द्वारा धान खरीद के मामले में किसानों की खतौनी सत्यापन में भी भ्रष्टाचार व्यापक अस्तर पर हुआ है जो मोटी रकम लेकर आँख बंदकर किया गया है यदि जांच हुई तो एसडीएम आकाश सिंह का फंसना तय है। इसी तरह भैला मकदूमपुर में विमला देवी पत्नी रामबहोरी (विधवा) की जमीन पर मोटी रकम लेकर कब्जा कराकर कर उसके लड़के को थाना करारी में बुलाकर बंद करवाया और फिर चालान आने पर उसे जेल जेल भेज दिया गया जो मामला चर्चित रहा है। इसी तरह एसडीएम ने दीवार कोतारी में एक मामला लेनदेन न हो पाने पर उसके खिलाफ कार्यवाही कर दी है । मंझनपुर थाना के सामने पूर्व चेयरमैन से उसकी जमीन मामले में मोटी रकम डिमांड की गई लेकिन मांग पूरी नहीं हुई तो उनके खिलाफ भी कार्यवाही हुई। उसी बीच एसडीएम आकाश सिंह की शादी हुई जिसमें करोड़ों रुपए वसूली करने का मामला चर्चित रहा है। यदि इनकी आय से अधिक संपत्ति और बेनामी संपत्ति की जांच हुई फंसना तय है। जिस प्रकार से कौशांबी में दोनों तहसील में एसडीएम आकाश सिंह ने लूट मचाई है वह सुर्खियों।ए हमेश रहा है और कई बार इनके खिलाफ वकीलों ने एसडीएम के खिलाफ हड़ताल कर धरना प्रदर्शन भी किया है। इनके कारनामों से जहां जनता परेशान रही वही लोगों को न्याय नहीं मिला है,इनकी तानाशाही हमेशा चर्चा में रही है। फिलहाल इनका कौशांबी से ट्रांसफर हो गया और वर्तमान में मोहनलाल गंज लखनऊ में तैनात है ।

अब सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या फाइल की आवाजाही और उसे एसडीएम आवास तक ले जाने की पूरी प्रक्रिया की जांच होगी या मामले को केवल पेशकार से पूछताछ तक सीमित कर दिया जाएगा?
फाइल यदि एसडीएम के न्यायिक आवास से बरामद हुई है तो इसकी पूरी स्थिति, फाइल की नोटिंग, मूवमेंट रजिस्टर, प्राप्ति एवं प्रेषण अभिलेख तथा संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों की भूमिका की जांच कराए जाने से ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी।
फाइल कहां से गायब हुई, किसके पास रही और एसडीएम आवास तक कैसे पहुंची—इन सवालों के जवाब सामने आना जरूरी है। पेशकार के साथ कथित कार्रवाई और फाइल के आवास से मिलने की घटना ने तहसील की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
चर्चाओं में हैं….
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अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
