क्या आकाश के ‘अंकल’ बोलने से भाजपा को फायदा होगा:यूपी सरकार पर ज्यादा आक्रामक रहे, फिर भी दांव उल्टा क्यों पड़ रहा
मायावती के भतीजे आकाश आनंद का अखिलेश यादव और राहुल गांधी को ‘अंकल’ कहने वाला बयान चर्चा में है। 10 अगस्त को हाथरस में उनकी वो आक्रामक छवि एक बार फिर नजर आई, जो 2024 लोकसभा चुनाव में दिखी थी। इस दौरान आकाश केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार पर सबसे ज्यादा हमलावर रहे। फिर भी कहा जा रहा है कि उनके तेवरों से बसपा को कम और भाजपा को ज्यादा फायदा हो सकता है। आज यूपी एक्सप्लेनर में जानेंगे कि आकाश के भाजपा पर आक्रामक होने के बावजूद भाजपा को ही फायदा कैसे हो सकता है… सवाल-1: आकाश आनंद ने अपने भाषण में क्या कहा? जवाब: सवाल-2: आकाश सबसे ज्यादा भाजपा पर आक्रामक, तो उसको फायदा कैसे? जवाब: विश्लेषकों का मानना है कि राजनीति में कई बार डायरेक्ट अटैक और उसके परिणाम बिल्कुल उलट होते हैं। आकाश के तीखे हमले सपा-कांग्रेस के वोटबैंक के बिखराव करने वाले साबित हो सकते हैं। इसे 4 पॉइंट में विस्तार से समझ सकते हैं… i) सत्ता विरोधी वोटों का बंटवारा समीकरण: यूपी में जो वोटर भाजपा सरकार, पेपर लीक या बेरोजगारी से नाराज हैं, वो निश्चित रूप से भाजपा के खिलाफ वोट देंगे। नुकसान किसका: वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल के मुताबिक अगर बसपा चुनावी मैदान में सुस्त रहती है, तो भाजपा से नाराज पूरा वोट सीधे तौर पर सपा-कांग्रेस गठबंधन के पाले में चला जाता। भाजपा को कैसे फायदा: जब आकाश आनंद भाजपा के खिलाफ बेहद आक्रामक होकर युवाओं और दलितों की आवाज उठा रहे हैं, तो भाजपा से नाराज वोटबैंक का एक बड़ा हिस्सा बसपा की तरफ भी खिसकेगा। इससे भाजपा विरोधी वोटों में बिखराव होगा। सीधा फायदा भाजपा को अपनी सीटें बचाने में मिलेगा। ii) सपा के PDA फॉर्मूले में सेंधमारी समीकरण: पिछले चुनावों में सपा ने ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देकर गैर-जाटव दलितों और मुस्लिम वोटर्स का बड़ा हिस्सा अपनी ओर खींचा था। आकाश का हमला: आकाश ने हाथरस रैली में अखिलेश यादव के इसी PDA नैरेटिव पर तीखा हमला किया। उन्होंने याद दिलाया कि दलितों की असली हितैषी सिर्फ मायावती और बसपा है। भाजपा को फायदा कैसे: वरिष्ठ पत्रकार सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि अगर आकाश दलित वोटरों (विशेषकर युवा) को यह समझाने में सफल रहे कि सपा उनका भला नहीं कर सकती। तो दलित वोटर फिर एकजुट होकर बसपा की तरफ लौटेंगे। इससे बसपा की सीट कितनी बढ़ेंगी, यह कहना मुश्किल है। लेकिन, सपा-कांग्रेस को जरूर नुकसान होगा। iii) बसपा मजबूत होने से भाजपा कम मार्जिन वाली सीटें बचा लेगी iv) राहुल-अखिलेश की ब्रांडिंग पर चोट सवाल-3: बसपा क्या करे कि भाजपा के बजाय उसे फायदा हो? जवाब: इसके लिए बसपा को 2027 यूपी विधानसभा चुनाव तक अपनी स्थिति ‘वोट काटने वाली पार्टी’ से बदलकर ‘सरकार बनाने वाली पार्टी’ की बनानी होगी। इसे 5 पॉइंट्स में समझा जा सकता है… i) वोटर को यकीन हो कि पार्टी जीतने के लिए लड़ रही अभी क्या माहौल है? रतनमणि लाल बताते हैं- अभी नैरेटिव है कि बसपा सिर्फ सपा का खेल बिगाड़ने या भाजपा की मदद करने के लिए चुनाव लड़ रही है। जब जनता को लगता है कि कोई पार्टी रेस में तीसरे नंबर पर है, तो वह अपना वोट ‘खराब’ नहीं करना चाहती। 2027 में क्या करना होगा? वोटरों को यकीन दिलाना होगा कि वो सपा या भाजपा को हराने नहीं, बल्कि बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना चाहती है। जब लोगों को लगेगा कि बसपा वाकई नंबर-1 बनने की रेस में है, तो भाजपा विरोधी वोट सपा-कांग्रेस के साथ बंटने के बजाय बसपा की तरफ आएगा। ii) युवाओं को नौकरी की गारंटी अभी क्या माहौल है? आकाश आनंद ने अखिलेश यादव और राहुल गांधी को अंकल बोलकर युवाओं का ध्यान तो खींचा है, लेकिन इसे वोट में बदलने के लिए ठोस वादों और काम की जरूरत होगी। 2027 में क्या करना होगा? युवा वोटर इस समय पेपर लीक, बेरोजगारी और समय पर भर्ती न होने से परेशान है। बसपा को युवाओं के बीच जाकर एक रोजगार नीति पेश करनी होगी। पार्टी को भरोसा देना होगा कि खाली पड़े सरकारी पद सत्ता में आने पर तुरंत भरे जाएंगे। जब युवा को नौकरी की गारंटी दिखेगी, तो वह जाति-धर्म छोड़कर बसपा के साथ खड़ा होगा। iii) आकाश आनंद को फ्रंटफुट पर रखना होगा अभी क्या माहौल है? पिछले घटनाक्रम को देखते हुए लोगों में चर्चा है कि आकाश आज तो बहुत आक्रामक बोल रहे हैं। लेकिन, कल अगर मायावती ने उन्हें फिर पीछे कर लिया या शांत रहने को कहा तो क्या होगा? 2027 में क्या करना होगा? सुरेश बहादुर सिंह कहते हैं कि मायावती को खुद मंच से ऐलान करना होगा कि 2027 चुनाव की पूरी कमान आकाश आनंद के हाथ में है और वो पार्टी का भविष्य हैं। जब जनता और कार्यकर्ताओं को दिखेगा कि आकाश के पास फैसले लेने की पूरी ताकत है, तो भरोसा कई गुना बढ़ जाएगा। एक मजबूत और निडर युवा चेहरे के पीछे वोटर जल्दी एकजुट होता है। iv) सिर्फ एक जाति नहीं, सबको साथ लेना होगा अभी क्या माहौल है? पिछले कुछ सालों में बसपा की स्थिति बेहद कमजोर हुई है। 2007 में 51% वोट पाने वाली पार्टी 2024 में 9% पर आ गई थी। पारंपरिक वोट बैंक भी चंद्रशेखर की तरफ जा रहा है। गैर-जाटव दलित और कुछ अन्य वर्गों का वोटर भाजपा-सपा की तरफ चला गया है। 2027 में क्या करना होगा? वरिष्ठ पत्रकार रतनमणि लाल कहते हैं- 2007 में दलित, ब्राह्मण, पिछड़े और अल्पसंख्यकों के एक साथ आने से बसपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी थी। पार्टी को एक बार फिर उसी तरह के समीकरण बनाने होंगे। हर वर्ग के नेताओं को मंच पर जगह देनी होगी। टिकट बंटवारे से भी दिखाना होगा कि बसपा एक वर्ग की नहीं, बल्कि सबकी पार्टी है। v) छोटे दलों से गठबंधन अभी क्या माहौल है? अकेले चुनाव लड़ने पर बसपा को ‘वोटकटवा’ कहा जाता है। क्षेत्रीय और मजबूत छोटे दलों के साथ आने से संदेश जाएगा कि यह गठबंधन सरकार बनाने या किंगमेकर बनने की स्थिति में है। 2027 में क्या करना होगा? बसपा अगर पल्लवी पटेल, असदुद्दीन ओवैसी और महान दल जैसे छोटे दलों से गठबंधन करती है, तो जातीय और धार्मिक समीकरण का सटीक जोड़ मिलेगा। यूपी की दर्जनों सीटों पर मुस्लिम और दलित वोट जीत-हार तय करते हैं। ओवैसी और बसपा का साथ आना सपा के कोर मुस्लिम वोट बैंक को पूरी तरह बिखेर देगा, लेकिन ये तभी होगा जब बसपा सरकार बनाती दिखेगी। वहीं, पल्लवी पटेल (कुर्मी) और महान दल (मौर्य) गैर-यादव ओबीसी वोटों पर प्रभाव रखते हैं। इनके साथ आने से सपा और भाजपा, दोनों के पारंपरिक वोटबैंक में बड़ी सेंध लगेगी। इससे एंटी-भाजपा और फ्लोटिंग वोटर बसपा पर भरोसा जता सकता है। कुल मिलाकर अगर बसपा 2027 का चुनाव सिर्फ आक्रामक प्रचार के दम पर लड़ेगी, तो विपक्ष का वोट बंटेगा और भाजपा बिना कुछ किए जीत जाएगी। वहीं, अगर बसपा खुद को भाजपा और सपा-कांग्रेस गठबंधन का विकल्प साबित कर दे, तो जो वोट आज सपा के पास जा रहा है, वो टूटकर बसपा की तरफ आ सकता है। ————————————– ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… क्या यूपी में विधानसभा से पहले पंचायत चुनाव होंगे, हाईकोर्ट बोला-सरकार 6 महीने में इलेक्शन कराना जरूरी ‘राज्य सरकार 6 महीने में पंचायत चुनाव कराने के लिए बाध्य है। यह अवधि नवंबर, 2026 में खत्म हो रही है।’ इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने 5 अगस्त को यह बात कही। इस टिप्पणी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या सरकार ने जानबूझकर पंचायत चुनाव समय पर नहीं कराए? क्या पंचायत चुनाव, यूपी विधानसभा चुनाव से पहले हो सकते हैं? जानिए यूपी एक्सप्लेनर में…
