23 दिन बाद अनशन खत्म करने को तैयार सोनम वांगचुक, सरकार और सांसदों के सामने रखीं तीन शर्तें
नई दिल्ली। सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 23 दिनों से जारी अपने अनिश्चितकालीन अनशन को समाप्त करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा है कि यदि सरकार शिक्षा व्यवस्था में सामने आई कथित विफलताओं, विशेषकर पेपर लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे या सांसद इस मुद्दे को संसद में उठाने का लिखित आश्वासन दें, तो वह अपना अनशन समाप्त करने को तैयार हैं।
सफदरजंग अस्पताल से जारी एक हस्तलिखित नोट में वांगचुक ने दावा किया कि उन्हें “गैर-कानूनी हिरासत” में रखा गया है और उनके आने-जाने तथा संवाद की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाया गया है। हालांकि, उनके इन आरोपों पर संबंधित अधिकारियों की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
वांगचुक ने रखीं तीन प्रमुख शर्तें
सोनम वांगचुक ने अनशन समाप्त करने के लिए तीन प्रमुख शर्तें रखी हैं—
- सरकार शिक्षा व्यवस्था में कथित विफलताओं और पेपर लीक जैसे मामलों की जिम्मेदारी स्वीकार करे।
- सांसद और राजनीतिक दल संसद में इस मुद्दे को गंभीरता से उठाने का लिखित आश्वासन दें।
- आवश्यकता पड़ने पर जनप्रतिनिधि अस्पताल पहुंचकर लिखित भरोसा दें।
‘चलो संसद’ मार्च को लेकर बढ़ी हलचल
वांगचुक के समर्थन में प्रस्तावित “चलो संसद” मार्च को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में सुधार और पेपर लीक जैसे मामलों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संसद तक मार्च निकालने की अनुमति नहीं दी गई है।
फिलहाल सभी की नजर सरकार और जनप्रतिनिधियों की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी है। यदि वांगचुक की शर्तों पर सकारात्मक पहल होती है, तो 23 दिनों से जारी उनका अनिश्चितकालीन अनशन समाप्त हो सकता है। दूसरी ओर, यदि कोई समाधान नहीं निकलता, तो आंदोलन आगे और तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
