कौशांबी : पिपरहटा प्राथमिक विद्यालय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल, देर से आने, एमडीएम और फर्जी हाजिरी के आरोप

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कौशांबी। नेवादा ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय पिपरहटा की कार्यप्रणाली को लेकर ग्रामीणों और अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। विद्यालय के संचालन, छात्रों की उपस्थिति, मिड-डे मील (एमडीएम) और शिक्षकों की उपस्थिति को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ग्रामीणों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों का आरोप है कि विद्यालय का निर्धारित समय सुबह 7:30 बजे से है, लेकिन प्रधानाध्यापक अक्सर तय समय से काफी देर बाद विद्यालय पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, रविवार 13 जुलाई को भी प्रधानाध्यापक बृजेंद्र राय करीब सुबह 9:15 बजे विद्यालय पहुंचे। आरोप है कि विद्यालय खुलने के बाद मुख्य गेट बंद कर दिया जाता है, जिससे नामांकन, प्रमाण पत्र या अन्य कार्य से आने वाले अभिभावकों को बाहर खड़े होकर अपनी बात रखनी पड़ती है।

अभिभावकों का कहना है कि विद्यालय में कुल 68 छात्र पंजीकृत हैं, लेकिन अधिकांश दिनों में वास्तविक उपस्थिति पंजीकृत संख्या के अनुरूप नहीं दिखाई देती। इसके बावजूद मिड-डे मील के संचालन और अभिलेखों में अनियमितता की आशंका जताई जा रही है। ग्रामीणों ने एमडीएम वितरण और छात्र उपस्थिति रजिस्टर की जांच कराने की मांग की है।

स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि कुछ शिक्षक नियमित रूप से विद्यालय नहीं आते, फिर भी उनकी उपस्थिति रजिस्टर में हाजिरी दर्ज किए जाने का आरोप लगाया जा रहा है। यदि जांच में यह आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सरकारी अभिलेखों में गंभीर अनियमितता का मामला माना जाएगा।

ग्रामीणों का कहना है कि विद्यालय में पांच शिक्षक तैनात होने के बावजूद शिक्षा का स्तर और छात्र संख्या संतोषजनक नहीं है। उनका आरोप है कि विद्यालय की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता की कमी है, जिससे बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है।

ग्रामीणों और अभिभावकों ने बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) एवं अन्य संबंधित अधिकारियों से विद्यालय का औचक निरीक्षण कराने, छात्रों की वास्तविक उपस्थिति, शिक्षकों की हाजिरी, मिड-डे मील वितरण और विद्यालय संचालन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते मामले की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो वे उच्च अधिकारियों से शिकायत करने के साथ-साथ जनआंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। हालांकि, पूरे मामले की वास्तविक स्थिति शिक्षा विभाग का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

— अमरनाथ झा, पत्रकार

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