आज़ादी के 78 साल बाद भी अंधेरे में आदिवासी गांव, बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित कोल्हुवा माफी

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चित्रकूट में करोड़ों की विकास परियोजनाओं के बीच आदिवासी गांव ने उठाए उपेक्षा के सवाल

चित्रकूट। एक ओर सरकार गांव-गांव तक विकास पहुंचाने और हर घर बिजली उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर चित्रकूट जिले का एक आदिवासी गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित होने का दावा कर रहा है। कर्वी तहसील क्षेत्र की खमरिया ग्राम पंचायत स्थित कोल्हुवा माफी गांव के ग्रामीणों ने बिजली, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की कमी को लेकर अपनी समस्याएं सामने रखीं।

ग्रामीणों के अनुसार, आज़ादी के 78 वर्ष बीत जाने के बाद भी गांव में बिजली की सुविधा उपलब्ध नहीं हो सकी है। गांव में सैकड़ों परिवार निवास करते हैं और बड़ी संख्या में मतदाता भी हैं, इसके बावजूद लोगों को अंधेरे में जीवन यापन करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली की समस्या के साथ-साथ शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है। गांव में मौजूद प्राथमिक विद्यालय में शिक्षकों के नियमित रूप से न आने का आरोप लगाया गया है, जिसके कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में लोगों को इलाज के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों में जाना पड़ता है।

चुनाव के समय मिलते हैं आश्वासन, बाद में नहीं होती सुनवाई: ग्रामीण

ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं और वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद गांव की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया जाता।

रफ्तार मीडिया की टीम जब गांव पहुंची तो ग्रामीणों ने अपनी परेशानियां साझा करते हुए प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से जल्द से जल्द बिजली, बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

आदिवासी परिवारों की आवाज उठाने की कही बात

इस दौरान बजरंग सेवा की राष्ट्रीय प्रभारी अर्चना नीतिन उपाध्याय ने कहा कि वह गांव के आदिवासी परिवारों, महिलाओं और बच्चों के अधिकारों एवं विकास के लिए आवाज उठाएंगी। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर इस मुद्दे को लखनऊ तक पहुंचाया जाएगा और आंदोलन भी किया जाएगा।

एक तरफ चित्रकूट में 951 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं की सौगात दी जा रही है, वहीं कोल्हुवा माफी जैसे गांवों की स्थिति विकास व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है।

अब देखना होगा कि जिला प्रशासन, क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार अधिकारी इस आदिवासी गांव की समस्याओं के समाधान के लिए क्या कदम उठाते हैं।

अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415

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