कौशांबी। जनपद के मंझनपुर तहसील क्षेत्र में करोड़ों रुपये मूल्य की शत्रु संपत्तियों से जुड़े कथित फर्जीवाड़े का मामला एक बार फिर चर्चा में है। आरोप है कि शत्रु संपत्तियों की जमीनों पर फर्जी दस्तावेज तैयार कर अवैध तरीके से दाखिल-खारिज, रजिस्ट्री और निर्माण कार्य कराए गए हैं। वहीं भरवारी, खल्लाबाद, कोखराज और चायल के चिल्ला शहबाजी सहित अन्य क्षेत्रों में भी शत्रु संपत्तियों पर अवैध कब्जों के आरोप लगाए जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, मंझनपुर तहसील की आराजी संख्या 1914, 1430/1, 1431, 1432 एवं 1988 समेत कुल 88 गाटा शत्रु संपत्तियों में कथित रूप से फर्जी वसीयत तैयार कर दाखिल-खारिज कराया गया और बाद में उनकी रजिस्ट्री कर दी गई। इसके बाद संबंधित भूमि पर निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया गया।
सूत्रों के मुताबिक, प्रशासन ने जांच के दौरान करीब 150 फर्जी रजिस्ट्रियां निरस्त की हैं और इस मामले में तीन आरोपियों को जेल भी भेजा जा चुका है। हालांकि आरोप है कि इस पूरे प्रकरण से जुड़े अन्य कथित दोषियों और प्रभावशाली खरीदारों के खिलाफ अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
मामले को लेकर राजस्व विभाग, तहसील प्रशासन और रजिस्ट्री विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठ रहे हैं। वहीं तहसील के एक कर्मचारी ‘रत्तू’ पर भू-माफियाओं को संरक्षण देने के आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि संबंधित विभागों द्वारा नहीं की गई है।
स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई तथा शत्रु संपत्तियों से अवैध कब्जे हटाने की मांग की है। उल्लेखनीय है कि यह मामला पहले भी कई बार मीडिया की सुर्खियां बन चुका है।
नोट: इस समाचार में उल्लिखित कुछ आरोप शिकायतकर्ताओं एवं स्थानीय सूत्रों के दावों पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि अथवा न्यायिक सत्यापन होना शेष है। संबंधित पक्ष का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।