मुंबई में आरोपी, कौशांबी में परिवार हिरासत में ,पश्चिम शरीरा पुलिस की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल
👉 17 मई से कौशांबी पुलिस पर परिवार को थाने में बैठाने के आरोप,2 दिन पहले किया गया है आईजीआरएस…
👉 पश्चिम शरीरा पुलिस की कार्रवाई पर उठे बड़े सवाल।
👉एसपी सत्यनारायण प्रजापत बोले– शिकायत मिली तो होगी जांच।
👉 डीजीपी के गिरफ्तारी मेमो वाले आदेश के बीच बढ़ा विवाद।
कौशांबी। पश्चिम शरीरा थाना पुलिस की कार्रवाई एक बार फिर विवादों में आ गई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो मामले में नामजद युवक बोधी सरोज के मुंबई में होने की बात सामने आने के बावजूद पुलिस द्वारा उसकी पत्नी, भाई और बुजुर्ग पिता को घंटों नहीं बल्कि कई दिनों तक थाने में बैठाए जाने के आरोप लग रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून पालन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामला उस वायरल वीडियो से जुड़ा है जिसमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी की गई थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की, लेकिन आरोपी तक पहुंचने के बजाय उसके परिवार को थाने में बैठाने की चर्चा पूरे इलाके में फैल गई है।
क्या कहता है कानून?….
कानूनी विशेषज्ञों के मुताबिक भारतीय संविधान और सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट गाइडलाइन कहती है कि किसी आरोपी के परिजनों को केवल दबाव बनाने के लिए हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (Supreme Court Guidelines)…..
सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि:
बिना गिरफ्तारी मेमो किसी को हिरासत में नहीं रखा जा सकता।
हिरासत में लिए गए व्यक्ति को कारण बताना अनिवार्य है।
परिवार को सूचना देना जरूरी है।
थाने में अवैध रूप से बैठाना मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।
संविधान का अनुच्छेद 21…..
हर नागरिक को “जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता” का अधिकार देता है। बिना वैधानिक प्रक्रिया किसी को थाने में रोकना इस अधिकार का उल्लंघन माना जा सकता है।
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)….
नई आपराधिक प्रक्रिया व्यवस्था में भी स्पष्ट है कि कार्रवाई केवल आरोपी के खिलाफ होगी, न कि उसके रिश्तेदारों के खिलाफ, जब तक उनके खिलाफ स्वतंत्र साक्ष्य न हों।
गांव में आक्रोश, पुलिस पर दबाव की राजनीति के आरोप…
ग्रामीणों में चर्चा है कि पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी न होने से परिवार पर दबाव बना रही है। लोगों का कहना है कि यदि आरोपी मुंबई में है तो स्थानीय परिवार को परेशान करना कानून का दुरुपयोग है। पीड़ित परिजनों ने पुलिस अधीक्षक और आई0जी प्रयागराज को पत्र भेजकर न्याय की गुहार लगाई है।

इसी बीच हाल ही में प्रदेश के डीजीपी द्वारा जारी निर्देश भी चर्चा में आ गए हैं। डीजीपी ने स्पष्ट आदेश दिया था कि बिना वैधानिक प्रक्रिया किसी की गिरफ्तारी या हिरासत नहीं होगी। गिरफ्तारी मेमो भरना अनिवार्य होगा और नियमों के उल्लंघन पर संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में पश्चिम शरीरा पुलिस की कार्यशैली पर और भी बड़े सवाल उठ रहे हैं।
मानवाधिकार उल्लंघन की तैयारी?….
सूत्रों के अनुसार परिजन अब पुलिस अधीक्षक, मानवाधिकार आयोग और अदालत का दरवाजा खटखटाने की तैयारी में हैं। यदि हिरासत संबंधी दस्तावेज और गिरफ्तारी प्रक्रिया नहीं दिखाई गई तो मामला पुलिस के लिए भारी पड़ सकता है। फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, लेकिन यह सवाल जरूर खड़ा हो गया है कि क्या कानून आरोपी पर लागू होगा या उसके पूरे परिवार पर?
फिलहाल इस मामले में जब पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत से बात हुई तो उन्होंने कहा मामला संज्ञान में आया है आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है यदि अन्य कोई गिरफ्तारी हुई है तो इसकी जांच करवाएंगे।
अमरनाथ झा पत्रकार – 9415254415
