कौशाम्बी में कागजों में बह रही करोड़ों की ‘हर घर जल’ योजना , गांवों में सूखी टोंटियां, डिप्टी सीएम के क्षेत्र में बदहाल व्यवस्था, ऑपरेटरों की मनमानी और अफसरों की चुप्पी पर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

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Kaushambi voice

👉 करोड़ों की हर घर जल योजना पर कौशाम्बी में बड़ा सवाल, गांवों में सूखी टोंटियां, ऑपरेटरों की मनमानी से लोग परेशान
👉 जिम्मेदार अधिकारी खामोश, शिकायतों पर सिर्फ मिल रहा आश्वासन, तीनों तहसील के अधिकतर गांवों का है बुरा हाल…
👉 डिप्टी सीएम Keshav Prasad Maurya के क्षेत्र में ही बदहाल व्यवस्था…
👉 कोखराज व भैला मकदूमपुर गांव में पानी-सफाई को लेकर भारी नाराजगी ,ग्रामीण बोले—जल्द सुधार नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन…

कौशाम्बी। केंद्र और प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी हर घर जल योजना पर कौशाम्बी में गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद कई गांवों में पानी की सप्लाई ठप है और लोग बूंद-बूंद पानी के लिए परेशान हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि योजना का पैसा तो खर्च हो गया, लेकिन व्यवस्था पूरी तरह लापरवाही और भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिले में पुराने जिलाधिकारी के जाने के बाद इस गंभीर समस्या पर कार्रवाई केवल आश्वासन तक सीमित रह गई है। शिकायतें लगातार हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी आंख मूंदे बैठे हैं।
बताया जा रहा है कि पानी टंकियों पर तैनात प्राइवेट ऑपरेटर खुलेआम मनमानी कर रहे हैं। ग्रामीणों के मुताबिक ऑपरेटरों का साफ कहना है कि “जितना पैसा मिलता है, उतना ही काम करेंगे।” नतीजा यह है कि कई दिनों तक टंकियों से पानी की सप्लाई नहीं होती और गांवों में हाहाकार मचा रहता है।
हैरानी की बात यह है कि यह पूरा मामला सिराथू ब्लॉक की सबसे बड़ी ग्राम सभा कोखराज से जुड़ा है, जो प्रदेश के उपमुख्यमंत्री Keshav Prasad Maurya के क्षेत्र में आती है। डिप्टी सीएम के क्षेत्र में ही सरकारी योजना की ऐसी बदहाल स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रही है।
इसी तरह मंझनपुर तहसील के भैला मकदूमपुर गांव में भी हालात बेहद खराब बताए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि गांव में पानी की सप्लाई कभी-कभार ही होती है, जिससे लोगों को पीने के पानी के लिए भारी परेशानी उठानी पड़ रही है।
सिर्फ पानी ही नहीं, गांवों में सफाई व्यवस्था भी पूरी तरह ध्वस्त बताई जा रही है। आरोप है कि सफाई कर्मी महीनों तक गांव में दिखाई नहीं देता, लेकिन घर बैठे वेतन उठा रहा है। ग्रामीणों का दावा है कि संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चल रहा है और विभागीय स्तर पर बंदरबांट के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
ग्रामीणों में इसको लेकर भारी आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही पानी की नियमित आपूर्ति और सफाई व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। वहीं ग्रामीणों ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी – 9415254415

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