थाना करारी में SC/ST एक्ट प्रकरण में पुलिस की लापरवाही और फर्जी जांच रिपोर्ट का मामला आया सामने, आंबेडकर प्रतिमा की जमीन कब्जा का विरोध करने पर हुई मारपीट, नहीं दर्ज हुई डेढ़ माह भी रिपोर्ट
👉 थाना करारी में SC/ST एक्ट के तहत दर्ज की जाने वाली FIR को पुलिस ने जानबूझकर टाला ,पीड़ित अनिल कुमार ने 112 कॉल और तीन बार SP कार्यालय में शिकायत देने के बावजूद नहीं हुई कोई कार्रवाई ।
👉 थाना प्रभारी और उपनिरीक्षक ने 173(3) BNSS का दुरुपयोग कर FIR से इंकार किया,जांच अधिकारी नंदू यादव द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट पूरी तरह पक्षपाती और फर्जी ।
👉 घटना के समय मौजूद नहीं रहने वाले लोगों के बयान रिपोर्ट में शामिल कर अभियुक्तों को संरक्षण दिया गया।
मारपीट और जातिगत अपमान को “कहा-सुनी” बताकर गंभीर अपराध को छोटा दिखाया गया।
👉 पीड़ित ने IG कार्यालय को आवेदन देकर फर्जी रिपोर्ट निरस्त और दोषियों पर दंडात्मक कार्रवाई की मांग की। यह मामला पुलिस प्रशासन की लापरवाही और SC/ST एक्ट के प्रवर्तन पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
👉 2016 में पहले भी बाबा साहब अंबेडकर की प्रतिमा की जमीन कब्जा करने हेतु 7 लोगों पर लिखाया गया बनवारी लाल विकलांग को आगे करके मनगढ़ंत फर्जी मुकदमा ।
👉 सरकारी जमीन आराजी 170 पर लेखपाल के रोकने के बाद भी कब्जा करने से नहीं मान रहा दबंग, प्रधान पति का मिला है सहयोग,एक बिस्वा जमीन की जगह 6 विश्वा जमीन पर किए है कब्जा …
कौशाम्बी। थाना करारी क्षेत्र में दिनांक 23.11.2025 को हुई जाति-सूचक गालियों, सार्वजनिक अपमान और मारपीट की घटना ने पुलिस प्रशासन की गंभीर लापरवाही और फर्जी रिपोर्टिंग की पोल खोल दी है। पीड़ित अनिल कुमार ने उसी दिन 112 नंबर पर सूचना दी और थाना करारी में लिखित तहरीर प्रस्तुत की, जिसमें SC/ST एक्ट के अंतर्गत संज्ञेय अपराध की जानकारी दी गई थी।
हालांकि, थाना प्रभारी शियाकांत चौरसिया और उपनिरीक्षक नंदू यादव ने FIR दर्ज करने में जानबूझकर विलंब किया और 173(3) BNSS का गलत बहाना बनाकर पीड़ित को न्याय से वंचित किया। इसके पश्चात अनिल कुमार ने 04.12.2025, 07.01.2026 और 12.01.2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।
दिनांक 14.01.2026 को पीड़ित एडीजी प्रयागराज और पुलिस महानिरीक्षक प्रयागराज के कार्यालय में दिए गए आवेदन के साथ थाना करारी द्वारा प्रस्तुत की गई जांच रिपोर्ट भी विवादास्पद पाई गई। उपनिरीक्षक नंदू यादव द्वारा तैयार यह रिपोर्ट तथ्यों के विपरीत थी और इसमें घटना के समय मौजूद नहीं लोगों के बयान शामिल किए गए, मारपीट को केवल “कहा-सुनी” बताकर छोटा किया गया तथा ग्राम सभा की भूमि को गलत रूप से किसी निजी व्यक्ति की बताकर अभियुक्तों को संरक्षण देने का प्रयास किया गया।
विशेषज्ञों और कानूनी जानकारों का कहना है कि इस तरह की फर्जी रिपोर्टिंग SC/ST एक्ट, Lalita Kumari बनाम राज्य (2014) और पुलिस सेवा नियमों के स्पष्ट उल्लंघन के दायरे में आती है।
173(3) BNSS का दुरुपयोग करते हुए FIR न दर्ज करना न केवल कर्तव्य में लापरवाही है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया में भी बाधा डालना है।
पीड़ित अनिल कुमार ने पुलिस महानिरीक्षक और अपर पुलिस महानिदेशक को आवेदन देकर फर्जी जांच रिपोर्ट को निरस्त करने और दोषी अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई व निलंबन की मांग की है। उनका कहना है कि इस मामले में उच्च अधिकारियों द्वारा तुरंत हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो यह SC/ST एक्ट के तहत पीड़ित को न्याय से वंचित करने का गंभीर उदाहरण बन सकता है।हालांकि एक सप्ताह पहले लेखपालने मौके पर जाकर बनवारील , सिवलोचन आदि लोगों सख्त हिदायत दिया था कि वह ग्रामसभा कि जमीन पर प्रतिमा के पास से अवैध कब्जा हटा ले। इस मामले में अनिल कुमार ने तहसीलदिवस में एसडीएम से जमीन पर अवैध कब्जा की शिकायत किया था जिसमें एसडीएम ने तहसीलदार को बाबा साहब प्रतिमा के पास से अतिक्रमण हटवाने और अनिल कुमार से बाउंड्रीवाल करवाकर प्रतिमा सुरक्षित करवाने की बात कही है ।
यह मामला न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है, बल्कि पूरे जिले में SC/ST एक्ट के प्रवर्तन की विश्वसनीयता पर भी प्रभाव डाल सकता है।
अमरनाथ झा पत्रकार कौशाम्बी – 9415254415
