कौशांबी: वन विभाग–पुलिस की खींचतान के बीच धड़ाधड़ काटे जा रहे हरे फलदार पेड़, लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद
👉 कौशांबी: वन विभाग–पुलिस की खींचतान उजागर ,लकड़ी माफियाओं के हौसले बुलंद, धड़ाधड़ काटे जा रहे हरे पेड़
👉 कमालपुर में सागौन के सैकड़ों पेड़ रातों-रात धराशायी ,वन विभाग–पुलिस एक-दूसरे पर डाल रहे जिम्मेदारी
👉 कार्रवाई ठप, शासन से सख्त हस्तक्षेप की मांग
कौशांबी। जिले में हरे व फलदार पेड़ों की अवैध कटान लगातार बढ़ती जा रही है, लेकिन जिम्मेदार विभागों के बीच टकराव के चलते कार्रवाई ठप पड़ी है। चरवा थाना क्षेत्र के सैयद सरावा पुलिस चौकी अन्तर्गत कमालपुर गांव में सागौन के सैकड़ों हरे पेड़ रातों-रात काटकर धराशायी कर दिए गए। ग्रामीणों के अनुसार, लकड़ी माफियाओं की स्थानीय पुलिस और वन विभाग से मिलीभगत से इनकार नहीं किया जा सकता।
एक सप्ताह पूर्व रतगहा गांव में भी इसी तरह की घटना सामने आई थी। ट्विटर एक्स के माध्यम से अवैध कटान की शिकायत शासन–प्रशासन को भेजी गई, लेकिन कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ता पर पोस्ट डिलीट करने का दबाव बनाया गया। बाद में ट्विटर ने बताया कि मामले की जांच के लिए चरवा थाना प्रभारी को निर्देशित किया गया है, लेकिन तीन दिन बीतने के बाद भी किसी तरह की मुकदमेबाजी नहीं हुई।
वन विभाग के कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने आवेदन थाने में दे दिया है और मुकदमा दर्ज कराने का प्रयास चल रहा है। वहीं चरवा थानेदार का कहना है कि “सैकड़ों पेड़ काट दिए गए, और वन विभाग को जानकारी तक नहीं हुई,” जिससे विभागीय लापरवाही उजागर होती है। सवाल उठता है कि इतनी बड़ी कटान बिना विभागीय संरक्षण के संभव ही नहीं।
वन विभाग के अधिकारियों पर आरोप है कि वर्षों से पेड़ कटान का खेल जिले में जारी है और भ्रष्टाचार से अर्जित अकूत संपत्ति की जांच भी कभी नहीं होती। विभागीय आंकड़ों में दर्ज पेड़ों का बड़ा हिस्सा जमीनी स्तर पर मौजूद नहीं है। आरोप है कि चार दर्जन से अधिक लकड़ी माफिया मजदूरों की पूरी टीम लेकर रोजाना पेड़ काटने निकलते हैं, और सबका “रेट फिक्स” है।
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि यदि थाना पुलिस मुकदमा दर्ज नहीं कर रही तो वन विभाग के बड़े अधिकारी मामले को डीएम–कमिश्नर की बैठकों में क्यों नहीं उठा रहे? क्या यही कारण है कि पूरा वन विभाग लकड़ी माफियाओं के सामने बेबस दिख रहा है?
जिले की हरियाली पर मंडराता यह खतरा तभी रुकेगा जब दोनों विभाग अपनी जिम्मेदारी तय कर पारदर्शी कार्रवाई करें, अन्यथा लकड़ी माफिया इसी तरह वन संपदा को चट करते रहेंगे।
AMARNATH JHA, kaushambi (8318977396)
