प्रयागराज नगर निगम टैक्स घोटाला , GIS सर्वे और टैक्स वसूली में खुला भ्रष्टाचार, अब तक नहीं हुई ठोस कार्रवाई
👉 प्रयागराज नगर निगम में 1.44 करोड़ रुपये का टैक्स घोटाला उजागर ,जोन-3 और जोन-7 में आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटरों ने राशि गबन की।
👉 475 फर्जी रसीदों के जरिए सरकारी खजाने को लगाया गया चूना ,GIS आधारित टैक्स सर्वे में भारी अनियमितताएं सामने आईं
👉 गलत नामों और पते पर टैक्स बिल भेजे जाने की शिकायतें बढ़ीं।
सर्वे कराने वाली कंपनी Neo Geo Infotech की भूमिका संदिग्ध।
👉 अब तक नहीं हुई कोई गिरफ्तारी, न ही राशि की वसूली की प्रक्रिया शुरू। नगर निगम प्रशासन की चुप्पी पर उठे जनता के तीखे सवाल।
प्रयागराज नगर निगम में सामने आया 1.44 करोड़ रुपये का टैक्स घोटाला और GIS आधारित भवन कर सर्वेक्षण की खामियों ने नगर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटरों द्वारा टैक्स वसूली की राशि गबन करने का मामला सामने आया है, वहीं दूसरी ओर GIS सर्वेक्षण की प्रक्रिया में व्यापक अनियमितताओं की शिकायतें मिल रही हैं। इन दो बड़े मामलों ने नगर निगम की पारदर्शिता और जवाबदेही को कठघरे में ला खड़ा किया है।
टैक्स वसूली में 1.44 करोड़ का गबन,सूत्रों की माने तो पार्षदों का भी हैं इस घोटाले में हाथ..
नगर निगम के जोन-3 और जोन-7 में तैनात दो आउटसोर्स कंप्यूटर ऑपरेटर – आकाश श्रीवास्तव और सत्यम शुक्ला – पर आरोप है कि इन्होंने जनता से टैक्स वसूलने के बाद उसे निगम के खाते में जमा नहीं किया। जांच में पता चला कि आकाश ने 88 फर्जी रसीदों के जरिए 18.06 लाख रुपये की हेराफेरी की, जबकि सत्यम ने 387 रसीदों से 1.26 करोड़ रुपये की राशि सरकारी कोष में जमा नहीं की। सूत्र तो यह भी बताते हैं कि इस मामले में पार्षदों का भी हाथ है।
यह मामला तब उजागर हुआ जब एक नागरिक द्वारा टैक्स भुगतान की पुष्टि कराते समय निगम रिकॉर्ड में रसीद अनुपलब्ध पाई गई। मुख्य कर निर्धारण अधिकारी पी.के. द्विवेदी ने 30 अप्रैल 2025 को थाना कर्नलगंज में एफआईआर संख्या 152/2025 दर्ज कराई। आरोपियों के विरुद्ध आईपीसी की धाराएं 314, 316(4), 318(4), और 319(2) लगाई गई हैं। इसके बावजूद अब तक कोई गिरफ्तारी या ठोस प्रशासनिक कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे नगर निगम की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।

नगर निगम द्वारा वर्ष 2022 में लागू किया गया GIS आधारित भवन कर सर्वेक्षण, जिसे पारदर्शी और सटीक टैक्स निर्धारण के लिए लाया गया था, अब विवादों में घिर चुका है। सर्वे का जिम्मा Neo Geo Infotech Pvt. Ltd. नामक निजी कंपनी को दिया गया था। स्थानीय सूत्रों का दावा है कि न तो ठीक से जमीनी सर्वे हुआ और न ही जियो टैगिंग का रियल टाइम सत्यापन। कागजी खाना-पूर्ति कर मनमाने टैक्स बिल जारी किए गए हैं।
जनता की शिकायत है कि टैक्स बिल में मकान, जमीन और नाम की पूरी जानकारी गड़बड़ है। किसी की संपत्ति का टैक्स किसी और के नाम पर भेजा जा रहा है। फाइनल प्रकाशन अब तक नहीं हुआ है, जिससे स्थिति और अधिक जटिल हो गई है।
प्रशासनिक चुप्पी और जवाबदेही का अभाव
सबसे चिंताजनक बात यह है कि न तो नगर निगम इस सर्वे पर हुए खर्च का कोई ब्योरा देने को तैयार है, और न ही यह स्पष्ट कर रहा है कि इस काम के लिए भुगतान किसने किया। यह भी सामने आया है कि इस कार्य के लिए कोई औपचारिक वर्क ऑर्डर नहीं दिया गया था, बल्कि शासन से एक सामान्य पत्र के आधार पर कार्य शुरू किया गया।
इस स्थिति ने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं — क्या GIS सर्वे मुफ्त में हुआ? क्या निगम ने कंपनी को भुगतान किया? यदि हां, तो कितना और किस मद से? यह एक बड़ा सवाल है।
प्रयागराज नगर निगम में टैक्स वसूली से लेकर GIS सर्वेक्षण तक में व्याप्त भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता से जनता का विश्वास डगमगाने लगा है। एक ओर जनता मनमाने टैक्स बिलों से परेशान है, दूसरी ओर करोड़ों रुपये की टैक्स राशि गबन होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो रही है। अब देखना यह है कि निगम प्रशासन कब तक आंख मूंदे बैठा रहता है, और क्या इस घोटाले में दोषियों से वसूली और जवाबदेही तय हो पाएगी या नहीं।
अमरनाथ झा पत्रकार – 8318977396
