संदीपन घाट में अपराधों पर अंकुश लगाने में पुलिस नाकाम, 3 माह 20 दिन में 145 मुकदमे दर्ज, अपहरण और चोरी की घटनाओं का खुलासा नहीं
👉 थाना प्रभारी की कार्यशैली पर उठे सवाल, फरियादियों की शिकायतें दर्ज न करने के भी आरोप..
👉 जुलाई में 48,अगस्त में 43, सितंबर में 32,20 अक्टूबर तक 28 मामले दर्ज, कुल 145 मामले हुए दर्ज..
👉 वही जनवरी से लेकर जून तक 6 माह में कुल 132 मामले दर्ज हुए और साढ़े 3 माह में 145 मुकदमे ,थाना प्रभारी की कार्यशैली पर उठे सवाल ,चोरी,अपहरण के मामलो में अधिकतर खुलासे नहीं.
👉 यह तो वह मामले है जो दर्ज है, जबकि दर्जनों अपराध की घटनाएं दर्ज नहीं हो रही हैं,अपराध के ग्राफ को कम करने का है यह संदीपन घाट पुलिस का तरीका…
अमरनाथ झा | कौशाम्बी। (9415254415)
कौशाम्बी जिले के संदीपन घाट थाना क्षेत्र में अपराधों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। स्थानीय लोगों की शिकायतों और दर्ज मुकदमों के आंकड़ों को लेकर पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। आरोप है कि कई फरियादियों की शिकायतों पर मुकदमा दर्ज करने के बजाय उन्हें थाने से वापस लौटा दिया जाता है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। इसके बावजूद चोरी और अपहरण जैसी घटनाओं में प्रभावी कार्रवाई तथा लंबित मामलों के खुलासे को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में 48, अगस्त में 43 और सितंबर में 32 मुकदमे दर्ज किए गए। वहीं, अक्टूबर की 20 तारीख तक करीब 28 मुकदमे दर्ज होने की जानकारी मिली है। इस तरह साढ़े तीन माह के दौरान कुल 148 मुकदमे दर्ज होने का आंकड़ा सामने आता है। इनमें चोरी और अपहरण के मामले भी शामिल हैं। सवाल यह है कि लगातार दर्ज हो रहे मुकदमों के बीच पुलिस अपराधियों तक पहुंचने और घटनाओं का खुलासा करने में कितनी सफल रही है।
जुलाई में सात अपहरण, तीन चोरी और छेड़खानी का मामला
जुलाई माह में दर्ज मामलों का विवरण पुलिस की कार्यप्रणाली की समीक्षा की जरूरत को सामने लाता है। उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, इस महीने अपहरण के सात, चोरी के तीन तथा छेड़खानी का एक मामला दर्ज हुआ। इसके अतिरिक्त वसूली और धमकी से संबंधित एक मामले में पूर्व ब्लॉक प्रमुख का नाम भी सामने आने की बात कही गई है। इन मामलों में आरोपों की पुष्टि संबंधित मुकदमों और पुलिस की विवेचना के आधार पर ही की जा सकती है।
अपहरण के मामलों में नाबालिग लड़कियों के गायब होने की शिकायतें
1. आंचल के गायब होने का मामला: शिकायत के मुताबिक, संदीपन घाट क्षेत्र की निवासी शकुंतला देवी की 20 वर्षीय पुत्री आंचल को गांव का ही एक युवक बहला-फुसलाकर ले गया। शिकायत में आभूषण और करीब 70 हजार रुपये साथ ले जाने का भी आरोप है। इस मामले में अपराध संख्या 142/2026 दर्ज होने की जानकारी दी गई है।
2. सोनी के गायब होने की शिकायत: सीमा देवी की 16 वर्षीय पुत्री 7 सितंबर को गायब होने का मामला बताया गया है। शिकायत में गांव के बबलू नामक युवक सहित एक अन्य व्यक्ति पर उसे ले जाने का आरोप है। उपलब्ध विवरण में अपराध संख्या 143/2026 का उल्लेख है। हालांकि, मुकदमा 9 जुलाई को दर्ज है।
3. सिकंदरपुर बाजार की युवती का मामला: धनपति देवी की पुत्री के 7 सितंबर को गायब होने की शिकायत दर्ज होने की जानकारी है। शिकायत में लखनऊ निवासी इमरान पर युवती को ले जाने का आरोप लगाया गया है, जो कथित तौर पर अपने ननिहाल आया था। इस मामले में 11 जुलाई को अपराध संख्या 139/2026 का उल्लेख है।
4. अंजलि के गायब होने का मामला: प्रीति देवी की 16 वर्षीय पुत्री के 10 जुलाई की रात करीब 11:30 बजे गायब होने की शिकायत की गई। शिकायत में कुसुवा निवासी शंकर उर्फ अरुण पर उसे ले जाने का आरोप है। इस मामले में अपराध संख्या 150/2026 दर्ज है।
5. 14 वर्षीय किशोरी के गायब होने की शिकायत: रघुनाथपुर कॉलोनी निवासी रेनू देवी की 14 वर्षीय पुत्री 18 जुलाई को गायब होने का मामला सामने आया। परिजनों के मुताबिक, मां दवा लेने गई थी और वापस लौटने पर बेटी घर पर नहीं मिली। इस संबंध में 19 जुलाई को अपराध संख्या 162/2026 दर्ज है।
6. बसेड़ी क्षेत्र की किशोरी का मामला: शिव बहादुर चौधरी की पुत्री को 20 जुलाई को गांव का ही ताहिर बहला-फुसलाकर ले गया, ऐसा आरोप शिकायत में लगाए जाने की जानकारी मिली है। इस मामले में अपराध संख्या 166/2026 दर्ज है।
7. दो नाबालिग बच्चों के गायब होने का मामला: कुरई गांव निवासी चांदनी के नौ और दस वर्ष के दो बच्चों के 20 जुलाई को घर से गायब होने की शिकायत सामने आई। इस मामले में 22 जुलाई को अपराध संख्या 168/2026 दर्ज है।
इन मामलों में परिजनों को अपनी संतानों की बरामदगी और निष्पक्ष जांच की उम्मीद है। यह स्पष्ट होना जरूरी है कि पुलिस ने प्रत्येक मामले में अब तक क्या कार्रवाई की, कितने लोगों से पूछताछ हुई और गायब बच्चों तथा युवतियों की बरामदगी की स्थिति क्या है।
जल जीवन मिशन के पंप हाउस से बैटरी चोरी
चोरी की घटनाओं में सरकारी योजनाओं से जुड़े उपकरण भी निशाने पर आने की जानकारी दी गई है। उपलब्ध विवरण के मुताबिक, जल जीवन मिशन के तहत हर घर जल योजना में काम कर रही कल्पतरु प्रोजेक्ट इंटरनेशनल लिमिटेड कंपनी के पंप हाउस से दो बैटरियां चोरी हो गईं।
बताया गया कि 27 जुलाई को सुबह करीब छह बजे पंप ऑपरेटर बरई सलेमपुर स्थित पंप हाउस पहुंचा तो चोरी का पता चला। इस संबंध में अपराध संख्या 174/2026 दर्ज होने की जानकारी दी गई है। सरकारी योजना से जुड़े उपकरणों की सुरक्षा और चोरी गए सामान की बरामदगी को लेकर भी सवाल उठते हैं।
बाइक और ढाबे पर सामान चोरी होने के मामले
उपलब्ध शिकायतों के अनुसार, अर्जुन पुत्र मेवालाल की बाइक चोरी होने का मामला भी सामने आया। बताया गया कि वह अपनी स्प्लेंडर मोटरसाइकिल बजहा में सड़क किनारे खड़ी कर खेत में गया था। वापस लौटने पर बाइक गायब मिली। 15जुलाई की घटना है और मुकदमा संख्या 156/26 दर्ज है।
इसी तरह आदर्श ढाबा, भीटी भैरव के पास मोहम्मद आसिफ की गाड़ी खड़ी कर चाय पीने गया था, गाड़ी से पर्स और मोबाइल चोरी हो गया है। पर्स में करीब 1,500 रुपये होने की बात कही गई है, अ0 संख्या 144/26 दर्ज है। इन घटनाओं में पुलिस ने कितनी प्रगति की, इसकी जानकारी सार्वजनिक होना जरूरी है।
छेड़खानी, धमकी और हमले के आरोप
जुलाई में छेड़खानी से संबंधित एक मामला भी दर्ज होने की जानकारी दी गई है। शिकायतकर्ता नीलम देवी के मुताबिक, उनकी बेटी मनीषा के साथ परीक्षा देकर लौटते समय छेड़खानी की गई। विरोध करने पर कुंदन यादव नामक व्यक्ति पर धमकी देने और हमला करने का आरोप लगाया गया है। शिकायत में दुष्कर्म की धमकी दिए जाने की बात भी कही गई है।
इस मामले में एससी-एसटी अधिनियम के तहत अपराध संख्या 167/2026 दर्ज है। मामले की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष विवेचना, पीड़िता की सुरक्षा और आरोपों के संबंध में कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
थाना प्रभारी की कार्यशैली पर उठ रहे सवाल
संदीपन घाट थाना क्षेत्र में लगातार दर्ज हो रहे मुकदमों और चोरी व अपहरण की शिकायतों के बीच पुलिस की जवाबदेही अहम हो जाती है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ फरियादियों की शिकायतें दर्ज नहीं की जातीं। यदि ऐसा हो रहा है, तो यह गंभीर विषय है और इसकी जांच उच्चाधिकारियों को करनी चाहिए।
हालांकि, केवल मुकदमों की संख्या के आधार पर यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अपराध बढ़ा है या पुलिस पूरी तरह विफल रही है। इसके लिए पिछले महीनों के तुलनात्मक आंकड़े, शिकायतों की संख्या, बरामदगी, गिरफ्तारी और लंबित विवेचनाओं का विवरण पर सवाल उठ रहे हैं।
अब उच्चाधिकारियों की निगरानी पर निगाहें
संदीपन घाट क्षेत्र में दर्ज अपहरण और चोरी के मामलों की स्थिति, पीड़ितों की बरामदगी, चोरी गए सामान की रिकवरी तथा शिकायतकर्ताओं के आरोपों की जांच कराना पुलिस के लिए महत्वपूर्ण है। पुलिस अधीक्षक को थाना क्षेत्र के लंबित मामलों की समीक्षा कर यह स्पष्ट करना चाहिए कि कितने मामलों का खुलासा हुआ, कितने आरोपियों की गिरफ्तारी हुई और कितने मामले अब भी अनसुलझे हैं।
अब देखना यह है कि संदीपन घाट पुलिस लंबित मामलों का खुलासा कर पीड़ितों को न्याय दिला पाती है या नहीं। साथ ही, फरियादियों की शिकायतें दर्ज न करने के आरोपों की जांच होती है या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण होगा।
