सरकारी जमीन पर अवैध कब्जे के मामलों में प्रशासन की जवाबदेही पर हाईकोर्ट सख्त, 90 दिनो में अवैध कब्जा हटाने के आदेश

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👉 सार्वजनिक उपयोग की भूमि, तालाब और चारागाहों के संरक्षण पर जोर; अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई में लापरवाही पर उठाए सवाल..

👉 तालाब से चारागाह तक अवैध कब्जे पर सख्ती की मांग, राजस्व अधिकारियों की भूमिका पर सवाल..

👉 सरकारी जमीन पर कब्जा और आदेशों की अनदेखी पर सवाल, हाईकोर्ट ने बताया जवाबदेही का महत्व..

रिपोर्ट – अमरनाथ झा -9415254415..

प्रयागराज। सरकारी भूमि और सार्वजनिक उपयोग की संपत्तियों पर अवैध कब्जे के मामलों में प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा एक बार फिर इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उठा है। जनहित याचिका संख्या 2923/2025, मनोज कुमार सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं 12 अन्य में न्यायालय ने सार्वजनिक उपयोग की भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने और पहले से पारित आदेशों के प्रभावी अनुपालन से जुड़े सवालों पर विचार किया।
मामले में मिर्जापुर जिले की चुनार तहसील के ग्राम चौका स्थित सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर कथित अतिक्रमण हटाने की मांग की गई थी। याचिका में गाटा संख्या 48, 51 और 53 की भूमि का उल्लेख करते हुए संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई करने तथा 22 जुलाई 2024 को दिए गए प्रार्थना पत्र पर निर्धारित समय में निर्णय लेने का निर्देश देने की मांग की गई थी।

मामले में न्यायमूर्ति प्रवीण कुमार गिरि की पीठ के समक्ष याचिकाकर्ता पक्ष, भूमि प्रबंधक समिति और राज्य सरकार की ओर से पक्ष रखा गया। उपलब्ध विवरण के अनुसार, सुनवाई के दौरान सार्वजनिक भूमि के संरक्षण और अतिक्रमण हटाने से संबंधित पूर्व न्यायिक निर्देशों का भी उल्लेख किया गया।
तालाब, चारागाह और सार्वजनिक जमीन के संरक्षण पर जोर
न्यायिक चर्चा में दयाराम यादव एवं अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले का संदर्भ दिया गया। इसमें सार्वजनिक उपयोग की भूमि से अतिक्रमण हटाने के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने, स्थगन आदेश या लंबित पुनरीक्षण की स्थिति की जांच करने और संबंधित मामलों का शीघ्र निस्तारण करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया था।

इसी क्रम में सर्वोच्च न्यायालय के हिंच लाल तिवारी बनाम कमला देवी एवं अन्य मामले का भी उल्लेख है। इस फैसले में तालाबों जैसी सार्वजनिक उपयोगिता की संपत्तियों के संरक्षण के महत्व को रेखांकित किया गया था। न्यायिक दृष्टिकोण के अनुसार, तालाब, पोखर, चारागाह और अन्य सार्वजनिक भूमि का संरक्षण पर्यावरणीय संतुलन तथा आम लोगों के हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
भूमि प्रबंधक समिति की भी है जिम्मेदारी…
उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 59 और 60 के तहत ग्राम पंचायत को सौंपी गई भूमि और अन्य संपत्तियों के संरक्षण, प्रबंधन तथा नियंत्रण में भूमि प्रबंधक समिति की भूमिका निर्धारित है। इसमें चरागाह, वृक्ष, आबादी स्थल, हाट-बाजार और अन्य सार्वजनिक संपत्तियों का रखरखाव भी शामिल है।
ऐसे मामलों में ग्राम पंचायत, भूमि प्रबंधक समिति और संबंधित राजस्व अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि वे सार्वजनिक संपत्तियों की स्थिति पर निगरानी रखें तथा अतिक्रमण की शिकायत मिलने पर कानून के अनुसार कार्रवाई करें। यदि किसी सक्षम अधिकारी द्वारा अतिक्रमण हटाने का आदेश पारित किया गया है, तो उसके अनुपालन की स्थिति भी स्पष्ट होनी चाहिए।
आदेश और कानूनी धाराओं की पुष्टि जरूरी…
सार्वजनिक भूमि से अवैध कब्जा हटाने के मामलों में कार्रवाई संबंधित कानून, निर्धारित प्रक्रिया और न्यायालय के वास्तविक आदेश के अनुसार की जाती है। ग्राम प्रधान, लेखपाल या राजस्व अधिकारी पर जिम्मेदारी तय करने तथा विभागीय या आपराधिक कार्रवाई करने के लिए संबंधित अधिकारी की भूमिका, उपलब्ध साक्ष्य और लागू कानूनी प्रावधानों की जांच आवश्यक है।

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