थाना संदीपनघाट बढ़ रहे अपराध,नहीं दर्ज हो रहे मुकदमे,क्राइम नंबर 182/26 के चोरी का खुलासा नहीं, पीड़िता को ही थाने से भगाने का आरोप

0
Screenshot_2026-10-15-04-45-39-63_948cd9899890cbd5c2798760b2b95377~2

👉 चोरों तक नहीं पहुंची पुलिस, शिकायत करने पहुंची महिला को बताया झूठा!
👉 दरोगा ने संदिग्ध को पकड़ा, फिर क्यों छोड़ दिया? संदीपनघाट पुलिस की कार्यशैली पर उठे गंभीर सवाल..

कौशाम्बी। घर में चोरी, लाखों के जेवरात गायब, मुकदमा दर्ज होने के बावजूद खुलासे का इंतजार और न्याय मांगने पहुंची पीड़िता को कथित तौर पर थाने से डांटकर भगाने का आरोप! संदीपनघाट थाना क्षेत्र के बदलेपुर गांव का यह मामला पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सवाल यह है कि जब चोरी की घटना में मुकदमा दर्ज है, तो पुलिस अब तक खुलासे तक क्यों नहीं पहुंच सकी? पीड़िता की शिकायत पर कार्रवाई करने के बजाय उसे ही झूठा बताने का आरोप कितना गंभीर है?


मंती देवी पत्नी स्वर्गीय मुन्नीलाल के घर में 2 और 3 अगस्त 2026 की दरमियानी रात चोरी हुई थी। पीड़िता के मुताबिक, चोर घर से करीब 30 हजार रुपये नकद, चांदी की पायल, सोने की माला और अन्य आभूषण उठा ले गए। चोरी गए सामान की कीमत लाखों रुपये बताई जा रही है। मामले में क्राइम नंबर 182/26 दर्ज होने का उल्लेख है, लेकिन पीड़िता का आरोप है कि लंबे समय बाद भी न चोरी का खुलासा हुआ और न ही सामान की बरामदगी हो सकी।
न्याय मांगने गई महिला, थाने में सुनवाई के बजाय डांटने का आरोप…
पीड़िता का आरोप है कि घटना के करीब एक महीने बाद जब वह अपनी फरियाद लेकर थाने पहुंची तो थाना प्रभारी ने उसकी बात गंभीरता से सुनने के बजाय डांटकर भगा दिया। आरोप है कि उसकी शिकायत को झूठा बताया गया। इसके बाद पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक के समक्ष भी प्रार्थना पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई। यदि शिकायतकर्ता को थाने में ही सुनवाई नहीं मिलती, तो वह न्याय के लिए आखिर किस दरवाजे पर जाए?
दरोगा चंद्रभान यादव पर संदिग्ध को पकड़कर छोड़ने का आरोप, पुलिस की भूमिका पर सवाल…
मंती देवी ने गुड्डू सरोज पर चोरी की आशंका जताई है। पीड़िता का यह भी आरोप है कि गुड्डू की ओर से उसे धमकियां दी जा रही हैं। उसका दावा है कि हल्का दरोगा चंद्रभान यादव ने गुड्डू को पकड़ा था, लेकिन बाद में कथित बातचीत के बाद छोड़ दिया। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। पुलिस ने संदिग्ध को किस आधार पर पकड़ा और छोड़ा, क्या उससे पूछताछ हुई तथा जांच में क्या तथ्य सामने आए—इन सवालों का जवाब जरूरी है।
मुकदमा दर्ज, फिर खुलासे में देरी क्यों?
मामले में पुलिस की कथित निष्क्रियता और मिलीभगत को लेकर पीड़िता ने संदेह जताया है। हालांकि, मिलीभगत का आरोप अभी प्रमाणित नहीं है। ऐसे में निष्पक्ष जांच के जरिए सच्चाई सामने लाना जरूरी है।
पुलिस पर उठ रहे हैं कई सीधे सवाल हैं:
क्राइम नंबर 182/26 में अब तक क्या कार्रवाई हुई?
चोरी गए आभूषण और नकदी की बरामदगी के लिए क्या प्रयास किए गए?
पीड़िता के मुताबिक, संदिग्ध को पकड़ने के बाद छोड़े जाने की जांच कौन करेगा?
धमकी मिलने की शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई?
थाना प्रभारी पर महिला को डांटकर भगाने के आरोप की जांच कब होगी?
पुलिस अधीक्षक के यहां दिए गए प्रार्थना पत्र पर क्या निर्णय लिया गया?
चोरी का खुलासा करना, पीड़िता की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पुलिसकर्मियों के खिलाफ लगे आरोपों की निष्पक्ष जांच कराना अब पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। सवाल सिर्फ चोरी का नहीं, बल्कि थाने पहुंची पीड़िता की सुनवाई और पुलिस की जवाबदेही का भी है।

अमरनाथ झा पत्रकार -9415254415

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुख्य ख़बरें