कौशाम्बी: रातभर चला पुलिस और निर्माण कराने वालों के बीच आंख-मिचौली का खेल, सुबह 4:30 बजे तक पड़ता रहा लिंटर
👉 खाद के गड्ढे की जमीन पर प्रशासनिक आदेश बेअसर, दर्जनों बार 112 पर शिकायत के बावजूद नहीं रुका निर्माण
👉 थाने से महज आधा किलोमीटर दूर रातभर होता रहा काम, पुलिस के पहुंचते ही बंद और जाते ही फिर शुरू हो जाता था निर्माण, रात 3 घंटे तक थाने में बैठा रहा फरियादी..
👉 एसडीएम सदर के निर्देश के बावजूद कार्रवाई पर सवाल, लिंटर पड़ने के बाद ही बंद हुआ काम
कौशाम्बी। पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र के पूरब सरीरा गांव में खाद के गड्ढे की जमीन पर निर्माण को लेकर प्रशासनिक कार्रवाई पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। विवादित जमीन पर मकान के लिंटर डालने का काम 16 अक्टूबर की रात करीब 11:30 बजे शुरू हुआ, जो रुक-रुककर 17 अक्टूबर की सुबह करीब 4:30 बजे तक चलता रहा। आरोप है कि इस दौरान दर्जनों बार डायल 112 पर शिकायत की गई, लेकिन निर्माण कार्य नहीं रुक सका। आखिरकार लिंटर पड़ जाने के बाद ही काम बंद हुआ।
मामला आराजी संख्या 2669 पर कथित अतिक्रमण कर बनाए जा रहे मकान से जुड़ा है। शिकायतकर्ता के मुताबिक, तहसील न्यायालय से 30 जनवरी 2025 को राजेंद्र सोनकर, सुरेश सोनकर और सुरेंद्र सोनकर के खिलाफ मकान ध्वस्त कराने तथा 68 हजार रुपये की वसूली का आदेश जारी हुआ था। इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी रहने से राजस्व विभाग की कार्रवाई और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन पर सवाल उठ रहे हैं।
पुलिस आती तो रुक जाता काम, जाते ही फिर शुरू हो जाता था निर्माण

रातभर चले घटनाक्रम में पुलिस और निर्माण कराने वालों के बीच आंख-मिचौली का खेल चलता रहा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि जब भी डायल 112 की पुलिस मौके पर पहुंचती, निर्माण कार्य बंद कर दिया जाता था। पुलिस के वहां से हटते ही दोबारा काम शुरू हो जाता था। इस तरह रातभर पुलिस की आवाजाही होती रही, लेकिन लिंटर डालने का काम नहीं रुक सका। आरोप है कि पुलिस की ओर से केवल हिदायत देकर छोड़ दिया जाता रहा।
सूत्रों के हवाले से यह भी आरोप लगाया जा रहा है कि पुलिस के मौके पर पहुंचने से पहले निर्माण कराने वालों को फोन के जरिए सूचना मिल जाती थी, जिसके चलते कुछ देर के लिए काम रोक दिया जाता था। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसकी जांच होने पर ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
थाने से आधा किलोमीटर दूर होता रहा निर्माण
हैरानी की बात यह है कि जिस स्थान पर रातभर निर्माण कार्य चलता रहा, वह पश्चिम शरीरा थाने से महज आधा किलोमीटर की दूरी पर बताया जा रहा है। शिकायतकर्ता का कहना है कि वह कई घंटे तक थाने में फरियाद लेकर बैठा रहा, जबकि दूसरी ओर विवादित मकान पर लिंटर डालने का काम जारी था। बार-बार शिकायत के बावजूद निर्माण नहीं रुकने से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
एसडीएम के निर्देश के बावजूद नहीं रुका काम
शिकायत के अनुसार, एसडीएम सदर ने फोन पर लेखपाल को निर्माण कार्य रुकवाने और मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने के निर्देश दिए थे। इससे पहले भी राजस्व अधिकारियों और पुलिस की टीम मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य रुकवा चुकी थी। इसके बावजूद रात में दोबारा लिंटर डालने की तैयारी शुरू हो गई। आरोप है कि प्रशासनिक निर्देशों और पूर्व कार्रवाई का निर्माण कराने वालों पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
डेढ़ साल से अधिक समय बाद भी आदेश के पालन का इंतजार..
शिकायतकर्ता बबलू का कहना है कि खाद के गड्ढे में बने विवादित मकान को 30 जनवरी 2025 को ध्वस्त कराने और 68 हजार रुपये की वसूली के आदेश के बावजूद अब तक प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। मामला हाईकोर्ट तक पहुंचने की बात भी सामने आई है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जमीन को लेकर न्यायालयीन और प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाई हो चुकी है, तो कथित अतिक्रमण पर निर्माण कैसे जारी रहा?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि रातभर दर्जनों शिकायतों के बावजूद निर्माण कार्य क्यों नहीं रुकवाया जा सका? क्या संबंधित पुलिस और राजस्व अधिकारियों ने अपने दायित्वों का उचित निर्वहन किया? और क्या जिम्मेदार अधिकारियों की ओर से पूरे मामले की जांच कराकर न्यायालय के आदेश का पालन कराया जाएगा? पूरब सरीरा की इस घटना ने प्रशासनिक आदेशों के प्रभावी क्रियान्वयन और पुलिस की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
— अमरनाथ झा, पत्रकार -9415254415
