कांग्रेस का वादा- सत्ता में आए तो OBC एक्ट लाएंगे:SC-ST एक्ट की तरह होगा; यूपी चुनाव में क्या सपा साथ देगी
कांग्रेस 2027 यूपी विधानसभा चुनाव में ओबीसी दांव खेलने की तैयारी में है। इसके लिए अपने चुनावी घोषणा पत्र में ओबीसी एक्ट लाने का वादा शामिल करेगी। अगर कांग्रेस सत्ता में आई, तो यह एक्ट एससी-एसटी की तरह प्रभावी हो सकता है। एआईसीसी ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय चेयरमैन अनिल जयहिंद कहते हैं- बिहार चुनाव के दौरान राहुल गांधी से मेरी इस पर बात हुई थी। तब यह किसी कारण से संकल्प पत्र में शामिल नहीं हो पाया था। इस बार राहुल गांधी चाहते हैं कि यूपी के विधानसभा चुनाव के संकल्प पत्र में इसे शामिल किया जाए। ओबीसी एक्ट से कांग्रेस को कितना फायदा या नुकसान। क्या सपा भी समर्थन करेगी? ओबीसी एक्ट धरातल में लागू करना कितना आसान होगा? पढ़िए यह स्टोरी… ओबीसी एक्ट की क्यों हो रही मांग डॉ. अनिल जयहिंद कहते हैं- एससी-एसटी एक्ट लाने का मकसद दलितों और आदिवासियों पर हो रहे अत्याचार को रोकना और कानूनी रूप से इस समाज को संरक्षण देना था। हाल के दिनों में ओबीसी, खासकर अति पिछड़ों पर सवर्णों की ओर से उत्पीड़न की कई घटनाएं सामने आई हैं। पहले भी इस तरह की वारदात सामने आती रही हैं। ऐसे में पिछड़े और अति पिछड़े समाज को कानूनी तौर पर प्रोटेक्शन देने के लिए ओबीसी एक्ट लाने की जरूरत महसूस की जा रही है। 3 घटनाओं के उदाहरण से कांग्रेस समझा रही है ओबीसी एक्ट की अहमियत कांग्रेस का ओबीसी विभाग इन घटनाओं को उदाहरण के तौर पर ओबीसी समाज में पेश कर रहा है। बताया जा रहा है कि ओबीसी एक्ट होता, तो तीनों ही हत्याओं को अंजाम देने से सवर्ण समाज के लोगों को सोचना पड़ता। ओबीसी एक्ट से कांग्रेस को कितना फायदा वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- भाजपा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ओबीसी बताकर 2014 से चुनावी फायदा ले रही है। ओबीसी के हर वर्ग को लुभाने का प्रयास भाजपा की ओर से लगातार होता रहा है। यूपी में ओबीसी आबादी 50% से ज्यादा है। कांग्रेस पार्टी यूपी में अपनी पहचान फिर से स्थापित करने की जद्दोजहद कर रही है। ऐसे में ओबीसी एक्ट को चुनावी संकल्प पत्र में शामिल करके वह इस वर्ग को लुभाना चाहती है। ओबीसी मतदाताओं को साधकर ही 2014 के बाद सारी उपलब्धि भाजपा ले उड़ी थी। राष्ट्रीय मुकाबले में यह कांग्रेस का एजेंडा हो सकता है। ओबीसी वर्ग को लुभाने के लिए उसका यह प्रयोग माना जा सकता है। क्या सपा भी ओबीसी एक्ट का समर्थन कर सकती है वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय कहते हैं- दोनों दलों में संभावित गठबंधन तय माना जा रहा है। कांग्रेस की अपनी राष्ट्रीय पहचान है। सपा की क्षेत्रीय दल की पहचान है। सपा का आधार ही ओबीसी है। सपा पीडीए का नारा दे रही है। इसमें ‘पी’ का मतलब पिछड़े वर्ग से है। लेकिन, सपा पीडीए एक्ट को लेकर कांग्रेस से कितना इत्तेफाक रखेगी, यह तय नहीं। सपा इस एक्ट का समर्थन कर सवर्णों की नाराजगी नहीं लेना चाहेगी। ओबीसी एक्ट से क्या सवर्ण नाराज नहीं होंगे वरिष्ठ पत्रकार योगेश मिश्रा ने कहा- भाजपा यूजीसी एक्ट लाकर पश्चाताप कर रही है। अगड़े पहले कांग्रेस के वोटर हुआ करते थे। ओबीसी की राजनीति क्षेत्रीय दल किया करते थे। अगड़े कांग्रेस से दूर हुए, तो उसकी राजनीतिक ताकत घट गई। सरकार के आंकड़ों पर भरोसा करें, तो अभी ओबीसी वर्सेज दलित के मामले ज्यादा आ रहे हैं। ओबीसी एक्ट सोचना भी कांग्रेस के लिए आत्महत्या करने जैसा होगा। आज की तारीख में वैसे भी इसकी जरूरत नहीं है। अभी कांग्रेस नए सिरे से उभर रही है। ऐसी हालत में हर एक वोट महत्वपूर्ण होता है। वरिष्ठ पत्रकार आनंद राय का तर्क अलग है। वे कहते हैं कि देश में एससी-एसटी एक्ट तो कांग्रेस ही लेकर आई थी। क्या दूसरे वर्ग उससे नाराज हो गए? किसी कानून के बनाने से कोई वर्ग नाराज नहीं होता। हर नियम या कानून अच्छी सोच के साथ लाए जाते हैं। असल नाराजगी की वजह कानून के दुरुपयोग को लेकर सामने आती है। एससी-एसटी एक्ट के दुरुपयोग से ही सवर्ण समाज नाराज हुआ। परिणाम सदुपयोग और दुरुपयोग पर निर्भर करेगा। और जिस वर्ग के लिए ये एक्ट लाने की बात होगी, वो वर्ग तो खुश होगा ही। क्या ओबीसी एक्ट लागू करना आसान होगा वरिष्ठ पत्रकार बृजेश शुक्ला कहते हैं- ओबीसी एक्ट संकल्प में तो लाया जा सकता है, लेकिन यथार्थ में इसे लागू करना आसान नहीं होगा। इस एक्ट का आधार क्या होगा? अभी तो दलित ही पिछड़े और अति पिछड़े से ज्यादा परेशान हैं। ऐसे केस में क्या होगा? किसी दलित के साथ ओबीसी का विवाद होने पर कौन-सा एक्ट लगेगा, ये साफ करना पड़ेगा। ओबीसी में छुआछूत जैसा भेदभाव नहीं दिखता। एक्ट में इसे लेकर क्या प्रावधान रखेंगे? जब तक लोगों को कोई फार्मूला नहीं बताएंगे, इसका लाभ नहीं मिलने वाला। कांग्रेस 1989 से यूपी की सत्ता से बाहर है। केंद्र में भी वह पिछले 12 साल से सत्ता से दूर है। ऐसे में उसकी बेचैनी समझ में आती है। ऐसे में जिस एससी-एसटी एक्ट की तर्ज पर ओबीसी एक्ट बनाने की तैयारी है, उसको समझ लेते हैं- ——————————- यह खबर भी पढ़ें – सुरेंद्र कोली फांसी से बरी हुआ, फंदे पर लटका मिला, जहां दुकान खोली, वहां सदाराम बनकर रहा; जेल के 19 साल में कभी जमानत नहीं मिली नोएडा के चर्चित निठारी कांड को लेकर नवंबर, 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा- शक कितना भी गहरा क्यों न हो, पुख्ता सबूत की जगह नहीं ले सकता। इस वाक्य के बाद 13 मामलों में फांसी की सजा पा चुके सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया गया। 19 साल तक जेल में बंद रहा सुरेंद्र छूटने के बाद उत्तराखंड में अपने गांव गया। पहचान बदली और हरिद्वार में चाय की दुकान खोल ली। 18 सितंबर को अचानक एक खबर आई- निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली ने फांसी लगाकर जान दी। पढ़िए पूरी खबर…
