क्या चुनाव से पहले यूपी में लागू होगा UCC:भाजपा को फायदा या नुकसान; इससे क्या बदलेगा, क्या लिव-इन को भी कानूनी दर्जा मिलेगा

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क्या चुनाव से पहले यूपी में लागू होगा UCC:भाजपा को फायदा या नुकसान; इससे क्या बदलेगा, क्या लिव-इन को भी कानूनी दर्जा मिलेगा

गृहमंत्री अमित शाह के बयान के बाद यूपी में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने की अटकलें तेज हैं। इससे पहले उत्तराखंड में UCC लागू हो चुका है। मध्यप्रदेश, असम और गुजरात में बिल पास होने के बाद राष्ट्रपति से मंजूरी के इंतजार में है। यूपी में अभी लिव-इन (बिना शादी किए साथ रहना) को लेकर कोई कानून नहीं है। UCC में इससे जुड़े प्रावधान हो सकते हैं। आज यूपी एक्सप्लेनर में पढ़िए, यहां UCC कब तक लागू हो सकता है? सरकार में इसे लेकर क्या चल रहा है? क्या यूपी में लिव-इन को कानूनी मान्यता मिलेगी? सवाल-1: यूपी में UCC आया तो क्या बदलेगा? क्या लिव-इन को कानूनी दर्जा मिलेगा? जवाब: शादी, तलाक, जमीन-जायदाद और बच्चा गोद लेने से जुड़े नियम सभी धर्मों के लोगों के लिए एक जैसे हो जाएंगे। इसके अलावा लिव-इन के लिए अनिवार्य रजिस्ट्रेशन जैसे नियम आ सकते हैं। आम आदमी की जिंदगी पर इसके असर को यूं समझ सकते हैं… (A) शादी: अभी मुस्लिम धर्म के पुरुषों को एक से ज्यादा शादी की छूट है। UCC आने पर पहली पत्नी या पति के रहते दूसरी शादी नहीं हो सकेगी। ऐसा करने पर जेल होगी। दूसरी शादी तभी होगी, जब ‘कानूनी तौर पर तलाक’ हो चुका हो। हर धर्म के व्यक्ति को शादी करने के बाद रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी होगा। मुस्लिम पर्सनल लॉ में शादी के लिए कोई तय उम्र नहीं है। लड़का-लड़की के प्यूबर्टी (यौवन) हासिल कर लेने पर (आमतौर पर 15 साल) शादी के योग्य माना जाता है। UCC लागू ने पर शादी के लिए लड़के की उम्र 21 साल और लड़की की उम्र 18 साल होनी जरूरी होगी। (B) तलाक: सभी धर्मों के लिए तलाक के नियम एक जैसे होंगे। शरीयत और मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत तलाक-ए-अहसन, तलाक-ए-हसन, खुला, मुबारत और काजी के जरिए तलाक अवैध होंगे। निकाह हलाला पर भी रोक लगेगी। तलाक के बाद महिला को गुजारा भत्ता भी देना होगा। (C) संपत्ति: इस्लाम के अलावा सभी धर्मों के कानून में बेटी को संपत्ति में बराबरी का हक है। लेकिन पर्सनल लॉ के मुताबिक, बेटी को जायदाद में बेटे के हिस्से का आधा हिस्सा मिलता है। आसान शब्दों में, अगर बेटे को 2 रुपए मिलेंगे, तो बेटी को 1 रुपया मिलेगा। अगर बेटी इकलौती संतान है, तो जायदाद का आधा हिस्सा मिलेगा। बाकी दूसरे रिश्तेदारों (जैसे- चाचा, ताऊ) में बंटता है। अगर एक से ज्यादा बेटियां हैं लेकिन बेटा नहीं है, तो जायदाद का दो तिहाई हिस्सा सभी बेटियां में बराबर बंटता है। बाकी एक चौथाई रिश्तेदारों को मिलता है। UCC लागू होने के बाद संपत्ति पर जितना हक बेटे का होगा, उतना ही हक बेटी को भी मिलेगा। (D) बच्चा गोद लेना: मुस्लिम पर्सनल लॉ के मुताबिक, गोद लिए गए बच्चे को माता-पिता की मौत के बाद जायदाद में कोई हिस्सा नहीं मिलता। संपत्ति सगे रिश्तेदारों में बंट जाती है। अगर माता-पिता उस बच्चे को संपत्ति देनी है, तो वे मौत से पहले ‘वसीयत’ लिखकर जाएं। इसमें भी अधिकतम एक-तिहाई (33%) संपत्ति ही गोद लिए बच्चे को दी जा सकती है। UCC लागू होने पर गोद लिए गए बच्चे को वो सभी अधिकार मिलेंगे, जो सगी संतान को मिलते हैं। (E) लिव-इन रिलेशन: इसे लेकर पुख्ता तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। लेकिन, उत्तराखंड और मध्यप्रदेश के UCC कानून को देखें तो कुछ ऐसे नियम हो सकते हैं… लिव-इन में रहने के लिए रजिस्ट्रेशन जरूरी हो सकता है। अगर लड़के या लड़की की उम्र 21 साल से कम है, तो सरकारी अधिकारी इसकी जानकारी माता-पिता या अभिभावक को भेज सकेगा। अगर कोई जोड़ा बिना रजिस्ट्रेशन साथ रह रहा है, तो पुलिस-प्रशासन खुद या पड़ोसी, स्थानीय लोग, मकान मालिक की शिकायत पर जांच कर सकता है। रिश्ता तोड़ने (ब्रेकअप) की भी लिखित जानकारी सरकारी दफ्तर को देनी होगी। मध्यप्रदेश के UCC कानून में ब्रेकअप होने पर महिला अपने पार्टनर से गुजारा भत्ता मांग सकेगी। लिव-इन के दौरान पैदा हुआ बच्चा वैध माना जाएगा। उसे माता-पिता की संपत्ति में पूरा हक मिलेगा। सवाल-2: क्या चुनाव से पहले UCC लागू हो सकता है? इससे भाजपा को क्या फायदा होगा? जवाब: हां, यूपी सरकार आचार संहिता लागू होने से पहले विधानसभा में UCC बिल पेश कर सकती है या इसकी घोषणा कर सकती है। विधानसभा से बिल पास होने और राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू होने में कुछ महीनों का समय लगता है। लेकिन चुनाव से ठीक पहले इसका राजनीतिक इस्तेमाल होना तय है। सवाल-3: भाजपा UCC को राज्य दर राज्य क्यों ला रही है, सीधे संसद से कानून क्यों नहीं बनाती? जवाब: यह सिर्फ यूपी चुनाव जीतने की बात नहीं है। भाजपा के अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि पूरे देश में एक साथ UCC लागू करने के बजाय राज्य दर राज्य लागू करना एक सोची-समझी रणनीति है। इसे ऐसे समझ सकते हैं… सवाल-4: UCC को लेकर यूपी में भाजपा के सहयोगियों का क्या रुख है? जवाब: यूपी में भाजपा के सभी सहयोगी दल UCC के समर्थन में है। ———————————————— ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… क्या संजय निषाद वाकई पाला बदल सकते हैं, SC दर्जे की मांग पर कहां फंसा पेंच; गठबंधन टूटा तो भाजपा को कितना नुकसान यूपी के कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के मुखिया संजय निषाद और नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय की मुलाकात के बाद चर्चाओं का बाजार गर्म है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि संजय निषाद पाला बदलने वाले हैं। इस पर उनका रिएक्शन भी आया। बोले- ‘अगर भाजपा दरवाजा बंद करेगी, तो दूसरे विकल्पों पर विचार करेंगे।’ तो क्या वाकई भाजपा से उनका गठबंधन टूटने वाला है? पढ़िए यूपी एक्सप्लेनर में…

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