क्या राम मंदिर CEO सिर्फ डमी बनकर रह जाएगा:नियुक्ति के बाद भी महासचिव सबसे ज्यादा ताकतवर; चढ़ावे का असली रखवाला कौन…?
राम मंदिर में मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद है, रक्षाबंधन तक कोई रिटायर्ड नौकरशाह यह जिम्मेदारी संभाल लेगा। इसके विज्ञापन में कहा गया था कि CEO ट्रस्ट के महासचिव को रिपोर्ट करेगा। तो क्या CEO की नियुक्ति के बाद भी महासचिव के पास ही सारी ताकत रहेगी? कहीं CEO सिर्फ डमी बनकर तो नहीं रह जाएगा? चढ़ावा गिनती की निगरानी कौन करेगा? जानेंगे आज यूपी एक्सप्लेनर में… सवाल-1: क्या CEO बनने के बाद भी महासचिव सबसे ज्यादा ताकतवर रहेगा? जवाब: हां… ट्रस्ट के संविधान और CEO की भर्ती के लिए जारी विज्ञापन से यही साबित होता है। सवाल-2: राम मंदिर CEO के पास काशी विश्वनाथ के CEO जैसी ताकत क्यों नहीं? जवाब: यह जानने के लिए दोनों मंदिर ट्रस्टों का संगठनात्मक ढांचा समझना होगा… सवाल- 3: तो क्या राम मंदिर का CEO सिर्फ डमी बनकर रह जाएगा?
जवाब: ऐसा कहना ठीक नहीं होगा। पद की शक्तियां और सीमाएं साफ हैं। इसे ऐसे समझ सकते हैं… सवाल-4: राम मंदिर में CEO की नियुक्ति कैसे होगी? जवाब: इसकी पूरी एक प्रक्रिया है… ——————————- ये एक्सप्लेनर भी पढ़ें… जौहर यूनिवर्सिटी टूटने से भाजपा को क्या मिलेगा, 38 इमारतें अवैध तो सपा विरोध क्यों कर रही, क्या पूरी यूनिवर्सिटी गिरा दी जाएगी जौहर यूनिवर्सिटी की 38 इमारतें ढहाने के आदेश से भाजपा और सपा के बीच राजनीति तेज है। भाजपा इसे ‘भूमाफिया’ पर कार्रवाई बता रही है। वहीं, सपा, भाजपा को ‘यूनिवर्सिटी तोड़ने वाला आक्रांता’ कह रही है। लेकिन इमारतें अवैध हैं तो सपा कार्रवाई का विरोध क्यों कर रही है? क्या सभी 38 इमारतें ढहा दी जाएंगी? जानिए यूपी एक्सप्लेनर में…
