CJP प्रदर्शन के बाद बर्खास्त प्रोफेसर बोले- क्या गुनाह किया:छात्रों की आवाज ही तो उठाई थी, बरेली में कहा- राजा रक्षा करता है प्रताड़ित नहीं

0
CJP प्रदर्शन के बाद बर्खास्त प्रोफेसर बोले- क्या गुनाह किया:छात्रों की आवाज ही तो उठाई थी, बरेली में कहा- राजा रक्षा करता है प्रताड़ित नहीं

बरेली के डिग्री कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर मोहित भारद्वाज को बर्खास्त कर दिया गया। प्रोफेसर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के आंदोलन में शामिल हुए थे। उन्होंने नारे लगाए थे- मोदी तुम होश में आओ…मोदी जब-जब डरता है, पुलिस को आगे करता है…। 22 जुलाई को उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया। दैनिक भास्कर ने प्रोफेसर मोहित भारद्वाज से बात की। उन्होंने कहा- लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने की पूरी आजादी है। यूपी के एडेड कॉलेजों में दर्जनों ऐसे टीचर और प्रोफेसर थे, जो आज विधायक और मंत्री बनकर बैठे हैं। अगर वे राजनीति कर सकते हैं, तो क्या एक आम टीचर छात्रों और बेरोजगार युवाओं के लिए आवाज नहीं उठा सकता? सत्ताधारी पार्टी से जुड़े लोग जब भगवा गमछा या RSS की काली टोपी पहनकर कॉलेज परिसरों में खुलेआम शक्ति प्रदर्शन करते हैं। तब किसी को कोई आपत्ति नहीं होती। क्या जंतर-मंतर जाकर छात्रों के हक में आवाज उठाना मेरा सबसे बड़ा गुनाह बन गया? राजा का धर्म अपनी प्रजा की रक्षा करना होता है, उन्हें प्रताड़ित करना नहीं। जब पेपर लीक से छात्र डिप्रेशन में आकर सुसाइड कर रहे हों, तब चुप रहना ही सरकार का सबसे बड़ा गुनाह है। मोहित भारद्वाज समाजवादी पार्टी युवजन सभा के अध्यक्ष हैं। साथ ही बरेली के बहेड़ी में गन्ना उत्पादक स्नातकोत्तर महाविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर थे। मोहित भारद्वाज का पूरा इंटरव्यू पढ़िए… सवाल : जंतर-मंतर पर नारे लगाने के बाद नौकरी से निकाल दिया गया। आपकी क्या गलती थी?
जवाब: हम लोकतंत्र में जी रहे हैं। जहां हर नागरिक को अपनी बात रखने और विरोध दर्ज कराने का अधिकार है। मैंने कॉलेज में हमेशा पूरी ईमानदारी से पढ़ाया। जब हमारे पढ़ाए हुए छात्र पुलिस भर्ती परीक्षा देते हैं और अगले ही पल री-एग्जाम या पेपर लीक के चलते उनकी मेहनत बर्बाद हो जाती है। उस बर्बादी का दर्द सिर्फ छात्र को नहीं, उसके टीचर को भी झकझोर देता है। नीट जैसे मामलों या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में जब छात्रों का भविष्य अंधकारमय होता देखा, तो एक टीचर के तौर पर मेरा जमीर नहीं माना। सोनम वांगचुक के आह्वान पर 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर छात्रों के साथ सड़कों पर उतर गया। सवाल : क्या आपको सिर्फ इसलिए बर्खास्त किया गया, क्योंकि सपा से जुड़े हैं?
जवाब: बिल्कुल, असली वजह यही है। मैंने तो बाकायदा कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक दीपके समेत तमाम लोगों को वॉट्सएप चैट के सबूत भेजे हैं। जिस तरह से सत्ता के दबाव में बदले की भावना से यह कार्रवाई की गई है, वह पूरी तरह से तानाशाही है। मैं कागजों पर भले ही युवजन सभा का अध्यक्ष रहा हूं, लेकिन मैंने अपनी पूरी ऊर्जा और समय अपने छात्रों और कॉलेज को दिया है। सवाल : क्या आपको लगता है कि कॉलेज प्रबंधन पर राजनीतिक दबाव था?
जवाब: जाहिर है, प्रबंधन समिति पर भारी-भरकम राजनीतिक दबाव था। उसी के इशारे पर यह सब रातों-रात हुआ है। अभी कुछ दिन पहले ही जब मैं कुमाऊं यूनिवर्सिटी में आवेदन कर रहा था, तब इसी कॉलेज के प्रबंधक ने मुझे एनओसी (NOC) दी थी। उस एनओसी और प्रिंसिपल के दिए चरित्र प्रमाण पत्र में मेरी कार्यकुशलता, ईमानदारी और विभिन्न समितियों में मेरी सक्रिय भूमिका की खुलकर प्रशंसा की गई थी। जो टीचर कल तक उनकी नजरों में सबसे ईमानदार और मेहनती था, वह जंतर-मंतर के एक प्रोटेस्ट में शामिल होते ही अचानक कैसे अयोग्य हो गया? यह साफ तौर पर ऊपर से आए राजनीतिक दबाव का नतीजा है। सवाल : क्या ब्राह्मण होने की वजह से भी आपके साथ भेदभाव हुआ?
जवाब: पूरे प्रदेश के हालात सबके सामने हैं। आज की तारीख में आप निष्पक्षता से रिकॉर्ड उठाकर देखें। बहुसंख्यक समाज में सबसे ज्यादा शोषण और टारगेट अगर किसी वर्ग को किया जा रहा है, तो वह ब्राह्मण समाज है। चाहे प्रशासनिक महकमा हो या सार्वजनिक मंच, आज हर जगह एक खास रणनीति के तहत सिर्फ और सिर्फ ब्राह्मणों को निशाना बनाकर प्रताड़ित किया जा रहा है। मेरा मामला भी उसी की एक कड़ी हो सकता है। सवाल : 2 साल के कार्यकाल में क्या कॉलेज प्रशासन आपसे नाराज था?
जवाब: मेरे वॉट्सऐप चैट देखिए। हमारे छात्र लिख रहे हैं कि सर, हमें नींद नहीं आ रही है। हम परेशान हैं। बताइए हमें क्या करना है? यह छात्रों का मेरे प्रति सच्चा प्रेम है। अगर कॉलेज प्रशासन का रवैया सही था, तो उन्होंने मुझे वॉट्सएप ग्रुप से रातों-रात रिमूव क्यों किया? उन्हें डर था कि कहीं मेरे समर्थन में पूरा कॉलेज और छात्र लामबंद न हो जाएं। आज भी छात्रों में भारी गुस्सा है। अगर मुझे जल्द न्याय नहीं मिला, तो छात्र खुद कॉलेज प्रशासन के खिलाफ बड़े आंदोलन और ट्रांसफर की मांग को लेकर सड़क पर उतरने को तैयार बैठे हैं। सवाल : क्या इस पूरे मामले में सपा आपके साथ मजबूती से खड़ी है?
जवाब: पूरी पार्टी और नेतृत्व इस मुश्किल वक्त में चट्टान की तरह मेरे साथ है। आज सुबह ही पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन का और हमारे महानगर अध्यक्ष का फोन आया था। उन्होंने साफ कहा कि मोहित भाई, आप अकेले नहीं हैं। पार्टी आपके साथ पूरी मजबूती से खड़ी है। जिस स्तर पर भी कानूनी या राजनीतिक लड़ाई लड़नी होगी, हम सब आपके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं। सवाल : जंतर-मंतर पर छात्रों पर हुए लाठीचार्ज को लेकर मन में क्या चल रहा था?
जवाब: उस वीभत्स मंजर को याद कर आज भी रूह कांप जाती है। जिस बेरहमी से पुलिस ने लाठियां भांजीं, क्या वह मानवता की किसी भी परिभाषा में जायज है? बेटियां इस देश का भविष्य और मान हैं। जब पुलिसकर्मियों ने उन पर डंडे बरसाए और उनके साथ अमानवीय हरकतें कीं, तो एक टीचर और इंसान होने के नाते मेरा सीना चीख उठा। क्या यही ‘बेटी बचाओ’ का असली मॉडल है? सवाल : आंदोलन में शामिल छात्रों को सोशल मीडिया पर देशद्रोही बताया गया?
जवाब: जब किसान अपने हक के लिए बैठे, तो उन्हें खालिस्तानी कह दिया गया। जब छात्र अपने भविष्य के लिए सड़क पर उतरे, तो उन पर विदेश से फंडिंग लेने का झूठा ठप्पा लगा दिया गया। खुद देश के विदेश मंत्री का बयान आ चुका है कि जांच में ऐसी किसी भी फंडिंग की पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन, सत्ता में बैठे लोगों की आदत बन चुकी है कि जो भी सरकार से सवाल पूछे, उसे सीधे ‘देशद्रोही’ या ‘आतंकवादी’ घोषित कर दो। क्या ‘इंकलाब जिंदाबाद’, ‘भारत माता की जय’ कहना या पेपर लीक के खिलाफ आवाज उठाना देशद्रोह है? सवाल : इस आंदोलन और इससे पहले के बड़े आंदोलन को आप कैसे देखते हैं?
जवाब: यह किसी एक राजनीतिक दल का नहीं, देश के हर उस पीड़ित परिवार का आंदोलन था, जिसके बच्चे पेपर लीक से पीड़ित हैं। मैंने उस प्रोटेस्ट में 80-90 साल के बुजुर्गों को देखा। एक दिव्यांग युवक को 3 दिन तक अपनी ट्राईसाइकिल चलाकर वहां पहुंचते देखा। इसमें 30 से 35% संख्या सिर्फ महिलाओं और बेटियों की थी, जिन्होंने अपनी नौकरियां और पढ़ाई छोड़कर इस लड़ाई में हिस्सा लिया। इतिहास गवाह है कि महात्मा गांधी और अन्ना हजारे के आंदोलनों की तरह यह एक ऐसा जनसैलाब था, जिसके सामने सत्ता को झुकना ही पड़ा। सवाल : लगातार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी को कैसे देखते हैं?
जवाब: मेरे कॉलेज का एक छात्र राहुल शर्मा पुलिस भर्ती परीक्षा की तैयारी कर रहा था। पहले पेपर में उसके शानदार नंबर आए, लेकिन री-एग्जाम या सिस्टम की धांधली के बाद उसके नंबर निल हो गए। वह बच्चा आज डिप्रेशन में है। जब हमारे पढ़ाए बच्चे ऐसे टूटते हैं, तो एक गुरु का दिल छलनी हो जाता है। कॉलेज का प्रबंधन खुद को उस शिक्षण संस्थान का मालिक समझ बैठा है। जबकि, यह महाविद्यालय बहेड़ी के गरीब गन्ना किसानों की पाई-पाई जोड़कर खड़ा किया गया मंदिर है। ये तथाकथित प्रबंधक तो 5 साल के लिए कुर्सी पर बैठने वाले किराएदार भर हैं। ————————- ये खबर भी पढ़िए- आप आटा खा रहे हैं या सफेद पत्थर, यूपी की फैक्ट्रियों में गेहूं के साथ पत्थर की पिसाई, मजदूर बनकर रिपोर्टर का खुलासा ‘ये सफेद पत्थर का चूरा है, इसे आटे में मिलाते हैं, जिससे ज्यादा मुनाफा हो। आने वाले समय में यह लोगों को इतनी बीमारियां करेगा कि डॉक्टर भी कहने लगेंगे- भाई तेरा इलाज नहीं है।’ यह कहना है आगरा के पास आटा फैक्ट्री में काम करने वाले ऑपरेटर सोनू कुमार का। वह बताता है कि फैक्ट्री मालिक ज्यादा मुनाफे के लिए आटे में सफेद पत्थर का चूरा मिलाते हैं। ये मिलावटी आटा देशभर में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर बिक रहा है। पढ़िए भास्कर इन्वेस्टिगेशन…

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

मुख्य ख़बरें