‘मेरा बच्चा कहां है, उसे ले आओ’:नोएडा में 6 साल का बेटा खोने वाली मां का दर्द; भाई भी बार-बार रो रहा
“मेरा बच्चा कहां है.. कोई मेरे बच्चे को ला दो..” 3 दिन से बस यही रट लगा रही है वो मां, जिसके 6 साल के बेटे आव्यान की नोएडा में 15 फीट गहरे गड्ढे में गिरने से मौत हो गई थी। घर के कमरे में बेड पर बेसुध लेटी आव्यान की मां इस आस में अपनी आंखें खोलकर दरवाजे की तरफ देखती हैं, जैसे बेटा अभी दौड़ता हुआ अंदर आएगा। लेकिन, अगले ही पल फूट-फूटकर रो पड़ती हैं। फिर बेसुध हो जाती हैं। आव्यान का बड़ा भाई उसके खिलौने और कपड़ों को हमेशा अपने साथ रखता है। एक कोने में बैठकर कभी रोने लगता है, तो कभी उसके खिलौने से बात करते हुए खेलने लगता है। दैनिक भास्कर की टीम ग्रेटर नोएडा की कालधाम सोसाइटी में उस घर पहुंची, जहां आव्यान की मौत ने सिर्फ एक परिवार नहीं, पूरी सोसाइटी को गहरे सदमे में डाल दिया है। घर के बाहर लोगों की भीड़ नहीं थी। सिर्फ सन्नाटा था। ऐसा सन्नाटा, जो हर गुजरने वाले को घटना के दर्द का अहसास करा रहा था। आव्यान की मां बेसुध, खाना भी नहीं खा रहीं आव्यान के पिता शिवान यादव केंद्रीय विद्यालय में वाइस प्रिंसिपल हैं। जब हम आव्यान के घर पहुंचे, तो पता चला पिता बेटे की अस्थियां लेकर हरिद्वार गए हैं। घर का दरवाजा बंद था। बाहर खड़े एक पड़ोसी ने धीमी आवाज में हमसे कहा- भाभी की हालत बहुत खराब है। कुछ बोल नहीं पा रही हैं। बार-बार सिर्फ यही पूछ रही हैं कि मेरा बच्चा कहां है? पड़ोसी भी अंदर से बाहर आए थे, इसलिए उनकी आंखें भी नम थी। उन्होंने बताया- आव्यान की मां एक कमरे में बेड पर लेटी हैं। वो किसी से मिलने-जुलने की स्थिति में नहीं हैं। हर पल उन्हें आव्यान के आने का इंतजार रहता है। कभी आंखें खोलती हैं, तो फिर बंद कर लेती हैं। किसी से बात नहीं कर पा रही हैं। बस बेटे को याद करके रो पड़ती हैं। वो कुछ भी खा-पी नहीं रही हैं। उन्हें किसी चीज का होश नहीं। रिश्तेदार बार-बार उन्हें समझाकर कर खाना खिलाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन वह कुछ भी खाने से मना कर देती हैं। आव्यान के बड़े भाई का भी यही हाल है। वह 9 साल का है। अपने छोटे भाई को याद कर बार-बार रोने लगता है। घर से सिर्फ 100 मीटर की दूरी खत्म हुई जिंदगी जिस घर में कभी बच्चे के खेलने और खिलखिलाने की आवाजें गूंजती थीं, वहां से महज 100 मीटर दूर वह गड्ढा है, जिसने पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। आव्यान के पिता शिवान यादव का कॉर्नर पर ए-1 नंबर का मकान है। घर से पार्क साफ दिखाई देता है और वहीं पास में वह खुला गड्ढा भी है। पड़ोसियों ने बताया कि शनिवार शाम बच्चा पार्क में दोस्तों के साथ क्रिकेट खेल रहा था। खेलते-खेलते गेंद गड्ढे की तरफ चली गई। वह उसे उठाने गया, तभी पैर फिसला और सीधे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरा। शोर मचते ही लोग दौड़े। किसी को सिर्फ उसके पैर दिखाई दिए। लोोगं ने उसी पैर को पकड़कर बाहर निकाला। अस्पताल ले गए, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बड़ा भाई खिलौनों से खेलते-खेलते रोने लगता है आव्यान का 9 साल का बड़ा भाई है। वो अधिकतर समय घर में आव्यान के खिलौनों और उसके कपड़ों को खुद से चिपकाए एक कोने में बैठा रहता है। कभी रोने लगता है, तो कभी खिलौनों से बात करते हुए खेलने लगता है। पूरा परिवार आव्यान के आने के इंतजार करता रहता है। पड़ोसियों का कहना है, परिवार की हालत ऐसी है कि किसी के पास उन्हें दिलासा देने के लिए शब्द भी नहीं हैं। अब सिर्फ इंसाफ की मांग इस हादसे के बाद सोसाइटी के लोग भी गुस्से में हैं। उनका कहना है कि जिस जगह काम चल रहा था, उसकी सही जानकारी लोगों को नहीं दी गई। अगर सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होते, तो शायद एक मासूम की जान बच जाती। सोसाइटी के निवासियों ने सामूहिक शिकायत पत्र तैयार किया है, जिस पर लोगों के हस्ताक्षर कराए जा रहे हैं। उनका कहना है कि हम जल्द ही जिलाधिकारी और उच्च अधिकारियों से मिलकर इस मामले में जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग करेंगे। क्या कहते हैं सोसाइटी के लोग मैं अभिजीत पाठक, यहां का रेजिडेंट हूं। एक्चुअली आप समझ सकते हैं कि घर में अगर कोई 6 साल का बच्चा, जो आपके सामने खेल रहा हो। अचानक मां को पता चले कि अब वो जिंदा नहीं है। न ही कभी वापस आएगा। तो सोचिए उस मां और परिवार पर क्या गुजरेगी? सबसे दुर्भाग्य की बात यह है कि ये जो गड्ढा खोदा गया है, इसकी सूचना ना तो किसी रेजिडेंट्स को थी और न यहां के आरडब्ल्यूए टीम को थी। आव्यान की मां की हालत बहुत ही खराब है। मैं क्या बताऊं, कितनी दुखद घटना है। एक घर में इतने छोटे बच्चे का चला जाना, इससे दुखद घटना और कुछ भी नहीं हो सकती। श्मशान जाते समय अथॉरिटी ने मिसबिहेव किया मैं रितिका, यहां की रेजिडेंट हूं और एक कलाकार हूं। शनिवार रात जो घटना हुई, उसके बाद रविवार को हम श्मशान जा रहे थे। तब भी अथॉरिटी के लोगों ने हमारे साथ दुर्व्यवहार किया। ये बहुत ही निंदनीय है। आज हम सब कम्युनिटी के लोग एक साथ इकट्ठा हुए हैं। सिर्फ इसलिए कि हम एक-दूसरे को सपोर्ट कर सकें और गलत के खिलाफ आवाज उठा सकें। अथॉरिटी का काम लोगों की मदद करना है। यहां तो पावर का टोटली मिसयूज हो रहा है। ये बात बड़े अधिकारियों तक पहुंचनी चाहिए। जिससे फ्यूचर में इस तरह की लापरवाही दोबारा न हो और लोगों की जान नहीं जाए। मै शुशांत गुहा हूं, यहां का रेजिडेंट हूं। शिवानजी के घर पर काफी लोग आए थे। पुलिस अधिकारी, एसडीएम उनके घर पर मौजूद थे। उन्होंने भी दुख जताया है। आव्यान के माता-पिता से भी मिले। आश्वासन दिया है कि हम इस पे एक्शन लेंगे, कार्रवाई करेंगे। लेकिन, RWA की तरफ से कोई पिटिशन देना चाहिए। इसलिए हम लापरवाही करने वालों के खिलाफ अपील डाल रहे हैं। —————————— यह खबर भी पढ़ें… नोएडा में 6 साल के बच्चे की मौत के 5-जिम्मेदार, अथॉरिटी के सीईओ ने कभी जांच नहीं की; ठेकेदार मनमानी करता रहा ग्रेटर नोएडा में सिस्टम की लापरवाही ने 6 साल के मासूम आव्यान की जिंदगी छीन ली। इस मामले में 5 लोगों की सीधी लापरवाही सामने आई है। न तो ग्रेटर नोएडा विकास प्राधिकरण के सीईओ ने कभी निर्माण कार्यों और सुरक्षा मानकों की जांच कराई और न ही ठेकेदार ने सुरक्षा के जरूरी इंतजाम किए। अफसरों की ढिलाई की वजह से ठेकेदार लगातार मनमानी करता रहा। पढ़ें पूरी खबर…
